डीईओ की जांच में उलझा फर्जीवाड़े पर संचालनालय की कार्रवाई का आदेश

Sanjay Sharma | Jan 29, 2026, 23:29 IST
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अनीता परिहार के फर्जी दस्तावेजों से नौकरी पाने के मामले में कार्रवाई की मांग की जा रही है। डीईओ की जांच में देरी के कारण FIR अब तक दर्ज नहीं हो पाई है।

News in Short

  • अनीता परिहार पर फर्जी दस्तावेजों से नौकरी पाने का आरोप।
  • भागीरथ यादव और राजेन्द्र नामदेव ने शिकायत की थी।
  • शिकायत के बावजूद एक साल तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
  • शिकायत कलेक्टर और स्कूल शिक्षा विभाग को भेजी गई थी।
  • अधिकारी किसी भी प्रकार की सुनवाई नहीं कर रहे थे।

News in Detail

BHOPAL. लोक शिक्षण संचालनालय का आदेश एक शिक्षिका के फर्जीवाड़े के सामने कमजोर पड़ा। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी हासिल करने के मामले में आदेश जारी हुआ।

यह आदेश छह साल से डीपीआई और जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के बीच झूल रहा है। जिला शिक्षा अधिकारी की जांच ने कार्रवाई अटका दी। इस कारण महिला शिक्षक पर न तो केस दर्ज हुआ है और न ही उन्हें नौकरी से बाहर किया गया है।

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शिकायतों पर डीपीआई से आदेश जारी

बार-बार शिकायतों पर डीपीआई से आदेश जारी हुए। ज्वाइंट कमिश्नर ग्वालियर ने अशोकनगर जिला पंचायत सीईओ से जवाब तलब किया। 30 जनवरी 2020 को सीईओ के निर्देश पर जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) ने अनीता परिहार की नियुक्ति से संबंधित दस्तावेज डीपीआई भेजे।

तत्कालीन डीईओ ने जांच में महिला शिक्षक के दस्तावेजों को फर्जी पाया और अनुशंसा की कि उन्हें सेवा से बाहर किया जाए और आपराधिक केस दर्ज किया जाए।

डीईओ के जांच प्रतिवेदन और अनुशंसा के आधार पर डीपीआई ने आदेश जारी किए। पांच साल बाद भी जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय की जांच पूरी नहीं हो पाई है। दस्तावेज फर्जी होने की पुष्टि और कार्रवाई की अनुशंसा के बावजूद कार्रवाई में कोई प्रगति नहीं हो पाई है।

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बेवजह उलझा नियोक्ता संस्था का पेंच

शिकायतकर्ताओं ने पांच साल से फर्जीवाड़े के मामले में कार्रवाई न होने पर सवाल उठाए हैं। इसको लेकर स्कूल शिक्षा विभाग को भी शिकायतें की गई हैं। उनका कहना है अनीता परिहार की नियुक्ति पंचायत विभाग के माध्यम से की गई थी। बाद में उन्हें वरिष्ठ शिक्षक के पद पर स्कूल शिक्षा विभाग में शामिल कर लिया गया था।

अब अधिकारियों ने संविलियन को ही बेवजह पेंच बना दिया है। तत्कालीन जिला पंचायत सीईओ ने अनुशंसा की थी कि संविलियन के आधार पर कार्रवाई का अधिकार लोक शिक्षक संचालनालय के पास होना चाहिए। वहीं स्कूल शिक्षा विभाग जांच जारी होने की बात से ही बाहर नहीं निकल रहा है।

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सारे दस्तावेज सामने फिर भी रुकी जांच

अनीता परिहार की नियुक्ति के दौरान नियोक्ता संस्था जिला पंचायत थी। लेकिन अब उनकी सेवाएं स्कूल शिक्षा विभाग के पास हैं। संविलियन के बाद उन्हें वरिष्ठ शिक्षक का पद भी मिल चुका है। इसका साफ मतलब है की नियुक्ति के दौरान उनके द्वारा जो प्रमाण पत्र, अंकसूचियां जमा कराए गए थे। वे सभी स्कूल शिक्षा विभाग के पास हैं।

शिकायतकर्ता भी इन दस्तावेजों की सर्टिफाइड प्रतियां अधिकारियों को उपलब्ध करा चुके हैं। इसके बावजूद जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में जांच की फाइल आगे ही नहीं बढ़ रही। वहीं जांच का रोड़ा अटका होने के कारण शिक्षिका पर न केस दर्ज हो पा रहा और न नौकरी से बाहर किया जा रहा है।

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जांच के नाम पर तथ्य खंगालने की सफाई

नौकरी के लिए फर्जीवाड़े के मामले में कार्रवाई नहीं हो पाई। जिला शिक्षा अधिकारी चंद्रशेखर सिसोदिया ने कहा कि दस्तावेजों की पड़ताल की जा रही है। जांच प्रतिवेदन के आधार पर कार्रवाई तय की जाएगी। हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि पांच साल से जांच का प्रतिवेदन कब तक तैयार होगा।





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