सीएम मोहन यादव एलिवेटेड कॉरिडोर पर लगा चुके मुहर, इंदौर में नेताओं की अलग बैठक से हलचल

इंदौर में एलिवेटेड कॉरिडोर पर 14 दिसंबर को सीएम डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में फैसला हो चुका है। बैठक में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और बाकी सभी जनप्रतिनिधि भी शामिल थे।

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Sanjay Gupta
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अब इस बैठक से मच गई हलचल

Indore News:अब सीएम के इस फैसले को लेकर 29 जनवरी को इंदौर की रेसीडेंसी कोठी पर स्थानीय नेताओं की एक बैठक हुई। बैठक के बाद पूरी राजनीति में हलचल मच गई है। इस बैठक को सीएम के फैसले पर सवाल उठाने जैसा माना जा रहा है।

सीएम की बैठक में क्या हुआ था

सीएम मोहन यादव ने 14 दिसंबर को इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में शहर के विकास को लेकर अहम बैठक की थी। इसमें मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, मंत्री तुलसी सिलावट और सभी जनप्रतिनिधि के साथ-साथ सारे बड़े अधिकारी भी मौजूद थे।

इस मीटिंग में तीन बड़े प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी गई थी। इसमें मंत्री विजयवर्गीय की मांग व सुझाव पर मेट्रो को अंडरग्राउंड करने को मंजूरी हुई थी। दूसरा मेट्रोपोलिटन रीजन को मंजूरी मिली थी। तीसरा यह कि बीआरटीएस पर हर चौराहे पर फ्लाईओवर नहीं बनाकर पुरानी योजना एलिवेटेड कॉरिडोर को ही मंजूर किया गया है।

अब इंदौर में मंत्री, ताई, सांसद, महापौर और विधायक की बैठक क्यों

अब एलआईजी से नवलखा तक 6.4 किमी लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर प्रस्तावित है। इस पर 15 फरवरी से काम शुरू होने वाला है। इसमें सीएम की बैठक में किसी ने कोई आपत्ति नहीं उठाई थी।

जब सारे फैसले हो चुके थे, गुजरात की कंपनी और ठेकेदार भी तय हो गए थे। हाईकोर्ट में अधिकारियों ने इसका शपथपत्र भी दे दिया था, तो फिर यह बैठक क्यों हुई, ये सवाल उठने लगा है। 

इस बैठक में पूर्व स्पीकर सुमित्रा महाजन, सांसद शंकर लालवानी, महापौर पुष्यमित्र भार्गव, विधायक महेंद्र हार्डिया, मधु वर्मा, गोलू शुक्ला और रमेश मेंदोला भी मौजूद थे। हालांकि, विधायक मालिनी गौड़ और मंत्री तुलसी सिलावट नहीं आए थे।

अधिकारियों ने कहा था सीएम ले चुके फैसला

इस बैठक को लेकर जब समय तय किया गया था, तब अधिकारियों ने जनप्रतिनिधियों को इस संबंध में जानकारी दी थी। सूत्रों के अनुसार अधिकारियों ने कहा था कि इस संबंध में सीएम फैसला ले चुके हैं।

काम तेजी से करने का भी आदेश दिया गया है। ऐसे में इस बैठक का कोई औचित्य नहीं होगा।

सूत्रों के अनुसार, इस पर अधिकारियों से कहा गया था कि शहर के हित का मुद्दा है। बड़ा काम हो रहा है तो इस पर सभी से चर्चा करना जरूरी है। इसके बाद 29 जनवरी को रेसीडेंसी में बैठक हुई।

किसी जनप्रतिनिधि ने विरोध नहीं किया

विशेष बात यह है कि इस बैठक में कुछ एक्सपर्ट्स ने एलिवेटेड कॉरिडोर पर अपनी आपत्ति जताई थी। हालांकि, पूर्व स्पीकर सुमित्रा महाजन से लेकर सांसद, महापौर और बाकी किसी विधायक ने इस पर कोई विरोध नहीं किया। 

सभी ने इसे जरूरी बताया और कुछ सुझाव दिए, जैसे इसे दो लेन की बजाय तीन लेन करना चाहिए और राउ तक इसे बढ़ाया जाना चाहिए।

वहीं सबसे बड़ी बात ये है कि सीएम का फैसला है। इसे देखते हुए भी खुद महापौर या अन्य किसी जनप्रतिनिधि ने इस मामले में मीडिया को बाइट देने से ही मना कर दिया।

इस मामले में कोई भी जनप्रतिनिधि विवाद में नहीं पड़ना चाहता था। सभी ने दूरी बना ली है। वहीं इस कॉरिडोर को लेकर हाईकोर्ट में भी याचिका दायर हुई है। 

कॉरिडोर पर काम तो शुरू होगा

यह तो तय है कि कॉरिडोर बनेगा। अब अगर कोई जरूरी सुझाव आएगा जो डिजाइन में सुधार के लिए हो, तो वही किया जाएगा, लेकिन थ्री लेन करना संभव नहीं है। क्योंकि वहां जगह नहीं है। 

ऐसे में जो भी सुधार संभव होंगे, वो काम में देरी न हो, ऐसा किया जाएगा। अधिकारियों का ध्यान इस बात पर है कि सीएम के फैसले के मुताबिक काम जल्दी शुरू हो। ऐसा हो कि इस काम से जनता को कोई परेशानी न हो। वैकल्पिक रास्ते और डायवर्सन सही ढंग से तय किए जाएं, ताकि लोगों को कम से कम समस्या का सामना करना पड़े।

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