बीजेपी की पदयात्रा में कॉलेज स्टाफ और छात्रों को बुलाने का आदेश, एडी बोलीं- कार्यक्रम गैर राजनीतिक है
इंदौर में बीजेपी की पदयात्रा के बीच उच्च शिक्षा विभाग का एक आदेश विवादों में आ गया है। विभाग ने सरकारी और निजी कॉलेजों के स्टाफ और छात्रों को पदयात्रा में शामिल होने के लिए बुलाया है। इसके लिए कॉलेजों से कर्मचारियों और विद्यार्थियों की सूची भी मांगी गई है।
बीजेपी की पदयात्रा के लिए कॉलेजों को भेजा आदेश
इसके अलावा कॉलेजों को अपने कर्मचारियों और विद्यार्थियों की सूची लीड कॉलेज को भेजने के निर्देश भी दिए गए हैं।
एडी अनामिका जैन ने आदेश पर क्या कहा?
जैन के मुताबिक, इसी जानकारी के आधार पर कॉलेजों को आदेश जारी किया गया। हालांकि, कार्यक्रम में बीजेपी के बड़े नेताओं की मौजूदगी और कॉलेजों को भेजे गए आदेश को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सीएम मोहन यादव और बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष पदयात्रा में शामिल
पदयात्रा का समय सुबह 10 बजे तय किया गया है। इसका Route सुभाष नगर चौराहे से पाटनीपुरा चौराहे तक रखा गया है। आयोजकों की ओर से इसमें करीब एक लाख लोगों के शामिल होने की बात कही गई है। इनमें विभिन्न समाजों के प्रतिनिधि, व्यापारी संगठन, खेल संगठनों के पदाधिकारी और आम नागरिक भी शामिल हैं।
कांग्रेस ने पूछा- कॉलेजों से भीड़ जुटाने की जरूरत क्यों?
उन्होंने सवाल किया कि अगर बीजेपी की पदयात्रा को लेकर जनता में इतना उत्साह है, तो कॉलेजों के कर्मचारियों और विद्यार्थियों को आदेश देकर बुलाने की जरूरत क्यों पड़ रही है? सूरी ने कहा कि शिक्षण संस्थानों का काम विद्यार्थियों को शिक्षा देना है। उन्हें किसी राजनीतिक दल के कार्यक्रम के लिए भीड़ जुटाने का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए।
छात्रों की सूची मांगने पर भी उठाए सवाल
सूरी ने कहा कि शिक्षण संस्थान किसी राजनीतिक दल की शाखा नहीं हैं। छात्र किसी पार्टी की रैली में भीड़ बढ़ाने का साधन नहीं हैं। सरकारी व्यवस्था का इस्तेमाल भी किसी दल के संगठन की तरह नहीं होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए संस्थाओं की स्वतंत्रता और लोगों की स्वेच्छा का सम्मान जरूरी है।
आदेश के बाद खड़ा हुआ विवाद
कांग्रेस नेता ने उठाया सवाल
सूरी ने कहा कि कॉलेजों का काम पढ़ाई कराना है या राजनीतिक कार्यक्रमों के लिए भीड़ जुटाना? अगर भाजपा की पदयात्रा को लेकर लोगों में इतना उत्साह है, तो फिर कॉलेजों के स्टाफ और विद्यार्थियों को बुलाने के लिए आदेश जारी करने की जरूरत क्यों पड़ रही है?
लोकतंत्र बचाने के नाम पर कॉलेजों के विद्यार्थियों और कर्मचारियों को राजनीतिक पदयात्रा में जुटाने का आदेश!इंदौर में भाजपा की ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ पदयात्रा के लिए अब सरकारी और निजी महाविद्यालयों के प्राचार्यों को आदेश जारी किए जा रहे हैं कि वे अपने कॉलेज के स्टाफ और विद्यार्थियों को 30 अक्टूबर सुबह 10 बजे सुभाष चौक पर एकत्रित करें। इतना ही नहीं, सभी महाविद्यालयों से कर्मचारियों और विद्यार्थियों की सूची तत्काल भेजने के निर्देश भी दिए गए हैं।सवाल यह है कि क्या अब शैक्षणिक संस्थानों का काम विद्यार्थियों को शिक्षा देना नहीं, बल्कि राजनीतिक दलों के आयोजनों के लिए भीड़ जुटाना रह गया है?अगर भाजपा की पदयात्रा को लेकर जनता में इतना ही उत्साह है, तो फिर कॉलेजों के स्टाफ और विद्यार्थियों को सरकारी आदेशों के जरिए बुलाने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है?लोकतंत्र की रक्षा के नाम पर विद्यार्थियों को राजनीतिक आयोजनों में शामिल करने का दबाव बनाना आखिर किस तरह की लोकतांत्रिक परंपरा है?शिक्षण संस्थान किसी राजनीतिक दल की शाखा नहीं हैं। विद्यार्थी किसी पार्टी की रैली की भीड़ नहीं हैं और सरकारी व्यवस्था किसी दल का निजी संगठन नहीं है।भाजपा को यह समझना चाहिए कि लोकतंत्र केवल नारों और पोस्टरों से नहीं, बल्कि संस्थाओं की स्वतंत्रता, नागरिकों की स्वेच्छा और लोकतांत्रिक मर्यादाओं के सम्मान से चलता है।पदयात्रा में कितने लोग स्वेच्छा से आएंगे, यह जनता तय करेगी; लेकिन कॉलेजों को राजनीतिक भीड़ जुटाने का माध्यम बनाने पर जवाबदेही जरूर तय होनी चाहिए।#indore
— Dr Aminul khan Suri (@SuriAminul) October 30, 2026
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