एमपी में अल नीनो का खतरा, किसानों की पैदावार 10% घटने की आशंका, अलर्ट जारी
Aman Vaishnav | May 18, 2026, 11:59 IST
el nino threat mp monsoon crop damage alert
देश में अल नीनो का खतरा बढ़ने से मध्य प्रदेश में मानसून कमजोर होने और फसलों को भारी नुकसान की आशंका है। धान और मक्के की पैदावार 10% से ज्यादा घट सकती है। इसके लिए वैज्ञानिकों ने अलर्ट जारी किया है।
मध्य प्रदेश के किसानों और आम जनता के लिए एक बड़ी और चिंताजनक खबर सामने आ रही है। देश में अल नीनो का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है।
इसका सबसे सीधा असर मध्य प्रदेश की खेती पर पड़ने की आशंका है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इसके कारण मानसून की बारिश बहुत कम हो सकती है। इससे फसलों को भारी नुकसान हो सकता है।
हाल ही में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के कृषि वैज्ञानिकों ने एक रिसर्च किया है। इस अध्ययन में जो आंकड़े और बातें सामने आई हैं, उन्होंने सबको चौंका दिया है।
इस रिपोर्ट के अनुसार जब-जब देश में अल नीनो का असर रहा है, तब-तब मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में धान (और मक्का जैसी मुख्य खरीफ फसलों की पैदावार बहुत कम हुई है।
![el-nino-threat-mp-monsoon-crop-damage-alert]()
ICAR-भारतीय कृषि प्रणाली अनुसंधान संस्थान के बड़े वैज्ञानिक सुभाष एन. पिल्लई के नेतृत्व में यह पूरा शोध किया गया है। इस शोध से एक चिंताजनक बात सामने आई है।
अल नीनो के सालों के दौरान देश के अलग-अलग राज्यों के 77 और 65 जिलों में धान और मक्के के उत्पादन में 10% से भी ज्यादा की बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी।
सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि इस गंभीर असर को झेलने वाले मुख्य राज्यों में हमारा मध्य प्रदेश भी शामिल है।
वहीं एमपी के अलावा उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड और ओडिशा जैसे राज्यों पर भी इसकी मार पड़ने वाली है। खरीफ के सीजन में किसान सबसे ज्यादा धान और मक्के की बुआई करते हैं।
![el-nino-threat-mp-monsoon-crop-damage-alert]()
बहुत से लोग यह सोच रहे होंगे कि आखिर यह अल नीनो (El Nino) बला क्या है? अल नीनो पूरी दुनिया के मौसम को बदलने वाला एक पैटर्न है। इसमें प्रशांत महासागर के पानी की सतह का तापमान सामान्य से बहुत ज्यादा गर्म हो जाता है।
जब समुद्रका पानी इस तरह गर्म होता है तो इसका सीधा असर (Effect of El Nino) भारत के मौसम पर पड़ता है। इतिहास गवाह है कि जब भी प्रशांत महासागर में यह गर्माहट बढ़ी है, तब-तब भारत में मानसून कमजोर हुआ है।
साथ ही बारिश बहुत कम हुई है। जब बारिश ही नहीं होगी या समय पर नहीं होगी, तो खेतों में खड़ी फसलें सूखने लगेंगी। इससे कृषि क्षेत्र को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।
इस अध्ययन में यह भी देखा गया कि अल नीनो सिर्फ धान और मक्के को ही नुकसान नहीं पहुंचाता है। इससे देश के कई सारे राज्यों में ज्वार और बाजरा जैसी फसलों की पैदावार भी 10% से ज्यादा कम हो गई थी। यानी मोटे अनाज की खेती करने वाले किसानों को भी इससे बड़ा झटका लग सकता है।
![el-nino-threat-mp-monsoon-crop-damage-alert]()
एक तरफ जहां कमजोर मानसून और सूखे की चिंता सता रही है। वहीं दूसरी तरफ मध्य प्रदेश और उत्तर भारत में अभी से ही भीषण गर्मी ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। साथ ही दिल्ली-NCR समेत कई इलाकों में पारा 43 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है।
वैज्ञानिकों ने यह पूरी रिपोर्ट तैयार करने के लिए पिछले तीन मुख्य अल नीनो सालों को आधार बनाया है। ये साल 2002, 2004 और 2009 थे।
इन सालों के मौसम और फसलों के डेटा की जांच की गई। इसके बाद यह रिपोर्ट साल 2023 में एल्सेवियर के क्लाइमेट सर्विसेज जर्नल में छापी गई थी।
ICAR के कृषि भौतिकी विभाग के प्रमुख पिल्लई ने बताया कि अल नीनो वाले सालों में भारतीय ग्रीष्मकालीन मानसून की बारिश में जगह और समय के हिसाब से बहुत ज्यादा बदलाव आते हैं।
कभी किसी जिले में बिल्कुल बारिश नहीं होती तो कभी बहुत देर से होती है। इसी वजह से फसलों की पैदावार घट जाती है।
वैज्ञानिक पिल्लई का कहना है कि इस साल भी अल नीनो के हालात बने रहने की पूरी संभावना है। इसलिए सरकार को इस संकट से निपटने की तैयारी अभी से मजबूत कर लेनी चाहिए। इसके लिए वैज्ञानिकों ने कुछ जरूरी सुझाव दिए हैं:
इस बार मानसून 2026 में कम बारिश की संभावना, IMD का अलर्ट- खरीफ फसलों पर खतरा मगर…
भारत की GDP घटेगी! किसानों की पैदावार होगी कम, ईरान-अमेरिका जंग से भारत पर पड़ेगा असर
अमानक बीज से बर्बाद फसल पर सिसक रहे किसान, चुप्पी साधे बैठी सरकार
पसीना बहाकर पैदा की फसल, अब MSP के लिए 6 सालों से कोर्ट का चक्कर काट रहे किसान
इसका सबसे सीधा असर मध्य प्रदेश की खेती पर पड़ने की आशंका है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इसके कारण मानसून की बारिश बहुत कम हो सकती है। इससे फसलों को भारी नुकसान हो सकता है।
हाल ही में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के कृषि वैज्ञानिकों ने एक रिसर्च किया है। इस अध्ययन में जो आंकड़े और बातें सामने आई हैं, उन्होंने सबको चौंका दिया है।
इस रिपोर्ट के अनुसार जब-जब देश में अल नीनो का असर रहा है, तब-तब मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में धान (और मक्का जैसी मुख्य खरीफ फसलों की पैदावार बहुत कम हुई है।
el-nino-threat-mp-monsoon-crop-damage-alert
एमपी के जिलों में 10% से ज्यादा घट सकती है पैदावार
अल नीनो के सालों के दौरान देश के अलग-अलग राज्यों के 77 और 65 जिलों में धान और मक्के के उत्पादन में 10% से भी ज्यादा की बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी।
सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि इस गंभीर असर को झेलने वाले मुख्य राज्यों में हमारा मध्य प्रदेश भी शामिल है।
वहीं एमपी के अलावा उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड और ओडिशा जैसे राज्यों पर भी इसकी मार पड़ने वाली है। खरीफ के सीजन में किसान सबसे ज्यादा धान और मक्के की बुआई करते हैं।
el-nino-threat-mp-monsoon-crop-damage-alert
आखिर क्या है अल नीनो?
जब समुद्रका पानी इस तरह गर्म होता है तो इसका सीधा असर (Effect of El Nino) भारत के मौसम पर पड़ता है। इतिहास गवाह है कि जब भी प्रशांत महासागर में यह गर्माहट बढ़ी है, तब-तब भारत में मानसून कमजोर हुआ है।
साथ ही बारिश बहुत कम हुई है। जब बारिश ही नहीं होगी या समय पर नहीं होगी, तो खेतों में खड़ी फसलें सूखने लगेंगी। इससे कृषि क्षेत्र को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।
ज्वार-बाजरा भी संकट में
el-nino-threat-mp-monsoon-crop-damage-alert
एमपी और उत्तर भारत में भीषण गर्मी
इस अध्ययन का आधार क्या है?
इन सालों के मौसम और फसलों के डेटा की जांच की गई। इसके बाद यह रिपोर्ट साल 2023 में एल्सेवियर के क्लाइमेट सर्विसेज जर्नल में छापी गई थी।
ICAR के कृषि भौतिकी विभाग के प्रमुख पिल्लई ने बताया कि अल नीनो वाले सालों में भारतीय ग्रीष्मकालीन मानसून की बारिश में जगह और समय के हिसाब से बहुत ज्यादा बदलाव आते हैं।
कभी किसी जिले में बिल्कुल बारिश नहीं होती तो कभी बहुत देर से होती है। इसी वजह से फसलों की पैदावार घट जाती है।
नुकसान से बचने के लिए वैज्ञानिकों की सलाह
- कम पानी वाली फसलें: किसानों को ऐसी फसलों की किस्मों को लगाने के लिए बढ़ावा देना चाहिए जो सूखे या कम पानी में भी अच्छी पैदावार दे सकें।
- मौसम की सही सलाह: जिला स्तर पर मौसम पर आधारित कृषि सलाह सेवाएं तुरंत और सही समय पर किसानों तक पहुंचाई जाएं ताकि वे उसी हिसाब से बुआई करें।
- पानी का सही इस्तेमाल: सिंचाई के लिए पानी का सही और किफायती तरीके से इस्तेमाल सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
- खास रणनीति: हर जिले की स्थिति अलग होती है, इसलिए हर जगह की खास जरूरतों के हिसाब से बदलाव की रणनीतियां अपनानी चाहिए।
FAQ
- अल नीनो क्या है और इसका खेती पर क्या असर पड़ता है?
अल नीनो एक मौसमी पैटर्न है जिसमें प्रशांत महासागर का पानी बहुत ज्यादा गर्म हो जाता है। इसके कारण भारत में मानसून कमजोर हो जाता है और बारिश बहुत कम होती है। बारिश न होने या समय पर न होने से फसलें सूखने लगती हैं और पैदावार घट जाती है। - अल नीनो के नुकसान से बचने के लिए किसानों को क्या करना चाहिए?
किसानों को कम पानी या सूखे में उगने वाली फसलों की किस्में बोनी चाहिए। इसके साथ ही जिला कृषि विभाग की मौसम सलाह के अनुसार ही बुआई करनी चाहिए और सिंचाई के लिए पानी का बहुत ही किफायती इस्तेमाल करना चाहिए।
इस बार मानसून 2026 में कम बारिश की संभावना, IMD का अलर्ट- खरीफ फसलों पर खतरा मगर…
भारत की GDP घटेगी! किसानों की पैदावार होगी कम, ईरान-अमेरिका जंग से भारत पर पड़ेगा असर
अमानक बीज से बर्बाद फसल पर सिसक रहे किसान, चुप्पी साधे बैठी सरकार
पसीना बहाकर पैदा की फसल, अब MSP के लिए 6 सालों से कोर्ट का चक्कर काट रहे किसान
MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग
By Atul Dwivedi
एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
By Jitendra Shrivastava
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
By Sanjay Dhiman
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
By Sanjay Gupta
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा
By Arun Tiwari