पत्र की भाषा ने छीनी देवास एसडीएम आनंद मालवीय की कुर्सी
Sanjay Dhiman | Jan 05, 2026, 24:33 IST
Photograph: (THESOOTR)
मध्य प्रदेश में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की आपत्ति के बाद देवास एसडीएम आनंद मालवीय को सस्पेंड किया गया है। उन पर गलत आंकड़ों और अभद्र भाषा के उपयोग का आरोप लगा है।
BHOPAL. कांग्रेस के प्रदर्शन को लेकर निकाला गया एक आदेश देवास एसडीएम आनंद मालवीय पर भारी पड़ गया। कानून-व्यवस्था संभालने के लिए निकाला गया आदेश उनके लिए सिरदर्द बन गया।
असल में मामला आदेश की भाषा से जुड़ा है, जिस पर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कड़ी आपत्ति जताई।एसडीएम ने अपने आदेश में 'घंटा' जैसे शब्द का इस्तेमाल कर दिया, जिसे लेकर विवाद खड़ा हो गया।
इतना ही नहीं, आदेश में एक और बात ने आग में घी डालने का काम किया। एसडीएम ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के नाम के आगे“माननीय” शब्द लिखा, जबकि मंत्री विजयवर्गीय के लिए ऐसा संबोधन नहीं किया गया।
बता दें कि पत्र पर मंत्री की आपत्ति के बाद एसडीएम को सस्पेंड कर दिया गया। इस आदेश को टाइप करने वाले रीडर पर भी कार्रवाई की गई है। कुल मिलाकर, एक पत्र की कुछ पंक्तियों ने यह दिखा दिया कि सरकारी भाषा में जरा-सी चूक भी कितनी महंगी पड़ सकती है।
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देवास एसडीएम ऑफिस से जो आदेश निकला, उसकी भाषा को लेकर अब खूब सवाल उठ रहे हैं। आदेश की शुरुआत ही ऐसी थी कि विवाद खड़ा हो गया। इसमें लिखा गया था कि इंदौर नगर निगम की ओर से सप्लाई किए गए गंदे और मलमूत्र मिले पानी से 14 लोगों की मौत हो गई। इस एक लाइन ने सीधे तौर पर सरकार और नगर निगम को कटघरे में खड़ा कर दिया।
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इंदौर में दूषित पानी (भागीरथपुरा कांड) से लोगों की मौत के बाद कांग्रेस ने पूरे प्रदेश में प्रदर्शन करने का ऐलान किया था। इसी सिलसिले में देवास में भी कांग्रेस का प्रदर्शन होना था। प्रदर्शन के दौरान कोई अव्यवस्था न फैले और कानून व्यवस्था बनी रहे, इसके लिए एसडीएम ऑफिस से कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जानी थी। इन्हीं ड्यूटियों को लेकर यह पत्र जारी किया गया था।
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उज्जैन संभाग आयुक्त आशीष सिंह ने देवास एसडीएम आनंद मालवीय को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड करने के आदेश जारी किए हैं। उनके साथ सहायक ग्रेड-3 (रीडर) अमित चौहान को भी पद से हटा दिया गया है। यह कार्रवाई कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के एसडीएम के आदेश की भाषा पर कड़ी आपत्ति जताए जाने के बाद की गई।
दरअसल, एसडीएम आनंद मालवीय ने अपने एक आदेश में मंत्री विजयवर्गीय के कथित शब्दों का उल्लेख किया था, जिसे मंत्री ने “अमानवीय” और “निरंकुशता की निशानी” बताया। मंत्री ने स्पष्ट कहा कि लोक सेवकों का जनता और जनप्रतिनिधियों के प्रति ऐसा व्यवहार स्वीकार्य नहीं है।
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एसडीएम आनंद मालवीय को अब उज्जैन संभाग के मुख्यालय में अटैच किया गया है। सस्पेंशन के दौरान उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता ही दिया जाएगा। उनकी जगह पर अब अभिषेक शर्मा को देवास का नया एसडीएम बनाया गया है। प्रशासन ने साफ संदेश दिया है कि काम में लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी।
सरकारी आदेश में लिखा गया है कि यह लापरवाही 'सिविल सेवा आचरण नियम 1965' के खिलाफ है। रीडर अमित चौहान को भी तहसील कार्यालय सोनकच्छ भेज दिया गया है। इस घटना ने पूरे प्रदेश के अधिकारियों के बीच एक डर पैदा कर दिया है। अब सबको अपनी फाइलें और भाषा बहुत सोच-समझकर तैयार करनी होगी।
असल में मामला आदेश की भाषा से जुड़ा है, जिस पर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कड़ी आपत्ति जताई।एसडीएम ने अपने आदेश में 'घंटा' जैसे शब्द का इस्तेमाल कर दिया, जिसे लेकर विवाद खड़ा हो गया।
इतना ही नहीं, आदेश में एक और बात ने आग में घी डालने का काम किया। एसडीएम ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के नाम के आगे“माननीय” शब्द लिखा, जबकि मंत्री विजयवर्गीय के लिए ऐसा संबोधन नहीं किया गया।
बता दें कि पत्र पर मंत्री की आपत्ति के बाद एसडीएम को सस्पेंड कर दिया गया। इस आदेश को टाइप करने वाले रीडर पर भी कार्रवाई की गई है। कुल मिलाकर, एक पत्र की कुछ पंक्तियों ने यह दिखा दिया कि सरकारी भाषा में जरा-सी चूक भी कितनी महंगी पड़ सकती है।
पढ़िए क्या लिखा एसडीएम के आदेश में...
इंदौर में भाजपा शासित नगर निगम द्वारा सप्लाई किए गए मल-मूत्र युक्त गंदे पानी पीने से 14 लोगों की मौत हो गई है तथा 2800 व्यक्ति उपचाररत हैं। इस अत्यंत संवेदनशील मुद्दे पर प्रदेश सरकार के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय द्वारा पत्रकार के प्रश्न के जवाब में अशोभनीय टिप्पणी की गई है, जो अमानवीय और निरंकुशता की निशानी है। प्रदेश अध्यक्ष माननीय श्री जीतू पटवारी के निर्देशानुसार एवं इस अमानवीय व्यवहार के विरोध में भाजपा सांसद एवं विधायकों के निवास के सामने घंटा बजाकर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। उक्त अवसर पर कानून व्यवस्था एवं शांति व्यवस्था को बनाए रखने के लिए निम्नानुसार तहसीलदार, नायब तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक / पटवारियों की ड्यूटी दिनांक 04.01.2026 समय दोपहर 12.00 बजे से कार्य समाप्ति तक लगाई जाती है।
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क्यों दिया गया यह आदेश
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विजयवर्गीय बोले- यह निरंकुशता की निशानी
दरअसल, एसडीएम आनंद मालवीय ने अपने एक आदेश में मंत्री विजयवर्गीय के कथित शब्दों का उल्लेख किया था, जिसे मंत्री ने “अमानवीय” और “निरंकुशता की निशानी” बताया। मंत्री ने स्पष्ट कहा कि लोक सेवकों का जनता और जनप्रतिनिधियों के प्रति ऐसा व्यवहार स्वीकार्य नहीं है।
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सरकारी आदेश में लिखा गया है कि यह लापरवाही 'सिविल सेवा आचरण नियम 1965' के खिलाफ है। रीडर अमित चौहान को भी तहसील कार्यालय सोनकच्छ भेज दिया गया है। इस घटना ने पूरे प्रदेश के अधिकारियों के बीच एक डर पैदा कर दिया है। अब सबको अपनी फाइलें और भाषा बहुत सोच-समझकर तैयार करनी होगी।
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