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News In Short
- नीमच के मनासा में GBS बीमारी से अब तक 2 बच्चों की मौत हो चुकी है और कुल 17 लोग संक्रमित हैं।
- संक्रमितों में 15 मरीज बच्चे और किशोर हैं, जिनकी उम्र 4 से 17 साल के बीच है।
- उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने शनिवार को प्रभावित क्षेत्र का दौरा कर घर-घर सर्वे के निर्देश दिए।
- भोपाल और उज्जैन के एक्सपर्ट्स इस दुर्लभ बीमारी के फैलने के कारणों की गहन जांच कर रहे हैं।
- स्वास्थ्य विभाग ने अब तक 7 मरीजों में आधिकारिक रूप से गुलियन-बेरी सिंड्रोम की पुष्टि की है।
News In Detail
Neemuch News. नीमच जिले के मनासा कस्बे में एक दुर्लभ और खतरनाक बीमारी ने दहशत फैला दी है। यहां GBS (Guillain-Barré Syndrome) के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं।
अब तक इस बीमारी ने दो मासूम बच्चों की जान ले ली है, जबकि 17 लोग इसकी चपेट में आ चुके हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि संक्रमितों में 15 मरीज नाबालिग हैं।
मध्य प्रदेश के नीमच जिले का मनासा क्षेत्र इस समय एक गंभीर स्वास्थ्य संकट से जूझ रहा है। शुक्रवार रात चार नए मरीज मिलने के बाद संक्रमितों का आंकड़ा 17 तक पहुंच गया है। इस बीमारी का शिकार सबसे ज्यादा 4 से 17 साल के बच्चे हो रहे हैं। केवल दो वयस्क (Adults) ही अब तक संक्रमित पाए गए हैं।
गुलियन-बेरी सिंड्रोम (GBS) क्या है?
गुलियन बेरी सिंड्रोम (GBS) एक दुर्लभ ऑटोइम्यून डिसऑर्डर है। इसमें शरीर का इम्यून सिस्टम यानी रोग प्रतिरोधक प्रणाली अपनी ही स्वस्थ तंत्रिकाओं (Nerves) पर हमला करने लगती है। इसकी शुरुआत अक्सर पैरों में कमजोरी और झुनझुनी से होती है, जो धीरे-धीरे पूरे शरीर में फैल सकती है। गंभीर स्थिति में यह पैरालिसिस यानी लकवा का कारण भी बन सकता है। इससे सांस लेने में दिक्कत होती है और मरीज की जान जा सकती है।
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डिप्टी सीएम पहुंचे नीमच के मनासा
हालात का जायजा लेने के लिए प्रदेश के उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल शनिवार 17 जनवरी को खुद नीमच के मनासा पहुंचे। उन्होंने पीड़ित परिवार से मुलाकात की और स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ आपातकालीन बैठक की। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि क्षेत्र में घर-घर जाकर स्क्रीनिंग की जाए और सर्वे में कोई भी लापरवाही न बरती जाए। प्रशासन अब बीमारी के मुख्य सोर्स और कारणों का पता लगाने में जुटा है।
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एक्सपर्ट्स की टीमें तैनात
मनासा में इस समय भोपाल और उज्जैन से आए एक्सपर्ट्स की टीमें डेरा डाले हुए हैं। जिला अस्पताल के सीएमएचओ (CMHO) डॉ. आरके खाघौत के अनुसार, अब तक 7 मरीजों में आधिकारिक तौर पर GBS की पुष्टि हो चुकी है। स्वास्थ्य टीमें लगातार सैंपल कलेक्शन कर रही हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि अचानक यह बीमारी एक ही क्षेत्र में इतनी तेजी से क्यों फैली।
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मासूम सोनू की मौत से इलाके में हड़कंप
बीमारी की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वार्ड नंबर 15 के रहने वाले सोनू (पिता पुरण सोनी) की इस बीमारी से मौत हो गई। शुक्रवार रात को अचानक केस बढ़ने के बाद पूरे इलाके में स्वास्थ्य विभाग ने अलर्ट जारी कर दिया है। फिलहाल संक्रमित बच्चों में से कुछ की स्थिति स्थिर बनी हुई है, लेकिन संदिग्धों की सूची लंबी होती जा रही है।
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