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News in Short
1. रोजगार गारंटी योजना में एमपी में धांधली।
2. पंचायत और विभाग के अधिकारियों की जानकारी में हो रहा मस्टररोल पर फर्जीवाड़ा।
3. मजदूरों के नाम से फर्जी मस्टर डालकर हो रही है मजदूरी की राशि की बंटरबाट ।
4. अलग- अलग कामों में फोटोशॉप के जरिए एडिट कर एक ही फोटो के सहारे हो रही हेराफेरी।
5. देश के ग्रामीण विकास मंत्री के संसदीय क्षेत्र में भी जमकर हो रहा है भ्रष्टाचार।
News in Detail
मध्यप्रदेश में रोजगार गारंटी योजना में किस हद तक धांधली हो रही है। कैसे ग्रामीण मजदूरों के रोजगार के नाम पर पंचायत और अधिकारी हेराफेरी कर रहे हैं। इसकी तस्वीर देश के ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान के हालिया बयान ने उजागर कर दी है। प्रदेश में 20 साल से बीजेपी की सरकार है और 18 साल शिवराज स्वयं सीएम रहे हैं। ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना में भ्रष्टाचार पर उनके बयान ने सरकार और उन्हें कटघरे में खड़ा कर दिया है।
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रोजगार गारंटी के नाम पर हेराफेरी
मध्य प्रदेश में पंचायत स्तर पर सरकारी योजना की क्या स्थिति है। रोजगार गारंटी के नाम पर कैसे हेराफेरी हो रही है। मशीन और मस्टर के जरिए ग्रामीण और मजदूरों का हक कैसे छीना जा रहा है। यह द सूत्र की पड़ताल में भी सामने आया है।
द सूत्र ने पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान के कार्यक्षेत्र, रायसेन, सीहोर और विदिशा जिले की पंचायतों की जांच की। जांच में भ्रष्टाचार की परतें खुलकर सामने आईं। रोजगार गारंटी में करोड़ों रुपए की गड़बड़ी में अधिकारी, सरपंच-पंच, सचिव और मजदूर भी शामिल हैं। सरकार के खजाने को लूटने की होड़ रोजगार गारंटी के नाम पर चल रही है।
विदिशा जिले में मजाक बनी मनरेगा
सबसे पहले विदिशा जिले की ग्राम पंचायत अम्बानगर की करते हैं। अम्बानगर विदिशा- अशोकनगर हाईवे पर स्थित पंचायत है। पंचायत में मालीखेड़ी क्षेत्र में खेत सड़क का निर्माण हाल ही में पूरा हुआ है।
करीब डेढ़ किलोमीटर में मुरम की इस सड़क का निर्माण रोजगार गारंटी योजना की मद से कराया गया है। 14 लाख रुपए की यह सड़क अब भी अधूरी है। सड़क निर्माण के माध्यम से ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध कराया जाना था। लेकिन ऐसा केवल दिखावे तक सीमित रहा और पूरा काम मशीनों से करा लिया गया।
इसमें चार पुलियों का निर्माण होना है। लेकिन पंचायत ने एक स्थान पर पाइप डालकर काम पूरा दिखा दिया है। सुविधा मिलने की उम्मीद से खुश किसान अब परेशान हैं। पुलिया न बनने से पानी की निकासी बंद है। पानी भरा रहने से फसलें खराब हो रही हैं। किसान इसका विरोध कर रहे हैं।
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फर्जीवाड़े में विभाग के अफसरों की मिलीभगत
सुविधा मिलने की उम्मीद से खुश किसान अब परेशान हैं। पुलिया न बनने से पानी की निकासी बंद है। पानी भरा रहने से फसलें खराब हो रही हैं। किसान इसका विरोध कर रहे हैं।
जनपद नटेरन की कई पंचायतों में सरपंच, सचिव रोजगार गारंटी के मस्टर में धांधली का सहारा ले रहे हैं। एक मजदूर एक ही दिन में एक ही समय पर अलग- अलग स्थानों पर काम करता दिखाया जा रहा है। न केवल मस्टर पर उसका नाम दर्ज किया जा रहा है, बल्कि भुगतान के लिए जरूरी प्रपत्र में फोटोशॉप से एडिट किए गए फोटो भी अपलोड किए जा रहे हैं। कई जगह तो मस्टर के ऑनलाइन फार्मेट को पूरा करने अलग- अलग कामों में एक ही फोटो एडिट कर अपलोड किया जा रहा है।
फोटोशॉप की कलाकारी से तैयार हो रहे फर्जी मस्टर
इसका एक उदाहरण नटेरन जनपद की खाईखेड़ा पंचायत में एप्रोच रोड का निर्माण है। गूजरखेड़ी से खाईखेड़ा मेन रोड और खजूरी दास से चमराहा गांव के एप्रोच रोड का निर्माण अभी जारी है। 15 जनवरी को नरेगा पोर्टल पर इन दोनों कामों की तस्वीर पंचायत की ओर से अपलोड की गई है।
इस तस्वीर को देखते ही आप फर्जीवाड़े की इंतिहा और सरपंच, सचिव और रोजगार सहायक की मिलीभगत से चल रही हेराफेरी समझ जाएंगे। पहला चित्र दोपहर 12.40 बजे अपलोड किया गया है।एप्रोच रोड पर मजदूरी मस्टर पर ओमप्रकाश, अरुण, लालसाहब, ज्ञान सिंह, सुदीप धाकड़, नरेश कुमार, विवेक उपाध्याय, अभिषेक और हरिओम के नाम दर्ज हैं।
दूसरा फोटो 12.40 बजे अपलोड किया गया है। इसमें मजदूरी मस्टर पर रामसिंह, रमाकांत, रिषी कुमार, जगदीश और राजाबाबू काम करते दिखाए गए हैं। ध्यान से देखा जाए तो फोटोशॉप की घटिया कारीगरी नजर आती है। दोनों फोटो एक ही हैं, बस मस्टर के साथ आधा काटकर अपलोड किया गया है। दूसरे चित्र में केवल चार मजदूर दिखाने थे, लेकिन उनके कपड़े और चेहरे एक जैसे हैं।
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एक मजदूर, एक समय पर दो जगह कर रहा काम
पंचायत में रोजगार गारंटी में फोटोशॉप की कारीगरी और मस्टर में हेराफेरी से फर्जीवाड़े का दूसरा उदाहरण लटेरी जनपद की ईसरवास पंचायत का है।
इसमें भी दो अलग-अलग कामों में एक ही फोटो पोर्टल पर एडिट करके अपलोड किया गया है। पहला चित्र पंचायत की बंजारा बस्ती में चल रहा है। इसके मस्टर पर गोविंद सिंह, विमला बाई, बनेसिंह, महेन्द्र सिंह, रेखा बाई, नरसिंह और रिंकी का नाम चढ़ाया गया है।
16 जनवरी 2026 को सुबह 8.47 बजे अपलोड फोटो में ये सात मजदूर काम करते दिख रहे हैं। दूसरा मस्टर इसी गांव के सामुदायिक खेत तालाब के निर्माण का अपलोड किया गया है। जिसमें मजदूर के रूप में अशोक, सुरेश बंजारा, निकिता, पानबाई, दिनेश, राधेश्याम, मुन्नी राम, गुमान सिंह, सविता बंजारा और मुकेश के नाम दर्ज हैं। इस चित्र को गौर से देखिए और सोचिए किसी गांव में दो अलग- अलग स्थानों पर एक ही मजदूर एक ही समय पर कैसे काम कर सकते हैं।
मस्टर के साथ फोटो अपलोड करने वाले सचिव या रोजगार सहायक ने यह नहीं सोचा कि पांच मिनट के अंतराल से दो स्थानों पर फोटो खींचना और मस्टर की जानकारी के साथ एक मिनट में अपलोड करना कैसे संभव है। ये केवल सामान्य उदाहरण हैं। रोजगार गारंटी में ऐसे कई मामले हैं, जो देखेंगे तो चौंका देंगे। प्रदेश में इस महत्वपूर्ण योजना में सेंधमारी पर विभाग और प्रशासनिक अफसर चुप्पी साधे बैठे हैं।
मंत्री के संसदीय क्षेत्र में भी जमकर गड़बड़मझाला
पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान के संसदीय क्षेत्र रायसेन की पंचायत बरबटपुर में भी भ्रष्टाचार हो रहा है। 16 जनवरी को दो निर्माण कार्यों के मस्टर अपलोड किए गए। पहला मस्टर मंदिर से पुलिया के बीच सीसी सड़क का था। इसे दोपहर 12.35 बजे अपलोड किया गया। मस्टर में भूरिया बाई, विशाल, सुरविता, शेखर, ललित धुर्वे, ऊषा बाई और मीराबाई के नाम थे। फोटो में कोई महिला नजर नहीं आई।
दूसरा मस्टर मेनरोड से विजय बाबा के घर तक की सीसी सड़क का था। इसे सुबह 11.2 मिनट पर अपलोड किया गया। मस्टर में पांच मजदूरों के नाम थे। सवाल यह है कि एक जैसे मजदूर अलग-अलग स्थलों पर काम कैसे कर सकते हैं। नसरुल्लागंज की कोसमी पंचायत में भी रोजगार गारंटी योजना में गड़बड़ी हो रही है।
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पंचायत ने 16 जनवरी को दोपहर 1.28 बजे तालाब जीर्णोद्धार के काम का मस्टर अपलोड किया है। मनरेगा पोर्टल पर इस मस्टर में दो मजदूर राहबाई और राजाराम बारेला के नाम दर्ज हैं। लेकिन जो फोटो अपलोड की गई है।वह दो युवकों की है।
दूसरा मस्टर भी 16 जनवरी को दोपहर 1.22 बजे वसुधा नंदन अमृत वाटिका निर्माण का अपलोड किया गया है। इसमें भी दो मजदूर सीमाबाई और तेल सिंह के नाम दर्ज हैं। लेकिन जो फोटो अपलोड किया गया है। उसमें दो युवक नजर आ रहे हैं।
कमाल की बात ये है कि ये फोटो भी पहले मस्टर में अपलोड किए गए फोटो में नजर आ रहे युवकों का है। इसमें भी कोई महिला नहीं है। इससे भी गजब ये है कि दोनों जगह भी एक ही हैं। मौके पर न तो तालाब दिख रहा है और न अमृत वाटिका ही नजर आ रही है।
मनरेगा में सरकारी खजाने की बंदरबांट रोजगार की गारंटी के नाम पर हो रही है। द सूत्र ने भोपाल के आसपास के दर्जन भर गांवों में योजना की पड़ताल की। यहां पंचायत और विभाग के जिम्मेदारों की कारगुजारियों की जांच की गई।
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