राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में सरकारी रवैए पर कोर्ट सख्त, राजस्थान-MP के अफसर तलब
Aman Vaishnav | May 15, 2026, 11:36 IST
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सुप्रीम कोर्ट ने चंबल अभयारण्य में अवैध बालू खनन रोकने में नाकाम रहने पर राजस्थान और मध्य प्रदेश के वरिष्ठ IAS अधिकारियों को 20 मई को तलब किया है। कोर्ट ने राजस्थान सरकार के रवैए को पूरी तरह लापरवाह और उदासीन बताया है।
समझें क्या है पूरा मामला
- चंबल अभयारण्य में अवैध बालू खनन बड़ी समस्या बन चुकी है।
- सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान और MP के वरिष्ठ अफसरों को तलब किया है।
- कोर्ट ने राजस्थान सरकार के रवैये को लापरवाह और उदासीन बताया है।
- पुल की नींव के नीचे तक खनन हो रहा है, NHAI को भी नोटिस मिला है।
- 20 मई को अफसरों को हलफनामे के साथ कोर्ट में हाजिर होना होगा।
चंबल में अवैध खनन और SC की सख्ती
जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच ने यह सुनवाई की है। कोर्ट ने कहा कि राजस्थान सरकार ने पहले दिए गए निर्देशों का पालन करने में पूरी तरह लापरवाह, उदासीन और सुस्त रवैया दिखाया है।
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राजस्थान को कड़ी फटकार
कोर्ट ने राजस्थान के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) को 20 मई को व्यक्तिगत रूप से हाजिर होने का निर्देश दिया है। खनन और भूविज्ञान, वित्त, वन, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन, तथा परिवहन एवं सड़क सुरक्षा विभागों के प्रमुख सचिवों को भी बुलाया गया है।
हर अधिकारी को अपना अलग हलफनामा दाखिल करना होगा। इसमें पहले के निर्देशों पर हुई कार्रवाई का ब्यौरा देना होगा।
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MP की स्थिति भी संतोषजनक नहीं
इसलिए MP के परिवहन और सड़क सुरक्षा विभाग के प्रमुख सचिव को भी 20 मई को हाजिर होने का आदेश दिया गया है। उन्हें भी विस्तृत हलफनामा देना होगा।
यह पूरी सुनवाई एक स्वतः संज्ञान मामले में हो रही है। इसकी शुरुआत उन मीडिया रिपोर्टों के बाद हुई थी जिनमें चंबल में अवैध खनन माफिया की करतूतों का खुलासा किया गया था।
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अफसर मारे गए, माफिया बेखौफ
एक और बड़ी समस्या यह है कि अवैध खनन के मामलों में दर्ज FIR में सिर्फ वाहन चालकों को आरोपी बनाया जा रहा है। माफिया के असली सरगनाओं तक कार्रवाई नहीं पहुंच रही है। कोर्ट ने इसे जानबूझकर की गई लापरवाही और संभावित मिलीभगत का संकेत बताया है।
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पुल की नींव खोद रहा माफिया
कोर्ट ने इसे बेहद चौंकाने वाला बताया है। इसे राज्य की मशीनरी की पूर्ण विफलता करार दिया गया है। इसके बाद कोर्ट ने NHAI (National Highways Authority of India) को इस मामले में पक्षकार बनाया गया है। NHAI को पुल की संरचनात्मक सुरक्षा पर हलफनामा दाखिल करने को कहा गया है।
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NHAI पर भी जिम्मेदारी
कोर्ट ने यह भी साफ किया कि अफसरों के हलफनामों में यह जानकारी जरूर होनी चाहिए कि, बिना पंजीकरण वाले और अज्ञात वाहनों की पहचान और रोकथाम के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।
20 मई को होगा फैसले का सामना
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यह खबर क्यों जरूरी है
यह खबर इसलिए भी जरूरी है क्योंकि यह संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत नागरिकों के स्वस्थ पर्यावरण में जीने के मौलिक अधिकार से जुड़ी है।
जब अधिकारी माफिया के हाथों मारे जाते हैं और FIR में सिर्फ ड्राइवरों को फंसाया जाता है, तो यह कानून के शासन पर सीधा हमला है। सुप्रीम कोर्ट का यह हस्तक्षेप न्यायिक जवाबदेही का जरूरी उदाहरण है।
FAQ
- राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य क्या है और यह क्यों खास है?
राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य भारत का पहला और एकमात्र त्रि-राज्यीय नदी संरक्षित क्षेत्र है। यह राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश तीनों राज्यों में फैला हुआ है। यहां गंभीर रूप से संकटग्रस्त घड़ियाल, गंगा नदी डॉल्फिन और रेड-क्राउन्ड रूफ टर्टल जैसी दुर्लभ प्रजातियां पाई जाती हैं। चंबल नदी देश की सबसे कम प्रदूषित नदियों में से एक मानी जाती है। इसीलिए यहां अवैध खनन से होने वाला नुकसान अपूरणीय माना जा रहा है।
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