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News In Short
चाइनीज मांझा एक बार फिर जानलेवा साबित हुआ है।
48 वर्षीय ठेकेदार की गर्दन कटने से मौत हो गई।
मांझा इतना मजबूत था कि वहां अधिकारी भी उसे तुरंत तोड़ नहीं पाए।
शहर में चोरी-छिपे चाइनीज मांझे की बिक्री जारी है।
आज हाईकोर्ट में सुनवाई होगी।
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News In Detail
इंदौर में प्रतिबंधित सिंथेटिक (चाइनीज) मांझा एक बार फिर जानलेवा साबित हुआ है। ओम विहार कॉलोनी निवासी 48 वर्षीय ठेकेदार रघुवीर धाकड़ की बाइक से जाते समय गर्दन में मांझा फंसने से मौत हो गई।
मांझा इतना मजबूत था कि, मौके पर मौजूद अधिकारी भी उसे तुरंत तोड़ नहीं पाए। जांच में साफ हुआ कि यह साधारण सूती नहीं, बल्कि प्रतिबंधित सिंथेटिक मांझा था।
इससे पहले 30 नवंबर को कनाड़िया बायपास पर आठवीं कक्षा के छात्र गुलशन की गर्दन चाइनीज मांझे से कट गई थी। इससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई थी। उसका दोस्त अरुण गंभीर रूप से घायल हुआ था। इसके बाद हाथीपाला, छत्रीपुरा, मल्हारगंज, खजराना और अन्य इलाकों से लगातार ऐसे हादसे सामने आते रहे हैं।
Sootr Knowledge
अगर आप बाइक या स्कूटी से सफर करते हैं, तो गले को ढककर चलना अस्थायी बचाव हो सकता है, लेकिन यह समाधान नहीं है। कानूनन प्रतिबंधित वस्तु अगर सड़क पर जान ले रही है, तो असली जिम्मेदारी प्रशासन की है, न कि नागरिक की।
Sootr Expert
कानूनी जानकारों के मुताबिक, चाइनीज मांझा प्रतिबंध के बावजूद मौत होना सीधे तौर पर प्रशासनिक विफलता का मामला है। यदि यह साबित होता है कि सप्लाई चैन जानबूझकर नजरअंदाज की गई, तो जिम्मेदार अधिकारियों पर आपराधिक लापरवाही की कार्रवाई बनती है।
हाईकोर्ट में सुनवाई आज
लगातार हो रही मौतों के बीच आज हाईकोर्ट में चाइनीज मांझा पर रोक, उसकी अवैध बिक्री और पुलिस कार्रवाई को लेकर सुनवाई होगी। याचिका में मांग की गई है कि-
• अवैध सप्लाई चैन पर सख्त कार्रवाई हो।
• ऑनलाइन और बसों के जरिए हो रही तस्करी रोकी जाए।
• मौतों की जवाबदेही तय की जाए।
आगे क्या
हाईकोर्ट की सुनवाई के बाद क्या हो सकता है-
• पुलिस कार्रवाई की समीक्षा हो सकती है।
• सप्लाई चैन पर सख्ती बढ़ सकती है।
• प्रशासन की जवाबदेही तय होने की संभावना है।
अगर अब भी सिर्फ बयानबाजी हुई, तो हादसे रुकेंगे नहीं।
निष्कर्ष
चाइनीज मांझा(chinese manja) कोई त्योहार की चूक नहीं, बल्कि सिस्टम की विफलता है। जब प्रतिबंध के बावजूद मांझा जान ले रहा है और प्रशासन सिर्फ आंकड़े गिना रहा है, तो यह साफ है- समस्या मांझे की नहीं, निगरानी की है।
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