कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को 3 साल की सजा, विधायकी खतरे में
Amresh Kushwaha | Apr 02, 2026, 12:59 IST
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दतिया से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को 27 साल पुराने जालसाजी मामले में एमपी-एमएलए कोर्ट ने 3 साल की जेल की सजा सुनाई है। इस फैसले के बाद उनकी विधानसभा सदस्यता पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं।
बुधवार को दिल्ली की विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट ने कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को दोषी करार दिया था। गुरुवार, 02 अप्रैल को एमपी-एमएलए कोर्ट ने उन्हें 3 साल की सजा सुनाई है। साथ ही जमानत भी दे दी।
उन पर बैंक एफडी घोटाला मामले में आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी व जालसाजी के आरोप थे। सह-आरोपी बैंक लिपिक रघुवीर प्रजापति को भी दोषी ठहराया गया।
कोर्ट ने उन्हें दो धाराओं में 3-3 साल और एक धारा में 2 साल की सजा सुनाई है। इससे उनकी विधायकी पर खतरा मंडराने लगा है। वरिष्ठ वकीलों के मुताबिक, अब उनके पास अपील करने के लिए 60 दिन का समय है।
अगर हाईकोर्ट से सजा पर स्थगन (स्टे) मिल गया, तो उनकी विधायकी बरकरार रह सकती है, लेकिन फिलहाल उनकी सदस्यता पर संकट बना हुआ है।
यदि विधायकी जाती है, तो दतिया विधानसभा सीट पर उपचुनाव होगा। सदस्यता समाप्त होते ही विधानसभा सचिवालय की तरफ से अधिसूचना जारी होती है।
अदालत के वकील शिवराज सिंह जाट और अनिल शुक्ला के मुताबिक भारती को जिन धाराओं में दोषी माना गया है, उनमें से धारा 467 में अधिकतम उम्रकैद का प्रावधान है। यानी सजा का दायरा बहुत बड़ा है।
यह मामला अगस्त 1998 का है। राजेंद्र भारती की मां सावित्री श्याम ने दतिया सहकारी ग्रामीण विकास बैंक में 10 लाख रुपए की एफडी कराई थी। यह एफडी श्याम सुंदर श्याम जन सहयोग एवं सामुदायिक विकास संस्थान की अध्यक्ष के रूप में कराई गई थी। एफडी पर सालाना 13.5 फीसदी ब्याज था और अवधि 3 साल की थी।
समस्या यह थी कि उसी दौरान, यानी 1998 से 2001 के बीच, राजेंद्र भारती खुद उसी बैंक के संचालक मंडल के अध्यक्ष थे। और जिस संस्था के नाम पर एफडी थी, उसके ट्रस्टी बोर्ड के सदस्य भी वही थे। यानी बैंक और संस्था, दोनों तरफ उनका हित जुड़ा था।
अभियोजन पक्ष के मुताबिक भारती ने बैंक कर्मचारी रघुवीर शरण प्रजापति के साथ मिलकर बैंक के दस्तावेजों में हेराफेरी की। लेजर बुक, एफडी काउंटर स्लिप और एफडी की रसीद में बदलाव कर एफडी की अवधि पहले 3 साल से बढ़ाकर 10 साल और फिर 15 साल कर दी गई। मकसद साफ था। 13.5 फीसदी की ऊंची ब्याज दर का फायदा लंबे समय तक लेना था।
इस हेराफेरी की वजह से 1999 से लेकर 2011 तक हर साल करीब 1 लाख 35 हजार रुपए का ब्याज निकाला जाता रहा। यह सिलसिला 12 साल से ज्यादा चला और बैंक को लगातार नुकसान होता रहा।
जब भारती बैंक के अध्यक्ष पद से हट गए, तो बैंक के ऑडिट में यह गड़बड़ी पकड़ में आई। ऑडिटर ने एफडी की अवधि अनधिकृत तरीके से बढ़ाने पर आपत्ति दर्ज की। इसके बाद संयुक्त पंजीयक सहकारी संस्थाएं के निर्देश पर कानूनी कार्रवाई शुरू हुई। 29 जुलाई 2015 को दतिया के CJM (Chief Judicial Magistrate) कोर्ट में परिवाद दाखिल किया गया था।
पहले सुनवाई भोपाल और ग्वालियर की MP-MLA कोर्ट में हुई थी। अक्टूबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मामला दिल्ली की रोज एवेन्यू MP-MLA कोर्ट में ट्रांसफर किया गया था। भारती पक्ष ने इस मामले को कानूनी चुनौती भी दी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने आपराधिक अपील नंबर 2764/2024 में अभियोजन की कार्रवाई को बरकरार रखा था।
मध्यप्रदेश की राजनीति में 2023 का दतिया विधानसभा चुनाव किसी बड़े उलटफेर से कम नहीं था। कांग्रेस प्रत्याशी राजेंद्र भारती ने भाजपा नेता और तत्कालीन गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को 7 हजार 742 वोटों के अंतर से हराया था।
भारती को 88 हजार 977 वोट मिले थे। मिश्रा, जिन्होंने पहले लगातार तीन बार भारती को हराया था, इस बार खुद हार गए।
उन पर बैंक एफडी घोटाला मामले में आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी व जालसाजी के आरोप थे। सह-आरोपी बैंक लिपिक रघुवीर प्रजापति को भी दोषी ठहराया गया।
तीन साल की सजा, विधायकी खतरे में...
अगर हाईकोर्ट से सजा पर स्थगन (स्टे) मिल गया, तो उनकी विधायकी बरकरार रह सकती है, लेकिन फिलहाल उनकी सदस्यता पर संकट बना हुआ है।
क्या राजेंद्र भारती की जाएगी विधायकी?
इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि क्या राजेंद्र भारती की विधानसभा सदस्यता जाएगी? जनप्रतिनिधित्व अधिनियम (Representation of the People Act), 1951 की धारा 8 के मुताबिक यदि किसी जनप्रतिनिधि को किसी अपराध में 2 साल या उससे अधिक की सजा होती है, तो उसकी विधानसभा सदस्यता अपने आप खत्म हो जाती है।
अदालत के वकील शिवराज सिंह जाट और अनिल शुक्ला के मुताबिक भारती को जिन धाराओं में दोषी माना गया है, उनमें से धारा 467 में अधिकतम उम्रकैद का प्रावधान है। यानी सजा का दायरा बहुत बड़ा है।
25 साल पुरानी एफडी, 11 साल पुरानी शिकायत
समस्या यह थी कि उसी दौरान, यानी 1998 से 2001 के बीच, राजेंद्र भारती खुद उसी बैंक के संचालक मंडल के अध्यक्ष थे। और जिस संस्था के नाम पर एफडी थी, उसके ट्रस्टी बोर्ड के सदस्य भी वही थे। यानी बैंक और संस्था, दोनों तरफ उनका हित जुड़ा था।
कैसे हुआ बैंक एफडी घोटाला?
इस हेराफेरी की वजह से 1999 से लेकर 2011 तक हर साल करीब 1 लाख 35 हजार रुपए का ब्याज निकाला जाता रहा। यह सिलसिला 12 साल से ज्यादा चला और बैंक को लगातार नुकसान होता रहा।
ऑडिट में पकड़ा गया, फिर शुरू हुई कानूनी लड़ाई
पहले सुनवाई भोपाल और ग्वालियर की MP-MLA कोर्ट में हुई थी। अक्टूबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मामला दिल्ली की रोज एवेन्यू MP-MLA कोर्ट में ट्रांसफर किया गया था। भारती पक्ष ने इस मामले को कानूनी चुनौती भी दी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने आपराधिक अपील नंबर 2764/2024 में अभियोजन की कार्रवाई को बरकरार रखा था।
नरोत्तम मिश्रा को हराने वाले MLA जेल में
भारती को 88 हजार 977 वोट मिले थे। मिश्रा, जिन्होंने पहले लगातार तीन बार भारती को हराया था, इस बार खुद हार गए।
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