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News in Short
- भाजपा विधायक नीरज सिंह ने इथेनॉल फैक्ट्री में चावल की हेराफेरी का आरोप लगाया।
- फैक्ट्री प्रबंधन ने बोरियां बदलने की बात स्वीकारी।
- सरकारी बोरियों से प्लास्टिक बोरियों में चावल भरकर ट्रकों से ढुलाई।
- नायब तहसीलदार को फैक्ट्री में प्रवेश नहीं मिला।
- सब कुछ सामने होने के बावजूद प्रशासन को कोई गड़बड़ी नजर नहीं आई।
News in Detail
जबलपुर की शहपुरा स्थित इथेनॉल फैक्ट्री को लेकर भाजपा विधायक नीरज सिंह ने गंभीर आरोप लगाए हैं। विधायक का कहना है कि फैक्ट्री में सरकारी चावल की खुलेआम हेराफेरी हुई। इसके ठोस प्रमाण भी सामने आए। इसके बावजूद जिला प्रशासन की नरमी ने पूरे मामले को और संदेहास्पद बना दिया है।
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विधायक नीरज सिंह का सीधा आरोप
भाजपा विधायक नीरज सिंह ने शहपुरा स्थित इथेनॉल फैक्ट्री को लेकर जिला प्रशासन और फैक्ट्री प्रबंधन दोनों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। विधायक का कहना है कि फैक्ट्री में सरकारी चावल की हेराफेरी खुलेआम की गई। लेकिन इसके बावजूद प्रशासन की ओर से सख्त कार्रवाई नहीं की गई।
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400 क्विंटल चावल मंगाने की स्वीकारोक्ति
मामले में फैक्ट्री प्रबंधन ने खुद यह स्वीकार किया है कि उन्होंने लगभग 400 क्विंटल चावल मंगाया था। यह चावल इथेनॉल निर्माण के लिए बताया गया। लेकिन इसकी मात्रा और भंडारण को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
जगह नहीं थी, फिर भी चावल क्यों मंगाया
फैक्ट्री प्रबंधन का तर्क है कि परिसर में भंडारण की पर्याप्त जगह नहीं होने के कारण चावल को अलग-अलग स्थानों पर रखा गया। सवाल है कि जब जगह उपलब्ध नहीं थी, तो इतनी बड़ी मात्रा में चावल मंगाने की आवश्यकता क्यों पड़ी।
बरसात नहीं, फिर भी बोरी बदली गई
नीरज सिंह ने आरोप लगाया कि बिना बरसात के चावल सफेद बोरियों में भरा गया। यह सामान्य प्रक्रिया नहीं, बल्कि पहचान मिटाने की कोशिश हो सकती है।
फैक्ट्री प्रबंधन ने दावा किया कि चावल को सुरक्षित स्थान पर रखने के लिए ट्रकों से परिवहन किया गया। सवाल यह उठाया कि जब फैक्ट्री में चावल इथेनॉल निर्माण के लिए आया था, तो उसे बाहर ले जाने की जरूरत क्यों पड़ी।
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नायब तहसीलदार को ही नहीं मिला फैक्ट्री
जांच के लिए पहुंचे नायब तहसीलदार को फैक्ट्री में प्रवेश नहीं दिया गया। विधायक ने आरोप लगाया कि मजिस्ट्रियल पावर वाले अधिकारी को रोकना कानून का उल्लंघन है। यह फैक्ट्री प्रबंधन की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
प्रशासन की क्लीन चिट पर सवाल
विधायक के आरोप और इतने तथ्यों और प्रबंधन के कबूलनामे के बावजूद जिला प्रशासन को कोई भी गड़बड़ी नजर नहीं आ रही। प्रारंभिक स्तर पर फैक्ट्री को दी गई कथित क्लीन चिट ने प्रशासन की भूमिका को संदिग्ध बना दिया है।
जांच होगी या मामला दबेगा?
भाजपा विधायक और क्षेत्रीय जनों से मिली जानकारी के अनुसार यह गतिविधि लंबे समय से चल रही थी। इसकी शिकायतें पहले भी मिलती रही हैं। सवाल यह है कि प्रशासन निष्पक्ष और गहन जांच करेगा या मामला फाइलों में दब जाएगा।
इसमें भी दो अलग-अलग कामों में एक ही फोटो पोर्टल पर एडिट करके अपलोड किया गया है। पहला चित्र पंचायत की बंजारा बस्ती में चल रहा है। इसके मस्टर पर गोविंद सिंह, विमला बाई, बनेसिंह, महेन्द्र सिंह, रेखा बाई, नरसिंह और रिंकी का नाम चढ़ाया गया है।
बरगी विधायक ने उठाए सवाल
बरगी विधायक नीरज सिंह ने एथेनॉल फैक्ट्री में संदिग्ध गतिविधियों पर मीडिया के सामने सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि एफसीआई द्वारा दिए गए चावल की अवैध ट्रेडिंग और री-पैकेजिंग हो रही है। चावल को भूरी बोरियों से निकालकर सफेद बोरियों में भरा जा रहा है। यह चावल अवैध रूप से बाहर भेजा जा रहा है। उन्होंने बेलखेड़ा क्षेत्र में पकड़े गए ट्रक को इसका प्रमाण बताया।
विधायक ने कहा कि प्लांट को चावल बेचने का लाइसेंस नहीं है। उन्होंने ट्रक के कागजात और ड्राइवर के बयानों में विसंगतियां बताईं। इसे भ्रष्टाचार का मामला बताया। विधायक ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि नायब तहसीलदार को प्लांट के अंदर क्यों नहीं प्रवेश दिया गया? पकड़े गए ट्रक को रात में क्यों छोड़ दिया गया? विधायक ने कलेक्टर से निष्पक्ष जांच की मांग की है।
श्री बालाजी प्लांट के मैनेजर नितिन पचौरी ने बताया
किसी ने गलत जानकारी दी थी, जिसके बाद जांच हुई। हम एफसीआई से चावल लेते हैं, जो एथेनॉल के लिए होते हैं। हमने 400 टन चावल उठाया, लेकिन जगह की कमी थी। चावल को प्लास्टिक बैग में स्टोर किया गया। जूट बोरियां गीली हो रही थीं, जिससे चावल खराब हो सकता था। यह एथेनॉल प्रोडक्ट के लिए दिक्कतें पैदा करता है। मशीनें खराब हो जाती हैं और स्टार्च कम हो जाता है। इसलिए, चावल को स्टेजिंग करके शिफ्ट किया गया। गाड़ी से माल लोड करना सुविधाजनक है।
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