इंदौर में अरबों की संपत्ति वाले चोइथराम ट्रस्ट में ट्रस्टी मोतियानी पर चलेगा केस

Sanjay Gupta | Mar 05, 2026, 22:28 IST
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Photograph: (the sootr)

इंदौर के चोइथराम ट्रस्ट विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने सतीश मोतियानी की SLP खारिज की। अब ट्रस्टी नियुक्ति मामले में दिल्ली हाईकोर्ट में केस चलेगा।

News in Short

  • सुप्रीम कोर्ट ने ट्रस्टी सतीश मोतियानी की SLP खारिज की।
  • दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा।
  • मोतियानी पर रिश्तेदारों को ट्रस्टी बनाने का आरोप लगा है।
  • चोइथराम ट्रस्ट के अन्य ट्रस्टियों ने दिल्ली हाई कोर्ट में केस किया।
  • अब चोइथराम ट्रस्ट विवाद की सुनवाई दिल्ली हाईकोर्ट में आगे चलेगी।

Intro

चर्चित और अरबों की संपत्ति वाले टी. चोइथराम फाउंडेशन ट्रस्ट को लेकर सुप्रीम कोर्ट का आदेश आया है। इसमें ट्रस्टी सतीश मोतियानी को झटका लगा है।

News in Detail

INDORE. इंदौर के चर्चित ट्रस्ट टी.चोइथराम को लेकर अब सुप्रीम कोर्ट का आदेश आया है। दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ ट्रस्टी सतीश मोतियानी ने एसएलपी (स्पेशल लीव पिटीशन) लगाई थी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया है। इसका मतलब है कि उन्हें राहत नहीं मिली है और इसके साथ ही उनके खिलाफ मनमाने तरीके से ट्रस्टी बनाने को लेकर केस चलने का रास्ता साफ हो गया। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से लेखराज ठाकुरदास पगरानी समूह को बड़ी राहत मिली है।



मोतियानी के खिलाफ यह है आरोप

आरोप है कि सतीश मोतियानी ने अपने परिवार के सदस्यों को ट्रस्टी नियुक्त किया। साल 1992 से 2001 के बीच में उन्होंने नियमों को दरकिनार कर यह सदस्य बनाए। इसमें पत्नी कंचन मोतियानी, बेटे दुष्यंत मोतियानी, दिवंगत भाई जय मोतियानी, बेटी भावना मोतियानी और दामाद गौरव जगवानी को ट्रस्टी नियुक्त किया।

मोतियानी ने सुप्रीम कोर्ट से मांगी थी राहत

सुप्रीम कोर्ट ने सतीश मोतियानी और अन्य द्वारा दायर स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) को खारिज कर दिया है। इसके साथ ही दिल्ली हाई कोर्ट के उस फैसले को बरकरार रखा गया है। मोतियानी ने ट्रस्ट द्वारा दायर मुकदमे को प्रारंभिक स्तर पर ही समाप्त करने की मांग की थी। यह मुकदमा टी. चोइथराम फाउंडेशन और उसके चार ट्रस्टियों लेखराज टी. पगरानी, किशोर टी. पगरानी, रमेश पी. ठनवानी और दयाल दतवानी द्वारा दायर किया गया था।

लंबे समय से चल रहा विवाद

यह विवाद वर्ष 1971 में स्थापित सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्ट टी. चोइथराम फाउंडेशन से संबंधित है। वर्ष 2021 में ट्रस्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट में सिविल सूट दायर किया था। इसमें आरोप लगाया था कि 1992 से 2021 के बीच सतीश मोतियानी ने ट्रस्ट डीड के प्रावधानों के अनुरूप न होते हुए कुछ व्यक्तियों और अपने रिश्तेदारों को अवैध रूप से ट्रस्टी नियुक्त किया। यह भी कहा था कि ये लोग ट्रस्ट के प्रशासन और संपत्तियों में गैरकानूनी हस्तक्षेप कर रहे हैं।

मोतियानी ने केस खारिज करने की मांग की थी

मोतियानी ने इससे पहले सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC) के ऑर्डर 7 रूल 11 के तहत आवेदन दायर कर मुकदमे को प्रारंभिक स्तर पर ही खारिज करने की मांग की थी। हालांकि दिल्ली हाई कोर्ट के सिंगल जज और बाद में डिवीजन बेंच दोनों ने इस आवेदन को खारिज करते हुए मुकदमे को आगे बढ़ाने की अनुमति दी। इसके बाद मोतियानी पक्ष ने

सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर कर हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट में न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने कहा कि हाई कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं है और मोतियानी पक्ष की याचिका खारिज कर दी। अब यह मामला आगे की सुनवाई के लिए दिल्ली हाई कोर्ट में चलेगा।
उल्लेखनीय है कि टी. चोइथराम फाउंडेशन इंदौर में कई शिक्षण संस्थानों और स्कूलों का संचालन करता है। इस ट्रस्ट की स्थापना ठाकुरदास चोइथराम पगरानी द्वारा की गई थी।

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