'हरदा कांग्रेस विधायक ने गरीबों के हक का पैसा अपनी ससुराल वालों पर उड़ाया'
Ravi Awasthi | Jun 25, 2025, 22:03 IST
MLA
जन प्रतिनिधि दूसरों को नैतिकता की नसीहत देते हैं, लेकिन जब बात अपने पर आए तो वे नैतिक, अनैतिक का फर्क भूल जाते हैं। ऐसा ही मामला मध्य प्रदेश में हरदा से कांग्रेस विधायक डॉ. रामकिशोर दोगने का सामने आया हैं।
रवि अवस्थी,भोपाल।
आमतौर पर जन प्रतिनिधि दूसरों को नैतिकता की नसीहत देते हैं,लेकिन जब बात अपने पर आए तो वे नैतिक व अनैतिक का फर्क भूल जाते हैं। ऐसा ही एक मामला हरदा के कांग्रेस विधायक डॉ.रामकिशोर दोगने का सामने आया हैं।
डॉ. दोगने मप्र विधानसभा में विपक्षी दल कांग्रेस के सक्रिय सदस्यों में एक हैं। सदन में विपक्ष की भूमिका को बखूबी निभाते हुए सरकार को कठघरे मे खड़ा करने से नहीं चूकते,लेकिन बात जब अपनी हो तो उनकी भूमिका बदली हुई होती है। डॉ दोगने पर उनके अपने ही निर्वाचन क्षेत्र में विधायक स्वेच्छानुदान का दुरुपयोग करने के आरोप लग रहे हैं।
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हालांकि,यह मामला पिछले वित्तीय वर्ष यानी 2024-25 का है,लेकिन हरदा के ही एक व्हिसल ब्लोअर आनंद जाट की सजगता से इसका खुलासा हाल ही में हुआ। जाट ने सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत विधायक स्वेच्छानुदान वितरण की जानकारी जुटाई और प्रेस कांफ्रेंस कर इसका खुलासा किया। प्रेस कांफ्रेंस के दौरान ही उन्हें विधायक जी के एक समर्थक का फोन कॉल आया। इसमें वह जाट को मामला उजागर नहीं करने व इस पर अंजाम भुगतने की धमकी देते सुने गए। बाद में यह आडियों जिले में वायरल भी हुआ। इससे विधायक व उनके इस दबंग धमकीबाज की क्षेत्र में खासी किरकिरी हुई।
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मध्य प्रदेश में प्रत्येक विधायक को अपने क्षेत्र में विकास के लिए ढाई करोड़ रुपए और गरीब,पीड़ितों की मदद के लिए 75लाख रुपए की स्वेच्छानुदान निधि हर साल मिलती है। जैसा कि स्वेच्छानुदान के नाम से ही स्पष्ट है कि इसका आवंटन विधायक की मर्जी पर निर्भर करता है,लेकिन इस अनुदान की मंशा के मुताबिक,नैतिकता का तकाजा यही है कि इस राशि से आर्थिक रुप से कमजोर व्यक्ति व सामाजिक क्षेत्र में उत्कृष्ठ सेवाएं दे रही जरूरतमंद संस्थाओं की मदद की जाए,लेकिन स्वेच्छानुदान यदि अपने सगे संबंधियों,धनाढ्य कारोबारियों,पार्टी कार्यकर्ताओं व निजी शिक्षण संस्था के कर्मचारियों ,ड्रायवर व उनके परिवारजनों को बांटी जाए तो सवाल उठना लाजिमी है।
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जाट का दावा है कि विधायक डॉ.दोगने ने पिछले वित्तीय वर्ष में स्वेच्छानुदान से करीब 3 लाख रुपए अपनी ससुराल पक्ष के लोगों को,करीब डेढ़ लाख रुपए अपने निजी स्कूल के कर्मचारियों को व करीब 22 लाख रुपए कांग्रेस कार्यकर्ताओं को स्वेच्छानुदान से बांटे। उन्होंने कहा कि स्वेच्छानुदान की अधिकांश राशि साधन संपन्न लोगों को बांटी गई। कुछ मामलों में तो यह दिखावे के लिए गरीब के खाते में पहुंची,लेकिन उलटे हाथ इसे वापस ले लिया गया।
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जाट ने उन्हें मिली धमकी की शिकायत हरदा पुलिस थाने में भी की। यह अलग बात है कि पुलिस ने इस पर अब तक कोई संज्ञान नहीं लिया। हालांकि द सूत्र विधायक स्वेच्छानुदान मामले में हुए इस खुलासे व वायरल आडियो की पुष्टि नहीं करता,लेकिन विधायक जी के समर्थक की ओर से जिस तरह की धमकी जाट को मिली और थाने तक यह मामला पहुंचा,उससे यह तो साफ है कि दाल का कुछ हिस्सा नहीं बल्कि दाल पूरी ही काली है।
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बारिश के
बताया जाता है कि विधायक दोगने फिलहाल बारिश के इस मौसम में क्षेत्र विकास निधि से ग्राम पंचायतों में आग बुझाने वाले फायर टैंकर वितरित कर रहे हैं। टैंकर की कीमत व गुणवत्ता को लेकर भी पंचायतों में सवाल उठने लगे हैं। सूत्रों का दावा है कि बाजार में एक टैंकर की कीमत करीब 70 हजार रुपए है,लेकिन विधायक विकास निधि से यही टैंकर 1लाख 92 हजार रुपए में खरीदा गया। इस मामले में विधायक डॉ दोगने का कहना है कि आरोप लगाने वाला फर्जी व्यक्ति है। निराधार आरोप लगाना उसकी आदत में है। फायर टैंकर की खरीदी एमपी एग्रो के माध्यम से प्रशासन करता है। विधायक सीधे तौर पर यह खरीदी नहीं करते।
आमतौर पर जन प्रतिनिधि दूसरों को नैतिकता की नसीहत देते हैं,लेकिन जब बात अपने पर आए तो वे नैतिक व अनैतिक का फर्क भूल जाते हैं। ऐसा ही एक मामला हरदा के कांग्रेस विधायक डॉ.रामकिशोर दोगने का सामने आया हैं।
डॉ. दोगने मप्र विधानसभा में विपक्षी दल कांग्रेस के सक्रिय सदस्यों में एक हैं। सदन में विपक्ष की भूमिका को बखूबी निभाते हुए सरकार को कठघरे मे खड़ा करने से नहीं चूकते,लेकिन बात जब अपनी हो तो उनकी भूमिका बदली हुई होती है। डॉ दोगने पर उनके अपने ही निर्वाचन क्षेत्र में विधायक स्वेच्छानुदान का दुरुपयोग करने के आरोप लग रहे हैं।
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उलटे हाथ रकम वापस लेने का आरोप
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थाने तक पहुंची शिकायत,जांच नहीं
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