विनय बाकलीवाल विवाद : AGM में 600 प्रतिनिधि जुटे, बिना चुनाव बने अध्यक्ष को नकारा

इंदौर दिगंबर जैन समाज की AGM में शामिल हुए 600 प्रतिनिधियों ने विनय बाकलीवाल को अध्यक्ष मानने से इनकार कर दिया। अब चुनाव से ही नया मुखिया चुना जाएगा।

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Rahul Dave
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Vinay Bakliwal controversy 600 representatives gathered in AGM, rejected the president

Photograph: (the sootr)

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NEWS IN SHORT

  • दिगम्बर जैन समाज ने संविधान के तहत AGM बुलाई।
  • 80–85 मंदिरों के 550 से 609 प्रतिनिधि उपस्थित।
  • बिना चुनाव अध्यक्ष बनने पर निंदा प्रस्ताव पारित।
  • विनय बाकलीवाल को अध्यक्ष मानने से समाज का इंकार।
  • रिटायर्ड जज नरेंद्र जैन बने मुख्य चुनाव अधिकारी।

NEWS IN DETAIL

INDORE. दिगम्बर जैन समाज (सामाजिक संसद), इंदौर में अध्यक्ष पद को लेकर चल रहा संवैधानिक विवाद अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। समाज की साधारण सभा (AGM) में 85 से अधिक जैन मंदिरों के करीब 600 प्रतिनिधि शामिल हुए। सभा में बिना चुनाव अध्यक्ष बनाए जाने की कड़ी निंदा की गई, वोटर लिस्ट अपडेट करने और संविधान के अनुसार चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ाने का फैसला लिया गया। 

दिगम्बर जैन समाज (सामाजिक संसद), इंदौर की साधारण सभा (AGM) में समाज का स्पष्ट संदेश सामने आया-अध्यक्ष वही होगा, जो संविधान और चुनाव से आएगा। यानी पूर्व में अध्यक्ष घोषित हुए विनय बाकलीवाल को किसी ने भी अपना अध्यक्ष नहीं माना।

सभा में इंदौर के 85 से अधिक  जैन मंदिरों के मंत्री, अध्यक्ष और प्रतिनिधि शामिल हुए। कुल उपस्थिति 550 से 600 सदस्यों के बीच रही। सभी प्रतिनिधियों का विधिवत रजिस्ट्रेशन किया गया। किसी भी स्तर पर कोई विरोध या आपत्ति दर्ज नहीं हुई।

सभा के दौरान पूर्व में संविधान के विरुद्ध जाकर अध्यक्ष घोषित किए जाने की घटना पर निंदा प्रस्ताव लाया गया, जिसे सर्वसम्मति से पारित किया गया।

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विनय बाकलीवाल को अध्यक्ष मानने से इंकार

AGM में मौजूद प्रतिनिधियों ने स्पष्ट रूप से कहा आज मुख्य चुनाव अधिकारी नरेंद्र जैन ( रिटायर्ड जज ) की घोषणा की गई। वहीं उन्हीं के साथ चार लोगो की कमेटी बनाई गई । जिसमे प्रिंसिपल टोंग्या , डी.के. कुमार जैन (पूर्व DSP ), कुशलराज जैन, राजू अलबेला शामिल हैं। 

समिति यह सुनिश्चित करेगी कि पूरी प्रक्रिया संविधान और पारदर्शिता के अनुसार हो। इस कारण विनय बाकलीवाल को अध्यक्ष मानने से समाज ने औपचारिक रूप से इंकार कर दिया। उल्लेखनीय है कि AGM में विनय बाकलीवाल स्वयं उपस्थित नहीं थे।

क्यों अहम है यह फैसला

दिगम्बर जैन समाज का संविधान अध्यक्ष को अपार अधिकार देता है। अगर अध्यक्ष चुनाव के बिना बना, तो भविष्य में—संविधान निष्प्रभावी होगा। समाज में स्थायी विभाजन बनेगा,लोकतांत्रिक व्यवस्था कमजोर होगी। इसी कारण विरोध व्यक्ति से ज्यादा प्रक्रिया को लेकर है।

मुनि सागर जी ने किया था निवेदन

दरअसल समाज में दो अध्यक्ष होने से बदनामी बढ़ने लगी थी एक गुट के अध्यक्ष राजकुमार पाटोदी दूसरे गुट के अध्यक्ष नरेंद्र वेद थे। इसी को ध्यान में रख कर दो वर्ष पहले मुनि सागर जी के इंदौर आगमन पर दोनों गुटों के अध्यक्षों से निवेदन किया गया था आप दोनों इस्तीफा दो। 

इसके बाद समाज के संविधान से एक चुनाव हो और एक अध्यक्ष चुना जाए। इस क्रम ने नरेंद्र वेद ने तो इस्तीफा दे दिया था वहीं राजकुमार पाटोदी ने बोला था कि मेरे जितने भी पदाधिकारी है उनसे बातचीत करूंगा।

इस पर एक मीटिंग हुई जिसमें 69 प्रतिनिधि उसमे सम्मिलित हुए। यहां तय हुए की नामांकन और चुनाव की प्रक्रिया होनी चाहिए। प्रक्रिया के अन्तर्गत यदि एक नाम आता है तो निर्विरोध अध्यक्ष होगा वहीं अधिक नाम आते है तो चुनाव होगा।

जो जीतेगा वो समाज का अध्यक्ष होगा। इस पर एक समन्वय समिति बनी जिसके मुख्य समन्वयक विनय बाकलीवाल थे। वह बिना किसी संविधान की प्रक्रिया को फॉलो किए बिना अध्यक्ष बन गए। इसी को लेकर सामाज में आक्रोश था ।

“हमारी आपत्ति व्यक्ति से नहीं है। आपत्ति सिर्फ इतनी है कि बिना चुनाव, बिना संविधान कोई अध्यक्ष नहीं बन सकता। इसी को लेकर आज एजीएम बुलाई थी जिसमे सभी का एक पक्ष था कि  संविधान के अनुसार ही अध्यक्ष चुना जाए।

सूत्र Alert 

AGM में 80 से 90 मंदिरों के मंत्री-प्रतिनिधि मौजूद नवीन गौधा, एडवोकेट अरविंद जैन, प्रिंसिपल टोंग्या, राजेंद्र जैन, शैलेन्द्र कुमार जैन, दिलीप गोधा, मनोज बाकलीवाल, राहुल जैन, सचिन जैन सहित कई वरिष्ठ प्रतिनिधि उपस्थित किसी भी प्रतिनिधि ने वोटर लिस्ट या प्रक्रिया पर आपत्ति नहीं की।

आगे क्या? | असर

  • चुनाव प्रक्रिया की तारीख तय होगी
  • अध्यक्ष पद का वैधानिक समाधान निकलेगा
  • समाज की एकता या टकराव-अब संविधान तय करेगा

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निष्कर्ष

दिगम्बर जैन समाज में चल रहा यह विवाद अब स्पष्ट हो चुका है यह लड़ाई किसी नाम की नहीं, संविधान की गरिमा की है। AGM में मिले जनादेश ने साफ कर दिया है कि समाज अब केवल नियमों के रास्ते चलेगा।

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