हनी ट्रैप पर सुनवाई, ex cm kamalnath मामले में शासन से लगी आपत्ति

पूर्व सीएम कमलनाथ मामले में लगे दंड प्रक्रिया संहिता 91 में आवेदन लगा है, उस पर अभी मूल जवाब नहीं दिया है, लेकिन जवाब का अवसर बना रहे, इस पर हमने इस आवेदन पर आपत्ति ली है। यह आवेदन अनुसंधान अधिकारी की जांच में बाधा डालने वाला मामला है। मध्यप्रदेश

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Jitendra Shrivastava
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हनी ट्रैप कांड में शनिवार को सुनवाई हुई।

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संजय गुप्ता, INDORE. मप्र में चार साल बाद एक बार फिर हनी ट्रैप कांड में शनिवार (10 फरवरी) को सुनवाई हुई। पूर्व सीएम कमलनाथ द्वारा सीडी-पैन ड्राइव होने संबंधी दिए गए बयान पर आरोपियों द्वारा लगाए गए आवेदन पर एसआईटी की ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया, लेकिन इस पर आपत्ति जरूर लगाई गई। साथ ही आरोपियों ने यह जांच एक महीने के भीतर करने का आवेदन भी धारा 173 के तहत लगाया था, जिस पर भी शासन की ओर से आपत्ति ली गई। अब अगली सुनवाई दो मार्च को होगी। 

पूर्व सीएम कमलनाथ मामले में यह हुआ

विशेष न्यायाधीश मनोज तिवारी की कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान आरोपियों द्वारा लगे पहले आवेदन पर सुनवाई  हुई। यह आवेदन है कि पूर्व सीएम कमलनाथ द्वारा दिए गए बयान कि उनके पास सीडी-पैनड्राइव है तो उसे कोर्ट में पेश किया जाए। इस मामले में एसआईटी ने भी जून 2021 में उन्हें नोटिस दिया था। इस पर एसआईटी जवाब दे। इस मामले में एसआईटी की ओर से चीफ आदर्श कटियार और निरीक्षक शशिकांत चौरसिया दोनों ही नहीं उपस्थित हुए। विशेष लोक अभियोजक अभिजीत सिंह राठौर ने इस आवेदन पर आपत्ति ली। उन्होंने बताया कि पूर्व सीएम कमलनाथ मामले में लगे दंड प्रक्रिया संहिता 91 में आवेदन लगा है, उस पर अभी मूल जवाब नहीं दिया है, लेकिन जवाब का अवसर बना रहे, इस पर हमने इस आवेदन पर आपत्ति ली है। यह आवेदन अनुसंधान अधिकारी की जांच में बाधा डालने और हस्तक्षेप वाला मामला है, जबकि अनुसंधाकर्ता को कोई भी पक्षकार बाधित नहीं कर सकता है और ना उसे बाध्य किया जा सकता है। यह हमने विधिक आपत्ति ली है।

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आरोपियों के आवेदन कि जांच एक माह में पूरा करें, उस पर यह हुआ

वहीं आरोपियों द्वारा दंड प्रक्रिया संहिता 173 के तहत भी आवेदन लगाया था कि जांच में चार साल में कुछ नहीं हुआ, ना ही पूरक चालान पेश हुआ, इसलिए कोर्ट निर्देशित करे कि एसआईटी एक माह में जांच पूरा कर प्रतिवेदन या पूरक चालान पेश करे। विशेष लोक अभियोजक राठौर ने बताया कि हमने इस पर आपत्ति उठाई कि किसी भी जांच के अनुसांधन अधिकारी को इस धारा के तहत शक्ति है कि वह किसी भी चरण पर अनुसंधान अपना पूरा कर सकता है। उसे जांच खत्म करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सता है। इस आपत्ति पर अब दो मार्च को बहस होगी।  आरोपियों के वकील एमके दीक्षित और यावर खान ने बताया कि हमने कहा कि, कमलनाथ के खिलाफ हमने जो आवेदन लगाया उस पर अभियोजन (शासन पक्ष) द्वारा आपत्ति ली गई है और हमने जो दूसरा जो आवेदन लगाया था उस पर दो मार्च को तर्क होंगे। 

यह है पूर्व सीएम कमलनाथ का मामला

सीएम कमलनाथ ने 21 मई 2021 को एक प्रेस कांफ्रेंस मे दावा किया कि हनी ट्रैप कांड की सीडी पैनड्राइव मेरे पास मौजूद है। इस मामले में एसआईटी द्वारा उन्हें नोटिस दिया गया और कहा गया कि दो जून 2021 को दोपहर साढ़े बारह बजे श्यामला हिल्स भोपाल निवास पर उपस्थित रहकर कथन व साक्ष्य सीडी-पैनड्राइ एसआईटी को देने का कष्ट करें। लेकिन इसके बाद इस मामले में कुछ नहीं हुआ। इस मामले में एसआईटी को कोर्ट में जवाब पेश करना है।

आरोपियों ने यह लगाया आवेदन कि बेवजह इसे हनी ट्रैप नाम दिया

इसे लेकर आरोपियों ने कोर्ट में आवेदन लगाया है कि एसआईटी ने इस मामले में यदि सीडी-पैनड्राइव जब्त की है तो उसे कोर्ट में प्रस्तुत करवाया जाना चाहिए, क्योंकि पुलिस द्वारा इस केस को अनावश्यक फर्जी व कूटरचित सीडी पैनड्राइव के आधार पर बनाया गया है। बदनाम करने, आरोपियों को झूठा फंसाने के लिए इस केस को हनी ट्रैप नाम दिया गया है। इस कारण से पूर्व सीएम से जब्त सामग्री व उसकी जांच रिपोर्ट बुलाया जाना आवश्यक है। इसलिए कोर्ट एसआईटी को आदेशित करें कि पूर्व सीएम कमलनाथ से जब्त सीडी पैनड्राइव व जांच संबंधी दस्तावेज को कोर्ट में पेश करे।

अभी तक जांच गलत, एक माह में पूरी करें

आरोपियों ने एक और आवेदन कोर्ट में लगाया है जिसमें कहा गया है कि इस मामले में चालान दिसंबर 2019 में पेश हुआ और इसके बाद से ही प्रकरण में जांच ही चल रही है। कोई पूरक चालान तक पेश नहीं हुआ। इतनी लंबी जांच नहीं हो सकती है। इसलिए माननीय कोर्ट एसआईटी को आदेशित करे कि इस केस को एक माह के भीतर उचित निष्कर्ष निकालकर जांच समाप्त करें तथा अंतिम प्रतिवेदन या पूरक चालान जो भी हो इस कोर्ट को प्रस्तुत करें।

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