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मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग जैन की बात को लेकर पैदा हुए विवाद को संभालने की कोशिशें की जा रही हैं। मामला कलेक्टर-कमिश्नर काॅन्फ्रेंस की समीक्षा बैठक का है।
प्रशासनिक अमले से ही तीखी आपत्ति आने के बाद सीएस जैन ने कलेक्टरों के ग्रुप में एक मैसेज डालकर लगभग सफाई के अंदाज में कहा है कि उनकी बात का गलत मतलब निकाला गया है।
इधर बैठक के दौरान आया ये बयान पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया है। आइए पहले जानते हैं, क्या बोल गए थे चीफ सेक्रेटरी अनुराग जैन…
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कलेक्टर बिना पैसे लिए काम नहीं करते
21 जनवरी को आयोजित बैठक में आईएएस अनुराग जैन ने कलेक्टरों पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान भ्रष्टाचार और प्रशासनिक कामकाज को लेकर तीखी टिप्पणी कर दी थी। उन्होंने कहा था कि “मुख्यमंत्री ने कहा है कि कलेक्टर बिना पैसे लिए काम नहीं करते हैं।”
सीएस ने कलेक्टरों से साफ कहा था कि कोई भी यह न सोचे कि सब कुछ छिपा रहता है, क्योंकि हमें सब कुछ पता चलता है। उन्होंने आगे कहा था कि किसके यहां क्या हो रहा है, हम सब जानने में सक्षम हैं।
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सीएस अनुराग जैन के इस किस्से ने खोली एमपी में भ्रष्टाचार की पोल
देशभर में मच गया था बवाल
सीएस अनुराग जैन (anurag jain cs mp) के इस सीधे हमले से देशभर में एमपी की प्रशासनिक मशीनरी पर सवाल उठने लगे थे। दरअसल उसी दौरान अशोकनगर के तत्कालीन कलेक्टर आदित्य सिंह द्वारा कथित रूप से तीन करोड़ की मांग का मुद्दा भी देश में गर्म था। ऐसे में सीएस के बयान ने आग में घी का काम कर दिया था।
प्रदेश के कई कलेक्टर्स ने CS अनुराग जैन से उनके बयान पर सीधी आपत्ति दर्ज करवाई थी। यहां तक कि भोपाल में पदस्थ सीनियर अधिकारियों ने भी इस स्टेटमेंट पर अपनी सख्त आपत्ति दर्ज करवाई थी।
इसके बाद जनसंपर्क ने खंडन जारी कर मामले (mp ias news) का पटाक्षेप करने की कोशिश की थी। बता दें कि मुख्य सचिव ने 7 और 8 अक्टूबर 2025 को हुई कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस की समीक्षा की थी।
अब आई सीएस की 'सफाई'
The Sootr को मिली जानकारी के अनुसार, सीएस अनुराग जैन ने कलेक्टरों के ग्रुप में अंग्रेजी में एक मैसेज शेयर किया है। पहले इस मूल मैसेज को देखिए और फिर हिंदी में भावानुवाद भी समझिए…
Dear Colleagues,
Some perception has been created that in yesterday's conference it was told that all Collectors are corrupt. As head of the team how can I have such a view?
I have witnessed some outstanding work by many of you and I mention it often that it is because of the team that MP ranks one of the best in most of the Schemes.
To avoid any misunderstanding let me once again state what I meant- Complaints are received from all districts. It is Collector's responsibility to see that all cases are disposed of within the time limit prescribed by the Public Service Guarantee Act.
अब हिंदी में भावानुवाद देखिए...
प्रिय सहयोगियों,
कल की बैठक के संबंध में यह धारणा बन गई है कि यह कहा गया था कि सभी कलेक्टर भ्रष्ट हैं।
टीम के प्रमुख के रूप में मैं ऐसा दृष्टिकोण कैसे रख सकता हूं?
मैंने आप में से कई लोगों द्वारा किए गए उत्कृष्ट कार्य को स्वयं देखा है और मैं अक्सर यह उल्लेख करता रहा हूं कि टीम के प्रयासों के कारण ही मध्य प्रदेश अधिकांश योजनाओं में सर्वश्रेष्ठ राज्यों में शामिल है।
किसी भी प्रकार की गलतफहमी से बचने के लिए मैं एक बार फिर स्पष्ट करना चाहता हूँ कि मेरा आशय क्या था- सभी जिलों से शिकायतें प्राप्त होती हैं। लोक सेवा गारंटी अधिनियम के अंतर्गत निर्धारित समय-सीमा में सभी मामलों का निपटारा सुनिश्चित करना कलेक्टर की जिम्मेदारी है।
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