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News in Short
- सुमित्रा महाजन ने एलिवेटेड कॉरिडोर की योजना पर अधिकारियों से चिंता जताई।
- मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को भविष्य के लिए योजना बनाने की जिम्मेदारी दी।
- इंजीनियर अतुल सेठ ने फ्लाईओवर बनाने का सुझाव दिया, सर्वे में कम यूटिलिटी।
- बैठक में ट्रैफिक और सर्विस रोड के इस्तेमाल पर चर्चा हुई।
- एलिवेटेड कॉरिडोर पर हाईकोर्ट में याचिका दायर, कार्य फरवरी में शुरू होगा।
News in Detail
इंदौर में LIG से नवलखा के बीच 6 किमी लंबे एलिवेटेड कॉरिडोर के काम शुरू होने से पहले गुरुवार 29 जनवरी को बड़ी बैठक हुई। इसमें पूर्व स्पीकर सुमित्रा महाजन ने अपनी पीड़ा बताते हुए अधिकारियों को खरी-खरी सुना दी। बैठक में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के साथ ही विधायक, विशेषज्ञ और अधिकारी मौजूद थे।
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यह बोली ताई महाजन
सुमित्रा महाजन (ताई) ने कहा कि एलिवेटेड कॉरिडोर की जरूरत है। लेकिन जो भी सोचो 25 साल की प्लानिंग के साथ। मेरी तो उम्र खत्म। आज इंदौर में हर जगह जाम लग रहा है। पता नहीं किसे सूझी एमपीआरडीसी एक साथ चार-चार जगह फ्लाईओवर ब्रिज बना रहा है।
मूसाखेड़ी में तो हम चार साल से भुगत रहे हैं, कितनी तकलीफ कोई समयसीमा तय नहीं है। माफ करना जो अधिकारी है, सभी को बोल रही हूं, आखिर कितने समय में पूरा होगा। शहर को कितनी आवश्यकता है। अधिकारी तो तीन साल के लिए आओगे और चले जाओगे इंदौर के लोग कहां जाएं।
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कैलाश को आज जिम्मेदारी सौंप रही हूं
महाजन ने कहा कि आज कैलाश को जिम्मेदारी सौंप रही हूं कि भविष्य को देखते हुए प्लानिंग की जाए। आज हर चौराहे पर हालत खराब है। चाहे सत्यसांई चौराहा हो या विजयनगर चौरहा। एलिवेटेड कॉरिडोर भी भविष्य को देखते हुए राउ तक जाना चाहिए।
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कॉरिडोर को लेकर कई आपत्तियां आई
एलिवेटेड कॉरिडोर को लेकर इंजीनियर अतुल सेठ ने कहा कि इसकी जगह हर चौराहे पर फ्लाईओवर बनना चाहिए। ट्रैफिक सर्वे में भी केवल 10 फीसदी तक यूटिलिटी आ रही है। इतनी बड़ी लागत से यह बनाने का कोई तुक नहीं है।
वहीं अन्य ने कहा कि टू लेन कॉरिडोर (दोनों ओर टू-टू लेन) आज के समय में क्राइम है। एक भी वाहन फंसा तो पूरा जाम लग जाएगा। कम से कम तीन लेन होना चाहिए। वहीं आसपास की सर्विस रोड से आने वाले ट्रैफिक को लेकर चर्चा चली कि वह कैसे इस कॉरिडोर का उपयोग कर सकेंगे।
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मंत्री कैलाश विजयवर्गीय यह बोले
मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने सभी से कहा कि अपने सुझाव सभी लिखित में संभागायुक्त सुदाम पी खाड़े को उपलब्ध करा दें। फिर 7 फरवरी को जनप्रतिनिधि और अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे कि एलिवेटेड कॉरिडोर को किस तरह से लेना है। क्या इसमें बदलाव किया जाना चाहिए। बैठक में महापौर पुष्यमित्र भार्गव, सांसद शंकर लालवानी, विधायक महेंद्र हार्डिया, मधु वर्मा, गोलू शुक्ला के साथ ही अधिकारी और अन्य विशेषज्ञ उपस्थित थे।
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याचिका भी दायर हो चुकी है
उल्लेखनीय है कि एलिवेटेड कॉरिडोर को लेकर इंजीनियर सेठ द्वारा हाईकोर्ट में याचिका भी दायर कर दी गई है। सर्वे के अनुसार, इस कॉरिडोर का कोई लाभ नहीं है। ऐसे में इसकी जरूरत नहीं है। वहीं अधिकारी ट्रैफिक और बीआरटीएस को लेकर लगी याचिका में 28 जनवरी को ही हाईकोर्ट में कह चुके हैं कि कॉरिडोर बन रहा है। इसलिए 6.1 किमी लंबे हिस्से में रेलिंग नहीं हटा रहे हैं और इसका काम फरवरी में शुरू हो रहा है।
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