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Indore. हाईकोर्ट जबलपुर, ग्वालियर, इंदौर में 25 दिसंबर को हुई सरकारी वकीलों की नियुक्ति को चुनौती दी गई है। इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया गया है कि इसमें साल 2013 के नोटिफिकेशन के विपरीत दस साल से कम अनुभवी वकीलों को सरकारी वकील बनाया गया है। याचिका में पांच वकीलों के नामजद उदाहरण भी दिए गए हैं।
इन्होंने लगाई याचिका
याचिका जबलपुर हाईकोर्ट में योगेश सोनी द्वारा अधिवक्ता साकेत उपाध्याय के जरिए लगाई गई है। इस पर शुक्रवार को चीफ जस्टिस संजीव सचेदवा और जस्टिस विशाल मिश्रा की की बेंच में करीब आधे घंटे सुनवाई हुई।
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याचिकाओं में इन सभी की नियुक्ति पर सवाल
याचिकाकर्ता द्वारा अपनी याचिका में साल 2019 की अधिवक्ता रश्किा, साल 2019 के ही अधिवक्ता अरविंद कुमार, साल 2020 के अधिवक्ता विजय नागपाल और नई दिल्ली में नियुक्त डिप्टी एजी भूपेंद्र सिंह साल 2019 के अधिवक्ता के उदाहरण दिए हैं। नागपाल और सिंह की नियुक्ति इंदौर हाईकोर्ट में हुई है।
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यह तर्क दिए गए
याचिका में कहा गया कि 28 फरवरी 2013 में ही नोटिफिकेशन है कि सरकारी वकील (एजी, एएजी, डिप्टी एजी, जीए और डिप्टी जीए) इन सभी कि नियुक्ति के लिए कम से कम 10 साल का वकालत अनुभव जरूरी है। यह नियुक्तियां पारदर्शी तरीके से और नियमानुसार नहीं हुई है।
यह राजनीतिक रूप से भी प्रभावित रही है। साथ ही एक पद के विरूद्ध तीन के आवेदन की अनुशंसा एजी आफिस द्वारा होना थी जो नहीं हुई। इस पर बेंच ने कहा कि ऐसे में आपको याचिका में सभी प्रभावित पक्षकारों को पार्टी बनाना होगा, नोटिस देना होगा।
इस पर बाद में याचिकाकर्ता ने कहा कि हम पहले नियम जिसके तहत 10 साल से कम अनुभवी वकील की नियुक्ति नहीं हो सकती है, वहां तक ही याचिका को सीमित रखना चाहते हैं। बेंच ने इस मालमे में नोटिस जारी करने के आदेश दिए हैं।
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इतना मिलता है वेतन
याचिका में कहा गया कि एजी को ढाई लाख रुपए प्रति माह, एएजी को 1.75 लाख, डिप्टी एजी को 1.60 लाख, सरकारी वकील यानी जीए को 1.25 लाख और डिप्टी जीए को एक लाख रुपए प्रति माह के वेतन का प्रावधान है।
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