अपराधियों का बनेगा डिजिटल रिकॉर्ड, सिंगल क्लिक में खुलेगा हर राज
Anjali Dwivedi | May 07, 2026, 16:37 IST
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पुलिस ने अपराधियों की पहचान तेज करने के लिए नया सॉफ्टवेयर प्रोजेक्ट शुरू किया है। इस सॉफ्टवेयर से अपराधियों की डिजिटल प्रोफाइल बनाई जाएगी। इससे जांच में तेजी आएगी
हाल ही में भारतीय पुलिस विभाग ने शातिर अपराधियों की पहचान और ट्रैकिंग के लिए एक नया सॉफ्टवेयर प्रोजेक्ट शुरू किया है। इस सॉफ्टवेयर के तहत अपराधियों की डिजिटल प्रोफाइल तैयार की जा रही है।
इससे जांच एजेंसियां जैसे सीबीआई, एनआईए, ईओडब्ल्यू और राज्य पुलिस भी इन्हें जल्दी से पहचान सकेंगी। इसके साथ ही यह सॉफ्टवेयर इन सभी एजेंसियों को आपस में जोड़ने का काम करेगा। इससे डाटा का लेन-देन सिंगल क्लिक में किया जा सकेगा।
यह सॉफ्टवेयर नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के मेजरमेंट कलेक्शन यूनिट (MCU) प्रोजेक्ट के तहत काम कर रहा है। NCRB ने पूरे देश में सात हजार 500 से ज्यादा अपराधियों की डिजिटल प्रोफाइल तैयार की है।
यह सॉफ्टवेयर सभी राज्य पुलिस विभागों को मुहैया कराया जा रहा है। इसके लिए आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर और हार्डवेयर का खर्च राज्य पुलिस विभाग को उठाना होगा।
इस सॉफ्टवेयर के जरिए अपराधियों की डिजिटल प्रोफाइल में बहुत सारी जानकारी जोड़ी जाएगी।
मध्यप्रदेश पुलिस विभाग के लिए MCU का महत्व बढ़ गया है, क्योंकि अब तक 450 थानों में यह सॉफ्टवेयर स्थापित किया जा चुका है। इस सॉफ्टवेयर को जेलों में भी लगाया जाएगा। इससे कैदियों की निगरानी को और बेहतर बनाया जा सकेगा।
इस सॉफ्टवेयर से पुलिस को शातिर अपराधियों पर नजर रखने में मदद मिलेगी। इसके माध्यम से अपराधियों के बारे में पूरी जानकारी एक ही जगह से प्राप्त हो जाएगी। इससे अपराधियों की गिरफ्तारी और उनके खिलाफ जांच में तेजी आएगी।
इस मौके पर पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना ने कहा कि आजकल ड्रोन हमलों जैसे सुरक्षा के नए खतरे सामने आ रहे हैं। इन चुनौतियों से निपटने के लिए पुलिस को इस तरह की हाई-लेवल ट्रेनिंग मिलना बहुत जरूरी है।
उन्होंने यह भी बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री की पहल पर अब NSG और मध्य प्रदेश पुलिस के बीच एक समझौता (MoU) हुआ है, ताकि दोनों मिलकर काम कर सकें।
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इससे जांच एजेंसियां जैसे सीबीआई, एनआईए, ईओडब्ल्यू और राज्य पुलिस भी इन्हें जल्दी से पहचान सकेंगी। इसके साथ ही यह सॉफ्टवेयर इन सभी एजेंसियों को आपस में जोड़ने का काम करेगा। इससे डाटा का लेन-देन सिंगल क्लिक में किया जा सकेगा।
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो और MCU प्रोजेक्ट
यह सॉफ्टवेयर सभी राज्य पुलिस विभागों को मुहैया कराया जा रहा है। इसके लिए आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर और हार्डवेयर का खर्च राज्य पुलिस विभाग को उठाना होगा।
डिजिटल प्रोफाइल में क्या शामिल होगा ?
- फिंगरप्रिंट और पाम प्रिंट
- आईरिस और रेटिना स्कैन
- गेट पैटर्न
- डीएनए प्रोफाइल
- फेशियल रिकॉग्निशन
- 12 अलग-अलग एंगल से फोट
- मल्टी-लेयर बायोमेट्रिक डेटा स्टोरेज
पुलिस को क्या फायदे मिलेंगे?
- एक बार जब अपराधी का डेटा सिस्टम में दर्ज हो जाएगा, तो उसे तुरंत पहचाना जा सकेगा। इससे अपराधियों की पहचान में बहुत तेजी आएगी।
- केंद्रीय एजेंसियों को रियल-टाइम में डेटा मिलेगा। इससे जांच में तेजी आएगी। खासकर जब कई एजेंसियां एक साथ काम कर रही होंगी।
- भीड़ में या सीसीटीवी फुटेज से भी संदिग्ध अपराधियों की पहचान करना संभव होगा। यह सुविधा खासतौर पर शहरों में बहुत उपयोगी साबित हो सकती है।
- राज्यों के बीच जानकारी साझा करने में भी यह सिस्टम मदद करेगा। इससे राष्ट्रीय स्तर पर अपराधों की ट्रैकिंग और डेटा का संग्रहण करना आसान हो जाएगा।
- अपराधियों का रेकॉर्ड सटीक रूप से रखना अब पहले से कहीं ज्यादा आसान होगा। इससे जेलों के प्रबंधन में सुधार होगा।
राज्य पुलिस के लिए MCU का महत्व
अपराधियों पर नजर रखने में मदद
डीजीपी कैलाश मकवाना का क्या कहना है
उन्होंने यह भी बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री की पहल पर अब NSG और मध्य प्रदेश पुलिस के बीच एक समझौता (MoU) हुआ है, ताकि दोनों मिलकर काम कर सकें।
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