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News in Short
- दमोह OBC पैर धुलाई कांड में हाईकोर्ट में स्वतः संज्ञान सुनवाई अनिश्चितकाल के लिए स्थगित।
- सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हाईकोर्ट में मामला अनिश्चितकाल के लिए टला।
- NSA पर SC की अंतरिम रोक, मुख्य आरोपी अनुज पांडे की रिहाई के आदेश।
- हाईकोर्ट की स्वतः संज्ञान प्रक्रिया और FIR/NSA के निर्देशों पर सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाए।
- अब सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले तक हाईकोर्ट में मामला लिस्ट नहीं होगा।
News in Detail
Damoh News. मध्य प्रदेश के दमोह जिले का OBC पैर धुलाई कांड देश में चर्चा का विषय बन गया था। अब इसमें एक बड़ा अपडेट सामने आया है। वायरल वीडियो, सामाजिक तनाव और प्रशासनिक कार्रवाई के बीच यह मामला सीधे हाईकोर्ट तक पहुंचा, जहां स्वतः संज्ञान लेकर कड़े आदेश जारी किए गए। लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट की दखल के बाद इस पूरे प्रकरण की दिशा ही बदल गई है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश से हाईकोर्ट की सुनवाई ठप
शुक्रवार 16 जनवरी को यह मामला जबलपुर हाईकोर्ट में जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस रत्नेश चंद्र सिंह बिसेन की डिविजनल बेंच में लिस्ट हुआ। सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित आदेशों के चलते हाईकोर्ट ने इस मामले को adjourned sine die, यानी अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया। अब जब तक सुप्रीम कोर्ट इस मामले में अंतिम निर्णय नहीं देता, तब तक हाईकोर्ट में इसकी कोई सुनवाई नहीं होगी।
हाईकोर्ट के स्वतः संज्ञान आदेश को दी गई थी चुनौती
इस कांड में आरोपी बनाए गए अनुज पांडे, कमलेश पांडे और राहुल पांडे ने सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट के 14 नवंबर 2025 के उस आदेश को चुनौती दी थी, जो स्वतः संज्ञान याचिका में पारित हुआ था। इसी याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने NSA लगाने के आदेश पर अंतरिम रोक लगाई और अनुज पांडे को रिहा करने का निर्देश दिया था।
SC में हाईकोर्ट की प्रक्रिया पर तीखे सवाल
सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता नमन नागरथ ने अनुज पांडे का पक्ष मजबूती से रखा। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट ने केवल वायरल वीडियो के आधार पर कड़ा फैसला लिया। बिना किसी प्रारंभिक जांच के सीधे FIR दर्ज करने के स्पष्ट निर्देश दे दिए।
साथ ही आरोपी पर राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम(NSA) लगाने का भी आदेश दिया गया। सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान की इस पूरी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए। न्यायालय ने हाईकोर्ट द्वारा अपनाई गई इस न्यायिक पद्धति को अत्यंत असाधारण करार दिया।
तारीखों का विरोधाभास बना बड़ा मुद्दा
सुनवाई के दौरान एक चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि केस डायरी और संज्ञान याचिका 15 अक्टूबर को दर्ज हुई। जबकि हाईकोर्ट ने एक दिन पहले यानी 14 अक्टूबर को ही आदेश पारित कर दिया था। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने इस पर भी हैरानी जताई कि आदेश वेबसाइट पर अपलोड होने से पहले ही पुलिस ने इतनी तेजी दिखाई कि गिरफ्तारी तक कर ली गई।
AI तकनीक से छेड़छाड़ का दावा
अनुज पांडे के पक्ष से यह भी दलील दी गई कि, पूरे विवाद की शुरुआत AI तकनीक के जरिए उनकी तस्वीर से छेड़छाड़ कर की गई थी। याचिका में दावा किया गया कि इस महत्वपूर्ण पहलू को हाईकोर्ट ने नजरअंदाज कर दिया है। बाद में वही विवाद तब और भड़क गया जब एक वीडियो सामने आया, जिसमें एक OBC युवक को मंदिर में अनुज पांडे के पैर धोते और वही पानी पीते हुए दिखाया गया।
क्या था पूरा पैर धुलाई कांड
यह घटना अक्टूबर महीने में दमोह जिले के सतरिया गांव की बताई गई, जहां एक OBC युवक को ब्राह्मण समाज के युवक के पैर धोते और उसी पानी को पीते देखा गया। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही मामला तूल पकड़ गया। इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि में अवैध शराब बिक्री का मुद्दा भी सामने आया, जिसमें अनुज पांडे पर जुर्माना लगाया गया था। इसके बाद गांव के एक युवक द्वारा AI तकनीक से बनाई गई आपत्तिजनक तस्वीर ने विवाद को और भड़का दिया।
अब नजरें सिर्फ सुप्रीम कोर्ट पर
हाईकोर्ट में सुनवाई के अनिश्चितकाल के लिए टल जाने के बाद अब इस संवेदनशील मामले में सभी की नजरें सुप्रीम कोर्ट पर टिक गई हैं। सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला ही तय करेगा कि हाईकोर्ट के स्वतः संज्ञान और प्रशासनिक कार्रवाई की वैधता क्या थी, और आगे इस मामले की कानूनी दिशा किस ओर जाएगी।
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