15 दिन के मासूम के लिए छुट्टी में भी खुल गया स्वास्थ्य विभाग, अधिकारियों ने निभाई इंसानियत की ड्यूटी
Neel Tiwari | Apr 13, 2025, 23:03 IST
Health department opened
बच्चे को लेकर जैसे ही स्वप्निल पटेल निजी अस्पताल पहुंचे, डॉक्टरों ने गहन जांच की। उन्होंने यह कहा कि बच्चे के दिल में छेद है, तो जैसे पूरी दुनिया थम गई।
रविवार का दिन, जब सरकारी दफ्तरों में सन्नाटा होता है, कर्मचारी अपने परिवार के साथ समय बिताते हैं, और चारों ओर एक विश्राम का माहौल रहता है। ऐसे दिन में जब एक नवजात की जान संकट में आई, तब जबलपुर का स्वास्थ्य विभाग महज़ एक संस्था नहीं, बल्कि एक संवेदनशील अभिभावक की तरह सामने आया। ताले खुले, कुर्सियां खिसकीं, और कलमें चलीं... ताकि उस नन्हे दिल की धड़कन थमने से बच जाए। यह कोई आम प्रशासनिक कार्रवाई नहीं थी, बल्कि एक जीवित उदाहरण था कि जब सरकार के लोग अपने दायित्व को सेवा समझने लगते हैं, तो चमत्कार भी संभव हो जाते हैं।
![ea21935a-333]()
पाटन निवासी स्वप्निल पटेल और उनका परिवार अपने नवजात बेटे विनायक पटेल के आगमन से फूले नहीं समा रहा था। घर में पहली बार किलकारियों की गूंज सुनाई दी थी। बच्चों के कपड़े खरीदे गए, नामकरण की बातें हो रहीं थीं, और मां की गोद में हर दिन एक नए सपने पल रहे थे। लेकिन तभी जिंदगी ने एक ऐसा मोड़ लिया, जिसकी किसी ने कल्पना नहीं की थी। विनायक अचानक सुस्त पड़ने लगा, मां की गोद में हलचल कम हो गई, और उसकी आंखों की चमक बुझने लगी। परिवार को यह समझने में देर नहीं लगी कि कुछ गंभीर है।
ये खबर भी पढ़िए... MP Board 10-12th Results: एमपी बोर्ड 10-12वीं के रिजल्ट को लेकर आया नया अपडेट, जानें कब होंगे जारी
बच्चे को लेकर जैसे ही स्वप्निल पटेल निजी अस्पताल पहुंचे, डॉक्टरों ने गहन जांच की। उन्होंने यह कहा कि बच्चे के दिल में छेद है, तो जैसे पूरी दुनिया थम गई। एक मासूम जो अभी ठीक से सांस लेना भी नहीं सीख पाया था, उसके जीवन को एक ऐसी चुनौती का सामना करना था जो किसी भी अभिभावक की कल्पना से परे होती है। माँ-पिता की आंखों में आंसू थे, लेकिन चेहरे पर सिर्फ एक सवाल-अब क्या होगा? उस समय कोई उम्मीद की किरण दूर-दूर तक दिखाई नहीं दे रही थी।
ये खबर भी पढ़िए... MP में 9 आईएएस के तबादले, बदले गए 4 जिलों के कलेक्टर, आशीष सिंह को मिला सिंहस्थ मेला अधिकारी का प्रभार
अस्पताल के डॉक्टरों ने उन्हें राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) के बारे में जानकारी दी, जिसके तहत बच्चों के हृदय रोगों का नि:शुल्क उपचार करवाया जाता है। उन्हें बताया गया कि इस कार्यक्रम के ज़िला प्रबंधक सुभाष शुक्ला से संपर्क किया जाए। घबराए हुए परिजनों ने बिना देरी किए सुभाष शुक्ला को फोन लगाया। शुक्ला ने बात सुनते ही मामले की गंभीरता को समझा, और अपने निजी समय को दरकिनार कर दिया। उन्होंने न सिर्फ कार्यालय खुलवाया, बल्कि पूरी प्रक्रिया को तत्काल गति देने का निर्णय लिया।
ये खबर भी पढ़िए... Ladli Behna Yojana: लाड़ली बहना योजना की 23वीं किस्त को लेकर कांग्रेस ने किया हमला तो बीजेपी ने कही ये बात
सुभाष शुक्ला ने उस वक्त केवल एक अधिकारी की भूमिका नहीं निभाई, बल्कि एक बड़े भाई और रक्षक की तरह काम किया। उन्होंने यह सोचकर कदम नहीं बढ़ाया कि छुट्टी है, या यह उनका काम नहीं है, बल्कि यह मानकर कि एक मासूम की जान उनके निर्णय पर टिकी है। उन्होंने त्वरित रूप से मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजय मिश्रा से संपर्क किया और उन्हें भी कार्यालय बुलवाया। कुछ ही समय में विभागीय दफ्तर की दीवारों में मानवीय चिंता की हलचल साफ दिखने लगी।
ये खबर भी पढ़िए... कर्मचारियों के लिए अच्छी खबर, नई तबादला नीति आएगी, मई-जून में होंगे ट्रांसफर
कार्यालय में जैसे ही अधिकारी पहुंचे, प्रक्रिया को यथाशीघ्र प्रारंभ किया गया। फाइलें खोली गईं, दस्तावेज़ों को तैयार किया गया, और डिजिटल सिस्टम पर बच्चे का मेडिकल विवरण अपलोड किया गया। सामान्यतः जिन कार्यवाहियों को पूरा करने में दो-तीन दिन लग जाते हैं, वह सब कुछ कुछ ही घंटों में पूरा कर दिया गया। कोई समय नहीं गंवाया गया क्योंकि हर मिनट बच्चे की जान पर भारी पड़ सकता था।
सारी कार्यवाही पूर्ण होते ही, विनायक को तत्काल मुंबई स्थित कार्डियक सुपरस्पेशियलिटी अस्पताल के लिए रवाना किया गया। यह पूरी व्यवस्था राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत की गई, जिसमें यात्रा से लेकर भर्ती, इलाज, दवाएं और देखभाल तक सभी कुछ पूरी तरह निशुल्क होता है। परिवार को आर्थिक बोझ से राहत मिली, और सबसे बड़ी बात-बच्चे की जान बचने की उम्मीद उनके भीतर फिर से जाग उठी।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजय मिश्रा ने बताया कि आने वाले दो दिन और छुट्टियाँ थीं। ऐसी स्थिति में अगर निर्णय में देरी होती, तो बच्चे की जान को खतरा हो सकता था। उन्होंने कहा, "हमारे लिए यह सिर्फ एक मामला नहीं था, यह मानवता का प्रश्न था। प्रशासन का यह कर्तव्य है कि जब किसी की जिंदगी हमसे जुड़ी हो, तो हम समय, दिन और दफ्तर के समय की सीमा को न देखें,बल्कि दिल से काम करें।"
बच्चे के पिता स्वप्निल पटेल की आंखें भरी हुई थीं, लेकिन उनमें अब भय नहीं, कृतज्ञता थी। उन्होंने कहा, "हमारे लिए सबकुछ खत्म हो चुका था। हम समझ नहीं पा रहे थे कि इतनी बड़ी बीमारी का इलाज हम कैसे कराएंगे। लेकिन सुभाष शुक्ला और डॉ. मिश्रा ने हमें विश्वास दिलाया कि हम अकेले नहीं हैं। उन्होंने जो किया, वो किसी मसीहा से कम नहीं है।"
बच्चे की मौसी ने कहा, "हमने कभी नहीं सोचा था कि रविवार को सरकारी दफ्तर खुलेगा, और अधिकारी खुद आकर मदद करेंगे। लेकिन जो हमने देखा, वह हर सोच से परे था। सरकारी तंत्र की यह संवेदनशीलता सचमुच अविश्वसनीय थी। अब हमारे भांजे को नया जीवन मिलेगा, और हमें इस देश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गर्व है।"
यह घटना एक मिसाल पेश करती है कि सिस्टम अगर चाहे, तो चमत्कार कर सकता है। यहाँ नियमों से नहीं, भावनाओं से काम हुआ। कागजों से नहीं, इंसानियत से प्रक्रिया पूरी हुई। जब एक अफसर अपनी कुर्सी से उठकर आम इंसान की तरह सोचता है, तब एक मासूम की धड़कन फिर से चलने लगती है। यह खबर किसी प्रशासनिक रूटीन की नहीं, एक इंसानी जज्बे की कहानी है जो याद रखी जाएगी।
ea21935a-333
सपनों से सजी गोद में आया संकट का तूफान
ये खबर भी पढ़िए... MP Board 10-12th Results: एमपी बोर्ड 10-12वीं के रिजल्ट को लेकर आया नया अपडेट, जानें कब होंगे जारी
दिल में छेद की खबर बनी काल जैसी घड़ी
ये खबर भी पढ़िए... MP में 9 आईएएस के तबादले, बदले गए 4 जिलों के कलेक्टर, आशीष सिंह को मिला सिंहस्थ मेला अधिकारी का प्रभार
एक फोन ने खोले सरकारी दफ्तरों के ताले
ये खबर भी पढ़िए... Ladli Behna Yojana: लाड़ली बहना योजना की 23वीं किस्त को लेकर कांग्रेस ने किया हमला तो बीजेपी ने कही ये बात
एक जिम्मेदार अफसर, जो छुट्टी में ड्यूटी कर बना मिसाल
ये खबर भी पढ़िए... कर्मचारियों के लिए अच्छी खबर, नई तबादला नीति आएगी, मई-जून में होंगे ट्रांसफर
फाइलों की रफ्तार ने धड़कनों को दी राहत
नि:शुल्क होगा इलाज
अधिकारियों की संवेदनशीलता बनी मिसाल
हमें फिर से उम्मीद मिली: परिजन
मौसी की आंखें नम
कागजों से नहीं, इंसानियत से पूरी हुई प्रक्रिया
MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग
By Atul Dwivedi
एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
By Jitendra Shrivastava
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
By Sanjay Dhiman
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
By Sanjay Gupta
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा
By Arun Tiwari