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राहुल कर सकते हैं सिंगरौली का दौरा
शनिवार 7 फरवरी को आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष और झाबुआ से कांग्रेस विधायक डॉ विक्रांत भूरिया के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल संसद भवन गया था।
वहां उन्होंने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से मुलाकात की। इस दौरान राहुल गांधी और प्रियंका पीड़ितों से भी मिले। राहुल गांधी ने पीड़ितों को भरोसा दिलाया कि वह उनके साथ हैं। इसके बाद ऐसा माना जा रहा है कि जल्द ही राहुल सिंगरौली का दौरा कर सकते हैं।
अनुमती के बिना कट रहे पेड़
प्रतिनिधिमंडल ने राहुल को बताया कि सिंगरौली के कोल ब्लॉक में अडानी समूह की खदानें चल रही हैं। यहां बिना ग्राम सभा की अनुमति के हजारों पेड़ काटे जा रहे हैं।
आदिवासियों ने आरोप लगाया कि खदानों के विस्तार नियमों को नजरअंदाज कर किया जा रहा है। इससे उनकी संस्कृति और आजीविका को खतरा हो गया है।
राहुल गांधी ने कहा कि इस मुद्दे को संसद में उठाया जाएगा। प्रियंका गांधी ने विस्थापन और पर्यावरणीय नुकसान पर चिंता जताई। बैठक में बासी बेरधा के पीड़ित अशोक पैगाम और सोनमति ने अपनी आपबीती सुनाई।
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कांग्रेस ने किया पलटवार
इस पर विपक्ष (कांग्रेस) ने पलटवार करते हुए कहा कि मोदी सरकार पूंजीपतियों के फायदे के लिए आदिवासियों का हक छीन रही है। वह उनके जल, जंगल, और जमीन पर कब्जा कर रही है। कांग्रेस ने यह भी कहा कि तानाशाही सरकार याद रखे कि हम आदिवासियों के साथ खड़े हैं। हम उनके अधिकारों के लिए सड़क से संसद तक लड़ेंगे।
नेता विपक्ष श्री @RahulGandhi जी और कांग्रेस महासचिव श्रीमती @priyankagandhi जी ने जनसंसद में सिंगरौली के आदिवासी प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की।
— MP Congress (@INCMP) February 7, 2026
मोदी सरकार पूंजीपतियों के फायदे के लिए आदिवासियों का हक छीन रही है, उनके जल-जंगल-जमीन पर कब्जा कर रही है।
लेकिन ये तानाशाह सरकार याद… pic.twitter.com/h6Rp7iiiNp
ये है अडानी का धीरौली कोयला खदान प्रोजेक्ट
अडानी पावर लिमिटेड देश की सबसे बड़ी निजी थर्मल पावर कंपनी है। इस कंपनी को 2 सितंबर को सिंगरौली जिले की धीरौली खदान में ऑपरेशन शुरू करने की मंजूरी मिल गई थी। इस खदान का मालिकाना हक अडानी पावर की सहायक कंपनी महान एनर्जेन लिमिटेड के पास है।
इस खदान की सालाना उत्पादन क्षमता 6.5 मिलियन टन है। इसमें से 5 मिलियन टन ओपन कास्ट खनन से और बाकी भूमिगत खनन से निकाला जाएगा।
खदान का भंडार...
धीरौली खदान में 558 मिलियन टन से ज्यादा कोयला है। इसका मतलब है कि यह खदान कई सालों तक ईंधन की सुरक्षा और कंपनी की स्थिरता बनाए रखेगी।
कंपनी की भविष्य की योजना
अडानी पावर लिमिटेड का लक्ष्य 2027 तक 5 मिलियन टन ओपन कास्ट माइनिंग करना है। नौ साल बाद भूमिगत खनन की शुरुआत होगी। कंपनी के पास 30 साल का खनन पट्टा है। इससे लंबे समय तक संचालन संभव होगा।
पहली कैप्टिव खदान को मिली मंजूरी
अडानी पावर को सरकार से पहली कैप्टिव खदान के संचालन की मंजूरी मिली है। यह खदान कंपनी की बिजली की जरूरतों को पूरा करेगी। साथ ही पास के 1200 मेगावाट के महान पावर प्लांट को भी कोयला सप्लाई करेगी।
अदाणी पावर का एक और प्रोजेक्ट
अडानी पावर लिमिटेड को मध्य प्रदेश पावर मैनेजमेंट कंपनी से 1600 मेगावाट का भी ठेका मिला है। यह एक अल्ट्रा-सुपरक्रिटिकल थर्मल पावर प्रोजेक्ट होगा। कंपनी इस प्रोजेक्ट पर करीब 21 हजार करोड़ रुपए खर्च करेगी। अदाणी पावर ने यह जानकारी 11 सितंबर को दी थी।
1600 मेगावाट का कॉन्ट्रैक्ट
अडानी पावर को पहले 800 मेगावाट का टेंडर मिला था। अब ग्रीनशू ऑप्शन से 800 मेगावाट और मिला है। यानी, अब कंपनी को कुल 1600 मेगावाट का कॉन्ट्रैक्ट मिला है। यह पहली बार है जब भारत में थर्मल पावर टेंडर में ग्रीनशू ऑप्शन का इस्तेमाल हुआ है।
कब तक पूरा होगा प्रोजेक्ट
कंपनी ने बताया कि मध्य प्रदेश के अनूपपुर में पावर प्रोजेक्ट 60 महीने में तैयार होगा। यहां दो यूनिट लगेंगी, जिनकी क्षमता 800-800 मेगावाट होगी। यह प्रोजेक्ट डिजाइन, बिल्ड, फाइनेंस, ओन और ऑपरेट मॉडल के तहत बनेगा।
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