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Photograph: (the sootr)
News in Short
- छतरपुर कलेक्टर को कोर्ट ने आदेश की अवहेलना करने पर कारण बताओ नोटिस जारी किया।
- जमीनी विवाद में कलेक्टर ने कोर्ट के आदेशों की अनदेखी की।
- कलेक्टर के खिलाफ दंडात्मक कार्यवाही की चेतावनी दी गई है।
- प्रशासन को 10 मार्च तक कोर्ट में जवाब देना होगा।
- कोर्ट ने कलेक्टर के खिलाफ सरकारी वाहन और कुर्सी कुर्क करने की चेतावनी दी।
News in Detail
Chhatarpur. छतरपुर जिला न्यायालय ने कलेक्टर के खिलाफ सख्त कदम उठाया है। यह मामला एक जमीनी विवाद से जुड़ा हुआ है, जिसमें कोर्ट के आदेश की अवहेलना की गई। व्यवहार न्यायाधीश दिव्यांशु गुप्ता ने छतरपुर कलेक्टर पार्थ जैसवाल को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
यह नोटिस उनके द्वारा आदेश की अनदेखी और असहयोग करने के बाद जारी किया गया है। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से पूछा कि कलेक्टर के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही क्यों न की जाए, जिसमें उनके सरकारी वाहन और कुर्सी को कुर्क करने का आदेश दिया जा सकता है।
क्या था जमीनी विवाद?
ग्राम बकायन स्थित 11.12 एकड़ भूमि का पट्टा 1960 में दयाराम काछी को दिया गया था। 2012 तक इस भूमि का रिकॉर्ड दयाराम के नाम था। बाद में तहसीलदार ने इसे शासन के नाम पर दर्ज कर दिया। वर्ष 2019 में षष्टम अपर जिला न्यायाधीश ने इस भूमि पर दयाराम के पुत्र दामोदर और गोविंद दास कुशवाहा को स्वामी माना और स्थायी स्टे दे दिया।
कमिश्नर और तहसीलदार के आदेशों की अवहेलना
सागर संभाग के कमिश्नर और तहसीलदार ने भूमि के रिकॉर्ड को सही करने का आदेश दिया था, लेकिन कलेक्टर ने इन आदेशों को नजरअंदाज किया। 26 सितंबर 2022 और 3 अक्टूबर 2023 को कमिश्नर और तहसीलदार ने अपीलीय न्यायालय के निर्णय के अनुसार रिकॉर्ड को ठीक करने का निर्देश दिया था, परंतु यह कार्य अब तक पूरा नहीं हो पाया। कलेक्टर ने प्रशासन को कोई रिपोर्ट भी पेश नहीं की।
कलेक्टर के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी
कोर्ट ने इस मामले पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि कलेक्टर की ओर से लगातार आदेशों की अवहेलना की जा रही है। यह उनकी पदेन जिम्मेदारियों में लापरवाही है, जिससे मामले का शीघ्र समाधान नहीं हो पा रहा। न्यायालय ने कहा कि यह कृत्य निंदनीय है और सुप्रीम कोर्ट की मंशा को प्रभावित कर रहा है। कोर्ट ने यह भी पूछा कि क्यों न कलेक्टर के खिलाफ न्यायालय अवमान अधिनियम, 1971 और भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 210(बी) के तहत दंडात्मक कार्यवाही की जाए।
10 मार्च को कोर्ट में सुनवाई
कलेक्टर को नोटिस का जवाब देने के लिए 10 मार्च 2026 तक का समय दिया गया है। अब सबकी नजर इस पर होगी कि प्रशासन कोर्ट में क्या जवाब पेश करता है और अदालत आगे क्या कदम उठाती है।
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