फाइलों में बंट गया मुआवजा, हकीकत में टपक रहीं छतें, यह है 'केबीसी' फेम तहसीलदार का करोड़पति घोटाला

Jinesh Jain | May 03, 2026, 17:26 IST
Share
Ashish Bhardwaj - 2026-05-03T171113.459
Photograph: (the sootr)

यह ऐसे घोटालेबाज कर्मचारी—अधिकारियों का मामला है, जिन्होंने आपदा को कमाई का अवसर बना लिया। बाढ़ में गांव वालों के घर गिर गए। बहुत सारे मवेशी बह गए। अफसर मुआवजा डकार गए। अब इन बाढ़ प्रभावितों को न्याय चाहिए।

Sheopur: अगस्त 2021 की वह रात मध्यप्रदेश में श्योपुर के लिए कयामत बनकर आई थी। चंबल की सहायक नदियों ने ऐसा तांडव मचाया कि गांव के गांव बह गए। ललितपुरा के जयराम आज भी उस मंजर को याद कर कांप जाते हैं। उन्होंने उस बाढ़ में अपना सब कुछ खो दिया-40 खरगोश, 15 मुर्गियां, 13 बकरियां, चार गायें, दो भैंस और दो बछड़े। उनके तीन घर ढह गए।

जयराम को उम्मीद थी कि सरकार मदद करेगी। लेकिन तीन साल बाद हकीकत यह है कि उनके बच्चे स्कूल छोड़ चुके हैं। परिवार कर्ज में डूबा है। जयराम को नहीं पता था कि उनके हक का पैसा किसी सरकारी फाइल के जरिए अधिकारियों की जेब में जा चुका है।

​केबीसी की 'हॉट सीट' से सलाखों तक

​इस पूरे घोटाले के केंद्र में एक नाम है-अमिता सिंह तोमर। अमिता ने 2019 में अमिताभ बच्चन के शो 'कौन बनेगा करोड़पति' में 50 लाख रुपए जीतकर सुर्खियां बटोरी थीं। उस वक्त वे मध्य प्रदेश की चर्चित तहसीलदार थीं।

आज वे उसी जिले की जेल में बंद हैं। आरोप है कि उन्होंने बाढ़ पीड़ितों के करोड़ों रुपए फर्जी खातों में ट्रांसफर किए। ​पुलिस के अनुसार, यह कोई छोटी चूक नहीं थी। यह एक सुनियोजित डकैती थी। इसमें तहसीलदार, 18 पटवारी और कई प्राइवेट कंप्यूटर ऑपरेटर शामिल थे। अब तक इस घोटाले में 30 लोग गिरफ्तार हो चुके हैं।

​घोटाले का गणित

​सरकारी रिकॉर्ड चौंकाने वाले हैं। बड़ौदा तहसील में 960 किसानों को लाभार्थी चुना गया था। इनके लिए 2,40,68,720 रुपए का बजट आवंटित हुआ। जांच में यह सामने आया कि बाढ़ पीड़ितों तक मात्र 30 लाख रुपए ही पहुंचे। यानी कुल 960 में से केवल 133 बाढ़ प्रभावितों को ही मुआवजा दिया गया। करीब 2.10 करोड़ रुपए फर्जी खातों में चले गए।

जांचकर्ताओं का कहना है कि औसतन 6 किसानों का पैसा एक ही फर्जी खाते में डाला गया। फिर इस पैसे को छोटी-छोटी किश्तों (50 हजार और 90 हजार) में निकाला गया। ऐसा इसलिए किया गया ताकि बैंकिंग सिस्टम की पकड़ में न आए।

​कैसे हुआ यह डिजिटल डाका?

नियम के मुताबिक, बाढ़ राहत के लिए पंचायत सचिव, कृषि अधिकारी और पटवारी सर्वे करते हैं। सूची तैयार होने के बाद इसे तहसीलदार (अमिता सिंह तोमर) के पास भेजा गया। तहसीलदार के डिजिटल हस्ताक्षर (OTP आधारित) के बिना खजाने से पैसा नहीं निकल सकता।
​
एडीएम रूपेश उपाध्याय बताते हैं, एक पटवारी अकेले पैसा नहीं निकाल सकता। तहसीलदार की डिजिटल आईडी ही अंतिम चाबी होती है। बैंक खातों के मिलान की जिम्मेदारी तहसीलदार की थी। लेकिन यहां खेल अलग हुआ। लाभार्थियों के नाम तो सूची में वही रहे, लेकिन उनके बैंक खाता नंबर बदल दिए गए। पैसे उन 127 खातों में भेजे गए जिनका बाढ़ से कोई लेना-देना नहीं था। ये खाते पटवारियों के रिश्तेदारों और परिचितों के थे।

​यह है हकीकत: हमें सिर्फ 5000 मिले

​ललितपुरा गांव में घुसते ही बर्बादी के निशान दिखते हैं। जयराम की पत्नी उर्मिला कहती हैं, हजारों का नुकसान हुआ, लेकिन खाते में सिर्फ 5000 रुपए आए। हमने रिश्तेदारों से कर्ज लेकर दो कमरों का घर बनाया है। तीन बच्चों की पढ़ाई बंद हो गई।
​
विष्णु कुशवाहा और उनकी पत्नी आज भी टीन के एक शेड में रहते हैं। उन्हें मुआवजा नहीं मिला। सुग्रीव कुशवाहा का परिवार पिछले तीन साल से काले टेंट के नीचे सो रहा है। वे कहते हैं, हमें सरकार ने मरने के लिए छोड़ दिया।

​हरिमोहन का परिवार 10 सदस्यों का है। बाढ़ में दो कमरे पूरी तरह गिर गए। सूची में उनका नाम था, उन्हें बड़ी राशि मिलनी थी, लेकिन हाथ आए सिर्फ 5000 रुपए। शेष राशि कहां गई? उन्हें नहीं पता।

अधिकारियों का सिंडिकेट

एसडीओपी अवनीत शर्मा ने बताया कि तहसीलदार अमिता सिंह तोमर को इस घोटाले से करीब 75 से 80 लाख रुपये मिलने वाले थे। बाकी रकम पटवारियों और अन्य सहयोगियों में बंटनी थी। ​गिरफ्तार आरोपियों में तीन प्राइवेट कंप्यूटर ऑपरेटर भी हैं-राम अवतार, धीरज सुमन और योगेश गौतम।

​योगेश के पिता का कहना है, मेरा बेटा 3000 रुपये महीने कमाता था। क्या एक छोटा ऑपरेटर इतना बड़ा घोटाला कर सकता है? असली खिलाड़ी बड़े अधिकारी हैं।

​राम अवतार की पत्नी ललितेश कहती हैं, पटवारी ने मेरे पति के खाते में पैसे क्यों डाले, हमें नहीं पता। गरीबों के हक के साथ खिलवाड़ नहीं होना चाहिए था।

​तहसीलदार का पक्ष: मैं सिर्फ एक प्रक्रिया का हिस्सा

​अदालत में अमिता सिंह तोमर ने अपना बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने सिर्फ सत्यापन के बाद हस्ताक्षर किए। उनका तर्क है कि वे उस वित्तीय लेनदेन की श्रृंखला का अंतिम बिंदु थीं, जिसे वे नियंत्रित नहीं करती थीं।

उन्होंने खुद को निर्दोष बताते हुए कहा कि उनका नाम मूल FIR में भी नहीं था। हालांकि, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी कि मामला बाढ़ पीड़ितों के हक को हड़पने का है।

​क्या पीड़ितों को पैसा मिलेगा?

एडीएम उपाध्याय बताते हैं कि सरकार ने पटवारियों से 1 करोड़ रुपये की वसूली की प्रक्रिया शुरू की है। लेकिन यह रास्ता आसान नहीं है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह पैसा वापस उन किसानों को मिलेगा जिनका घर और पशु बह गए? फिलहाल इसके लिए सरकार की ओर से कोई स्पष्ट आदेश नहीं है।

मुख्य बिंदु:

मुख्य आरोपी: तहसीलदार अमिता सिंह तोमर (KBC विजेता)।
​घोटाला: 2.4 करोड़ के बाढ़ राहत फंड में करीब 2 करोड़ का गबन।
​तरीका: असली लाभार्थियों के बैंक खाते बदलकर फर्जी खातों में पैसा ट्रांसफर करना।
​वर्तमान स्थिति: 30 गिरफ्तारियां, तहसीलदार जेल में, वसूली जारी।
​प्रभाव: सैकड़ों बच्चे स्कूल से बाहर, परिवार टेंट में रहने को मजबूर।

ये भी पढे़:-

पिता का अपमान सहन नहीं कर पाया जज बेटा, दिल्ली में सुसाइड, राजस्थान में अंतिम संस्कार

अस्पताल के बाहर दो घंटे तड़फ्ती रही महिला मरीज, आखिर में तोड़ दिया दम

जयपुर में 20 साल पहले मरी महिला के नाम पर लोन, पुलिस ने किया दो को गिरफ्तार

कुवैत के नर्क से आजाद होकर वतन लौटा राजस्थान का लाल, केंद्रीय मंत्री की पहल और दूतावास के प्रयासों से मिली नई जिंदगी

Tags:
  • मध्य प्रदेश हाई कोर्ट
  • श्योपुर
  • फर्जी खाते
  • डिजिटल हस्ताक्षर
  • बाढ़ राहत फंड
गूगल पर द सूत्र चुनें ! Add as a preferredsource on Google
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें

By Sanjay Dhiman

mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे

By Sanjay Gupta

झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा

By Arun Tiwari

बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग

By Jitendra Shrivastava

Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग

By Jitendra Shrivastava

Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग

By Jitendra Shrivastava

Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग
मंत्रालय में बड़ा फेरबदल, 38 अनुभाग अधिकारियों की बदली जिम्मेदारी; वित्त-गृह समेत कई विभागों में नई तैनाती

By VINAY VERMA

मंत्रालय में बड़ा फेरबदल, 38 अनुभाग अधिकारियों की बदली जिम्मेदारी; वित्त-गृह समेत कई विभागों में नई तैनाती