एक FIR, कई सवाल: इंदौर में घिरे शेंडगे-दिघे-मनीष के नाम महेश्वर के जमीन विवाद में भी सामने आए
Ravi Kant Dixit | Jun 08, 2026, 20:44 IST
Photograph: (THESOOTR)
BHOPAL. इंदौर में दर्ज एफआईआर में विधायक प्रतिनिधि वीरेंद्र शेंडगे समेत सात लोगों के नाम सामने आए हैं। इसी बीच महेश्वर से भाजपा युवा मोर्चा के मंडल महामंत्री आशीष केवट खुलकर मैदान में आ गए हैं।
इंदौर विधानसभा क्षेत्र क्रमांक-4 में शुरू हुआ मामला अब भाजपा और संघ के टकराव से आगे बढ़कर विधायक के करीबियों की कथित दबंगई तक पहुंच गया है। संघ पदाधिकारी से हुए विवाद में जो एफआईआर दर्ज हुई है, उसने पहले ही विधायक मालिनी गौड़ के करीबियों को कठघरे में खड़ा कर दिया है।
अब महेश्वर से भाजपा के ही एक पदाधिकारी ने आरोप लगाया है कि विधायक के रिश्तेदार और करीबी रसूख के दम पर उन्हें धमका रहे हैं। जमीन पर कब्जे का दबाव बनाया जा रहा है। विरोध करने पर झूठे मामलों में फंसाने की कोशिश हो रही है।
इंदौर में दर्ज एफआईआर में विधायक प्रतिनिधि वीरेंद्र शेंडगे समेत सात लोगों के नाम सामने आए हैं। इसी बीच महेश्वर से भाजपा युवा मोर्चा के मंडल महामंत्री आशीष केवट खुलकर मैदान में आ गए हैं।
केवट का आरोप है कि विधायक मालिनी गौड़ के रिश्तेदारों और नजदीकी लोगों का प्रभावशाली नेटवर्क लंबे समय से उनके परिवार पर दबाव बना रहा है। उन्होंने सीधे तौर पर विधायक के भांजे और इंदौर में पदस्थ नायब तहसीलदार योगेंद्र सिंह राठौर उर्फ कृष्णा के प्रभाव का जिक्र करते हुए कहा कि उनके पुश्तैनी प्लॉट पर कब्जा करने की लगातार कोशिशें की जा रही हैं।
केवट का दावा है कि विवादित जमीन पूरी तरह उनके परिवार के नाम पर दर्ज है। राजस्व रिकॉर्ड उनके पक्ष में हैं और एसडीएम से लेकर तहसील न्यायालय तक के फैसले भी उनके हक में आ चुके हैं। इसके बावजूद संपत्ति छोड़ने का दबाव बनाया जाता रहा और लगातार धमकियां दी जाती रहीं।
मामले का सबसे गंभीर पहलू यह है कि इंदौर की हालिया एफआईआर में जिन लोगों के नाम सामने आए हैं, उन्हीं में शामिल शानू उर्फ सौरभ दिघे, वीरेंद्र शेंडगे और मनीष समेत करीब 25 लोगों का एक ग्रुप महेश्वर स्थित उनके प्लॉट पर भी पहुंचा था।
आशीष केवट का आरोप है कि उस दौरान उनकी मां को धमकाया गया। उनके साथ अभद्रता की गई और हथियार दिखाकर डराने की कोशिश की गई। उन्होंने दावा किया है कि इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी है, जिसमें संबंधित लोग दिखाई दे रहे हैं।
![fir maheshwar land]()
आशीष केवट का आरोप है कि जब उन्होंने कानूनी लड़ाई लड़ी और हर स्तर पर अपने पक्ष में फैसले हासिल किए, तब उन्हें झूठे मामलों में फंसाने की कोशिश शुरू हो गई है। उनका कहना है कि राजनीतिक संरक्षण के चलते कुछ लोग खुद को कानून से ऊपर समझने लगे हैं।
यहीं से सबसे बड़ा राजनीतिक सवाल भी खड़ा होता है। यदि भाजपा का ही पदाधिकारी सार्वजनिक रूप से अपनी सुरक्षा को लेकर गुहार लगा रहा है और विधायक समर्थकों पर गंभीर आरोप लगा रहा है तो आम नागरिक की स्थिति क्या होगी?
इंदौर में संघ पदाधिकारी विवाद की एफआईआर और महेश्वर से सामने आए आरोपों को एक साथ जोड़कर देखा जाए तो तस्वीर सिर्फ एक स्थानीय विवाद की नहीं, बल्कि सत्ता, संरक्षण, प्रभाव और कथित दबंगई के आरोपों की बनती दिखाई देती है।
![NAYAB TEHSILDAR]()
आरोपों पर नायब तहसीलदार योगेंद्र सिंह राठौर ने अपना पक्ष भी रखा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2019 में उन्होंने यह जमीन खरीदी थी और उसका पूरा भुगतान कर दिया था। उनके अनुसार बाद में केवट परिवार की नीयत बदल गई और उन्होंने सौदा रद्द कर दिया।
योगेंद्र सिंह ने ऐसे दस्तावेज भी साझा किए हैं, जिनमें जमीन के एवज में केवट परिवार को भुगतान किए जाने का उल्लेख है। दूसरी ओर आशीष केवट इस दावे को पूरी तरह खारिज करते हैं। उनका कहना है कि तीन महीने के भीतर पूरा भुगतान करने की बात हुई थी, लेकिन तय राशि कभी नहीं दी गई।
सवाल: महेश्वर की जमीन को लेकर आप पर गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं, मामला क्या है?
जवाब: हमने 2019-20 में जमीन खरीदी थी। इसमें पांच हिस्सेदार थे। दो लोगों ने रजिस्ट्री कर दी, लेकिन तीन लोग एक करोड़ रुपए से ज्यादा की राशि लेने के बाद भी रजिस्ट्री नहीं कर रहे हैं। उनकी नीयत बदल गई।
सवाल: आशीष केवट और उनका परिवार दावा कर रहा है कि वे तहसीलदार कोर्ट में जीत चुके हैं?
जवाब: ऐसा नहीं है। धोखाधड़ी की गई है। बलराम, आशीष और मुकेश के खिलाफ इस मामले में एफआईआर भी दर्ज हुई है।
सवाल: आरोप है कि 15 दिन पहले आपके लोग महेश्वर पहुंचे और केवट परिवार को धमकाया?
जवाब: शानू दिघे हमारे वकील हैं। वे महेश्वर गए थे। प्लॉट पर हमारा एक कमरा बना हुआ है। केवट परिवार ने वहां फेंसिंग कर दी थी। वीरेंद्र शेंडगे वहां नहीं गए थे।
सवाल: फिर शानू दिघे के खिलाफ महेश्वर में एफआईआर क्यों दर्ज हुई?
जवाब: केवट परिवार ने गांव के लोगों के साथ मिलकर दबाव बनाया और एफआईआर दर्ज करा दी।
सवाल: आप कह रहे हैं कि 2019 में जमीन ली थी, 2026 तक सात साल में कब्जा क्यों नहीं ले पाए?
जवाब: मुकेश केवट के नाम पर पूरी वसीयत है, वे करीब छह महीने मेरे यहां रहकर गए। हमारा पर उन विश्वास जम गया था। आशीष को भी मै भतीजा मानने लगा था, अब इनकी नीयत तो 2024 में खराब हो गई।
गौरतलब है कि योगेंद्र सिंह राठौर वर्तमान में इंदौर में नायब तहसीलदार के पद पर पदस्थ हैं। इंदौर के अन्नपूर्णा (उषानगर) में उनका बड़ा मकान भी चर्चा का विषय रहा है। क्षेत्र में यह एकमात्र बड़ी इमारत है। इसके नक्शे की स्वीकृति को लेकर भी समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं।
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अब महेश्वर से भाजपा के ही एक पदाधिकारी ने आरोप लगाया है कि विधायक के रिश्तेदार और करीबी रसूख के दम पर उन्हें धमका रहे हैं। जमीन पर कब्जे का दबाव बनाया जा रहा है। विरोध करने पर झूठे मामलों में फंसाने की कोशिश हो रही है।
ऐसे समझें पूरा केस
केवट का आरोप है कि विधायक मालिनी गौड़ के रिश्तेदारों और नजदीकी लोगों का प्रभावशाली नेटवर्क लंबे समय से उनके परिवार पर दबाव बना रहा है। उन्होंने सीधे तौर पर विधायक के भांजे और इंदौर में पदस्थ नायब तहसीलदार योगेंद्र सिंह राठौर उर्फ कृष्णा के प्रभाव का जिक्र करते हुए कहा कि उनके पुश्तैनी प्लॉट पर कब्जा करने की लगातार कोशिशें की जा रही हैं।
केवट का दावा है कि विवादित जमीन पूरी तरह उनके परिवार के नाम पर दर्ज है। राजस्व रिकॉर्ड उनके पक्ष में हैं और एसडीएम से लेकर तहसील न्यायालय तक के फैसले भी उनके हक में आ चुके हैं। इसके बावजूद संपत्ति छोड़ने का दबाव बनाया जाता रहा और लगातार धमकियां दी जाती रहीं।
25 लोग पहुंचे थे महेश्वर
आशीष केवट का आरोप है कि उस दौरान उनकी मां को धमकाया गया। उनके साथ अभद्रता की गई और हथियार दिखाकर डराने की कोशिश की गई। उन्होंने दावा किया है कि इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी है, जिसमें संबंधित लोग दिखाई दे रहे हैं।
fir maheshwar land
आशीष केवट का आरोप है कि जब उन्होंने कानूनी लड़ाई लड़ी और हर स्तर पर अपने पक्ष में फैसले हासिल किए, तब उन्हें झूठे मामलों में फंसाने की कोशिश शुरू हो गई है। उनका कहना है कि राजनीतिक संरक्षण के चलते कुछ लोग खुद को कानून से ऊपर समझने लगे हैं।
यहीं से सबसे बड़ा राजनीतिक सवाल भी खड़ा होता है। यदि भाजपा का ही पदाधिकारी सार्वजनिक रूप से अपनी सुरक्षा को लेकर गुहार लगा रहा है और विधायक समर्थकों पर गंभीर आरोप लगा रहा है तो आम नागरिक की स्थिति क्या होगी?
इंदौर में संघ पदाधिकारी विवाद की एफआईआर और महेश्वर से सामने आए आरोपों को एक साथ जोड़कर देखा जाए तो तस्वीर सिर्फ एक स्थानीय विवाद की नहीं, बल्कि सत्ता, संरक्षण, प्रभाव और कथित दबंगई के आरोपों की बनती दिखाई देती है।
नायब तहसीलदार ने रखा अपना पक्ष
NAYAB TEHSILDAR
आरोपों पर नायब तहसीलदार योगेंद्र सिंह राठौर ने अपना पक्ष भी रखा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2019 में उन्होंने यह जमीन खरीदी थी और उसका पूरा भुगतान कर दिया था। उनके अनुसार बाद में केवट परिवार की नीयत बदल गई और उन्होंने सौदा रद्द कर दिया।
योगेंद्र सिंह ने ऐसे दस्तावेज भी साझा किए हैं, जिनमें जमीन के एवज में केवट परिवार को भुगतान किए जाने का उल्लेख है। दूसरी ओर आशीष केवट इस दावे को पूरी तरह खारिज करते हैं। उनका कहना है कि तीन महीने के भीतर पूरा भुगतान करने की बात हुई थी, लेकिन तय राशि कभी नहीं दी गई।
नायब तहसीलदार योगेंद्र सिंह का पक्ष
जवाब: हमने 2019-20 में जमीन खरीदी थी। इसमें पांच हिस्सेदार थे। दो लोगों ने रजिस्ट्री कर दी, लेकिन तीन लोग एक करोड़ रुपए से ज्यादा की राशि लेने के बाद भी रजिस्ट्री नहीं कर रहे हैं। उनकी नीयत बदल गई।
सवाल: आशीष केवट और उनका परिवार दावा कर रहा है कि वे तहसीलदार कोर्ट में जीत चुके हैं?
जवाब: ऐसा नहीं है। धोखाधड़ी की गई है। बलराम, आशीष और मुकेश के खिलाफ इस मामले में एफआईआर भी दर्ज हुई है।
सवाल: आरोप है कि 15 दिन पहले आपके लोग महेश्वर पहुंचे और केवट परिवार को धमकाया?
जवाब: शानू दिघे हमारे वकील हैं। वे महेश्वर गए थे। प्लॉट पर हमारा एक कमरा बना हुआ है। केवट परिवार ने वहां फेंसिंग कर दी थी। वीरेंद्र शेंडगे वहां नहीं गए थे।
सवाल: फिर शानू दिघे के खिलाफ महेश्वर में एफआईआर क्यों दर्ज हुई?
जवाब: केवट परिवार ने गांव के लोगों के साथ मिलकर दबाव बनाया और एफआईआर दर्ज करा दी।
सवाल: आप कह रहे हैं कि 2019 में जमीन ली थी, 2026 तक सात साल में कब्जा क्यों नहीं ले पाए?
जवाब: मुकेश केवट के नाम पर पूरी वसीयत है, वे करीब छह महीने मेरे यहां रहकर गए। हमारा पर उन विश्वास जम गया था। आशीष को भी मै भतीजा मानने लगा था, अब इनकी नीयत तो 2024 में खराब हो गई।
क्षेत्र में सबसे बड़ा मकान राठौर का
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