रैंकिंग चमकाने का खेल: सीएम हेल्पलाइन में पुलिस ने खुद ही करा दीं शिकायतें
Amresh Kushwaha | Jun 20, 2026, 12:26 IST
सीएम हेल्पलाइन
मध्य प्रदेश के मऊगंज थाने में सीएम हेल्पलाइन की रैंकिंग सुधारने के लिए 21 मोबाइल नंबरों से 233 फर्जी शिकायतें दर्ज कराई गईं। थाना प्रभारी के निजी ड्राइवर को पॉकेट गवाह बनाया गया था।
समझें क्या है पूरा मामला...
- मऊगंज थाने ने सीएम हेल्पलाइन रैंकिंग सुधारने को फर्जीवाड़ा किया है।
- 21 मोबाइल नंबरों से 233 फर्जी शिकायतें दर्ज कराई गईं।
- थाना प्रभारी के निजी ड्राइवर को 100 से अधिक मामलों में गवाह बनाया था।
- खुलासे के बाद थाना प्रभारी रीना सिंह को पद से हटा दिया गया है।
- एसडीओपी (Sub Divisional Officer of Police) को पूरी जांच सौंपी गई है।
CM हेल्पलाइन रैंकिंग के लिए रचा फर्जीवाड़ा
इस फर्जीवाड़े की बदौलत मार्च 2026 की सरकारी रैंकिंग रिपोर्ट में मऊगंज जिला टॉप-5 में आ गया था। वहीं, जैसे ही असलियत सामने आई, पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया।
एक ही दिन में 5 शिकायतें, एक ही नाम से
साथ ही, छेड़खानी के आरोपी को पुलिस द्वारा न पकड़ने की शिकायत, बच्चे के गुम होने पर कार्रवाई न होने की शिकायत और पोस्टमार्टम (PM) रिपोर्ट की सत्यापित प्रति न मिलने की शिकायत शामिल थीं। वहीं, तीन जून को इन सभी को सहमति दिखाकर बंद कर दिया गया था।
पॉकेट गवाह का खेल
26 सितंबर 2025 को एक ही दिन में मऊगंज थाने में दर्ज नौ अलग-अलग मामलों में दयाशंकर तिवारी को गवाह के रूप में दर्शाया गया था। हैरान करने वाली बात यह है कि ये सभी नौ मामले मऊगंज और उससे कई किलोमीटर दूर अलग-अलग गांवों में अवैध शराब की जब्ती से जुड़े थे। सभी मामलों में 20 क्वार्टर अवैध शराब जब्त होने का एक ही जैसा ब्यौरा दर्ज था।
ड्राइवर ने क्या कहा?
पद से हटाई गई थानी प्रभारी
FAQ
- CM हेल्पलाइन 181 क्या है?
CM हेल्पलाइन 181 मध्य प्रदेश सरकार की एक जनसुनवाई सेवा है। इसमें नागरिक अपनी शिकायतें दर्ज करा सकते हैं। - CM हेल्पलाइन में रैंकिंग का क्या मतलब है?
सरकार हर महीने CM हेल्पलाइन की जिलों और थानों की रैंकिंग जारी करती है। यह रैंकिंग इस आधार पर होती है कि कितनी शिकायतें दर्ज हुईं और कितनी का समाधान किया गया। अच्छी रैंकिंग से अफसरों की छवि बेहतर होती है। इसी रैंकिंग को चमकाने के लिए मऊगंज थाने ने फर्जीवाड़ा किया। - पॉकेट विटनेस या पॉकेट गवाह क्या होता है?
पॉकेट विटनेस वह व्यक्ति होता है जिसे पुलिस बार-बार अलग-अलग मामलों में गवाह के रूप में इस्तेमाल करती है। यह एक अनैतिक और गैरकानूनी प्रथा है। ऐसे गवाह आमतौर पर पुलिस के करीबी होते हैं और उनकी गवाही अदालत में विश्वसनीय नहीं मानी जाती।
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