दिग्विजय ने मोदी को लिखा पत्र, क्या बिना तैयारी बदल रहा है बच्चों का सिलेबस?
Ramanand Tiwari | Jun 07, 2026, 20:40 IST
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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर साफ किया कि उनका विरोध किसी भाषा से नहीं है। उनकी असली चिंता यह है कि नई व्यवस्था लागू करने से पहले स्कूलों को जरूरी संसाधन नहीं दिए गए।
कक्षा 9 के लाखों छात्रों के लिए तीन-भाषा नीति 1 जुलाई से लागू होने जा रही है। इस पर नया विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर सवाल उठाया है। उन्होंने पूछा कि जब नई किताबें, प्रशिक्षित शिक्षक और तैयारी उपलब्ध नहीं हैं, तो इतनी जल्दबाजी क्यों की जा रही है। उनका कहना है कि बिना तैयारी नीति लागू होने पर सीधे छात्रों को नुकसान उठाना पड़ सकता है।
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दिग्विजय सिंह ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि उनका विरोध किसी भाषा से नहीं है। असली चिंता यह है कि नई व्यवस्था लागू करने से पहले स्कूलों को जरूरी संसाधन उपलब्ध नहीं कराए गए। उनका कहना है कि यदि शिक्षक, पाठ्यपुस्तकें और संक्रमणकालीन समय नहीं होगा तो छात्र नई व्यवस्था के साथ तालमेल नहीं बैठा पाएंगे। इसका सीधा असर पढ़ाई और परीक्षा परिणामों पर पड़ सकता है।
कक्षा 9 में तीन-भाषा नीति लागू करने पर शिक्षक और अभिभावक विरोध कर रहे हैं। 1 जुलाई 2026 से नई व्यवस्था लागू करने का निर्देश दिया गया है। लेकिन एनसीईआरटी की नई किताबें अभी तक उपलब्ध नहीं हैं। पर्याप्त शिक्षकों और तैयारी की कमी को लेकर शिकायतें हैं। छात्रों और अभिभावकों ने चिंता जताई है। नीति लागू करने से पहले तैयारी पूरी करने की मांग की जा रही है। यह विवाद भाषा के कारण नहीं, बल्कि तैयारी के अभाव की वजह से है।
दिग्विजय सिंह ने प्रधानमंत्री को भेजे पत्र के साथ कई अभिभावकों के प्रतिनिधित्व भी संलग्न किए हैं। इन अभिभावकों का कहना है कि शैक्षणिक सत्र शुरू होने के बाद अचानक नियम बदलना बच्चों के लिए अतिरिक्त दबाव पैदा करेगा। उनका मानना है कि किसी भी नई शिक्षा नीति को लागू करने से पहले पर्याप्त तैयारी और स्पष्ट रोडमैप होना चाहिए।
कांग्रेस नेता ने दावा किया कि दिसंबर 2025 में हुई सीबीएसई बैठक में यह तय हुआ था कि नई भाषा की किताबें जारी होने तक पुरानी व्यवस्था जारी रहेगी। लेकिन बाद में जारी निर्देशों में कक्षा 9 के लिए तीसरी भाषा अनिवार्य कर दी गई। इसी फैसले को लेकर अब सवाल उठाए जा रहे हैं।
दिग्विजय सिंह का सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब नई पाठ्यपुस्तकें अभी तक प्रकाशित नहीं हुई हैं तो स्कूल पढ़ाई किस आधार पर कराएंगे? बताया जा रहा है कि कई स्कूलों को फिलहाल निचली कक्षाओं की पुस्तकों का उपयोग करने की सलाह दी गई है। आलोचकों का कहना है कि इससे पढ़ाई की गुणवत्ता और पाठ्यक्रम की निरंतरता प्रभावित हो सकती है।
पत्र में दिग्विजय सिंह ने सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पहले भी बिना पर्याप्त तैयारी कुछ व्यवस्थाएं लागू की गई थीं। इससे छात्रों और शिक्षकों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। उनका मानना है कि तीन-भाषा नीति में भी ऐसी स्थिति दोहराई जा सकती है।
दिग्विजय सिंह ने हाल के परीक्षा विवादों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि छात्रों का भरोसा बनाए रखना जरूरी है। शिक्षा संस्थानों पर विश्वास बनाए रखना समय की मांग है। बड़े बदलाव लागू करने से पहले तैयारी आवश्यक है। व्यापक संवाद और योजना जरूरी है। तीन-भाषा नीति लागू करने से पहले ये कदम जरूरी हैं।
पूरे विवाद का केंद्र यह नहीं है कि छात्रों को कितनी भाषाएं पढ़नी चाहिए। असल सवाल यह है कि क्या देश की शिक्षा व्यवस्था किसी बड़े बदलाव के लिए पूरी तरह तैयार है? यदि जवाब नहीं है, तो क्या छात्रों पर प्रयोग करने के बजाय पहले बुनियादी तैयारियां पूरी नहीं होनी चाहिए? यही सवाल अब विपक्ष सरकार के सामने खड़ा कर रहा है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा शिक्षा जगत में बड़ी बहस का विषय बन सकता है।
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दिग्विजय सिंह ने प्रधानमंत्री मोदी को लिखा पत्र
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दिग्विजय सिंह ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि उनका विरोध किसी भाषा से नहीं है। असली चिंता यह है कि नई व्यवस्था लागू करने से पहले स्कूलों को जरूरी संसाधन उपलब्ध नहीं कराए गए। उनका कहना है कि यदि शिक्षक, पाठ्यपुस्तकें और संक्रमणकालीन समय नहीं होगा तो छात्र नई व्यवस्था के साथ तालमेल नहीं बैठा पाएंगे। इसका सीधा असर पढ़ाई और परीक्षा परिणामों पर पड़ सकता है।
कक्षा 9 में तीन-भाषा नीति लागू करने पर शिक्षक और अभिभावक विरोध कर रहे हैं। 1 जुलाई 2026 से नई व्यवस्था लागू करने का निर्देश दिया गया है। लेकिन एनसीईआरटी की नई किताबें अभी तक उपलब्ध नहीं हैं। पर्याप्त शिक्षकों और तैयारी की कमी को लेकर शिकायतें हैं। छात्रों और अभिभावकों ने चिंता जताई है। नीति लागू करने से पहले तैयारी पूरी करने की मांग की जा रही है। यह विवाद भाषा के कारण नहीं, बल्कि तैयारी के अभाव की वजह से है।
अभिभावकों की शिकायतों ने बढ़ाई चिंता
सीबीएसई के पुराने फैसले का भी दिया हवाला
किताबें नहीं, फिर पढ़ाई कैसे होगी?
पुरानी गलती दोहराने की आशंका
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