पुलिस की सख्ती से टूटा एकतरफा कार्रवाई का आरोप, मकरंद बौद्ध गिरफ्तार
Ramanand Tiwari | Jan 05, 2026, 23:16 IST
makarand buddh arrested
अंबेडकर फोटो विवाद से जुड़े मामले में मकरंद बौद्ध को गिरफ्तार किया गया। मकरंद बौद्ध पर 2016-17 में आईपीसी की धारा 188 के तहत गिरफ्तारी वारंट था।
BHOPAL. ग्वालियर में अंबेडकर पोस्टर विवाद अब एक कानूनी मामला नहीं रहा। यह सामाजिक संतुलन और प्रशासनिक निष्पक्षता की कसौटी बन गया है। वर्षों से लंबित गिरफ्तारी वारंट के बावजूद दलित नेता मकरंद बौद्ध की गिरफ्तारी नहीं हुई। पुलिस पर सवाल उठते रहे। एडवोकेट अनिल मिश्रा की गिरफ्तारी के बाद यह बहस और तेज हुई। क्या कानून सबके लिए समान है, यह सवाल सामने आया।
दलित नेता मकरंद बौद्ध के खिलाफ 2016-17 में धरना-प्रदर्शन के दौरान IPC की धारा 188 सहित अन्य धाराओं में मामला दर्ज हुआ था। इस केस में उनके खिलाफ स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी था। लेकिन वर्षों तक गिरफ्तारी नहीं हो सकी। यह चर्चा रही कि क्या राजनीतिक या सामाजिक दबाव के कारण गिरफ्तारी टलती रही। इन सवालों ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर संदेह पैदा कर दिया।
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रविवार दोपहर मकरंद बौद्ध विश्वविद्यालय थाना पहुंचे। यहां पुलिस रिकॉर्ड खंगालने पर पता चला कि उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट लंबित है। इसके बाद तुरंत वारंट की तामील कराई गई। मकरंद बौद्ध को कोर्ट में पेश किया गया, जहां अदालत ने उन्हें जेल भेजने का आदेश दिया।
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मकरंद बौद्ध की गिरफ्तारी के बाद अंबेडकर पोस्टर विवाद में दोनों पक्षों की गिरफ्तारी हो चुकी है। कई जानकार इसे ग्वालियर पुलिस की सोची-समझी संतुलनकारी रणनीति मान रहे हैं, ताकि शहर में तनाव और आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति पर विराम लगाया जा सके।
अंबेडकर पोस्टर जलाने से जुड़े मामले में क्राइम ब्रांच ने एडवोकेट अनिल मिश्रा समेत सात लोगों के खिलाफ FIRदर्ज की थी। इसके बाद अनिल मिश्रा सहित चार आरोपियों की गिरफ्तारी हुई। यहीं से आरोप लगने लगे कि पुलिस एक पक्ष के खिलाफ सख्त और दूसरे के प्रति नरम है। मामला सवर्ण बनाम दलित की सामाजिक बहस में तब्दील होने लगा।
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ग्वालियर एसपी धर्मबीर यादव ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि मकरंद बौद्ध के खिलाफ स्थायी गिरफ्तारी वारंट लंबित था। जैसे ही यह जानकारी मिली, तुरंत कार्रवाई की गई। मकरंद बौद्ध को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। एसपी ने कहा कि पुलिस निष्पक्ष रूप से काम कर रही है। उनका बयान संकेत देता है कि पुलिस अब पुराने मामलों में ढिलाई नहीं बरतेगी।
मकरंद बौद्ध की गिरफ्तारी को कुछ दलित संगठनों ने पुलिस की साजिश बताया है। पुलिस प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई है। इसे किसी भी वर्ग या दबाव से जोड़कर देखना गलत है।
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ग्वालियर में मकरंद बौद्ध और अनिल मिश्रा की गिरफ्तारी ने यह संदेश दिया कि कानून के सामने न फरियादी बड़ा है, न आरोपी। एसपी धर्मबीर यादव के नेतृत्व में पुलिस की कार्रवाई को प्रशासनिक निष्पक्षता और सामाजिक संतुलन की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। अब देखना यह होगा कि यह सख्ती आगे भी बनी रहती है या नहीं।
सालों से लंबित वारंट, अचानक हुई कार्रवाई
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विश्वविद्यालय थाने में पहुंचते ही गिरफ्तारी
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अब दोनों पक्ष कानून के तराजू पर बराबर
अनिल मिश्रा की गिरफ्तारी के बाद बदला माहौल
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जैसे ही जानकारी मिली, कार्रवाई की: एसपी
दलित संगठनों के आरोप, पुलिस का जवाब
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कानून से ऊपर कोई नहीं
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