इंदौर गैस लाइन ब्लास्ट केस में हाईकोर्ट में पेश हुए एसडीएम धनगर, मांगी माफी
Sanjay Gupta | Aug 07, 2026, 12:04 IST
indore gas line blast hc action
इंदौर के विजयनगर में 23 जून को अवंतिका गैस लाइन में हुए विस्फोट केस में शुक्रवार को एसडीएम घनश्याम धनगर हाईकोर्ट में पेश हुए। मामला हाईकोर्ट में पीड़ित के उपचार राशि देने में झूठा शपथपत्र पेश करने का था।
इंदौर के विजयनगर इलाके के वार्ड 31 में गैस लाइन के ऊपर बोरिंग करने की कोशिश के दौरान विस्फोट हो गया था। इस हादसे में चार लोग झुलस गए थे। मामले में अधिवक्ता रितेश इनानी ने एमपी हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में जनहित याचिका लगाई थी। इसमें सभी घायलों का मुफ्त इलाज कराने की मांग की गई थी।
हादसे में गंभीर रूप से घायल झिनी झाला को इलाज के लिए अहमदाबाद के जायडस अस्पताल भेजा गया था। उनके इलाज का खर्च 15 लाख रुपए से ज्यादा हो चुका है। इसके बावजूद शासन की ओर से कोई भुगतान नहीं किया गया। इसके उलट एसडीएम घनश्याम धनगर ने हाईकोर्ट में शपथपत्र देकर बताया कि इलाज का भुगतान हो चुका है।
गुरुवार की सुनवाई में जब इस बात का खुलासा हुआ तो हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई और एसडीएम को तलब कर लिया। शुक्रवार को हुई सुनवाई में एसडीएम घनश्याम धनगर हाईकोर्ट में पेश हुए।
एसडीएम धनगर के पेश होते ही हाईकोर्ट की जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और जस्टिस आलोक अवस्थी की बेंच ने उनसे पूछा कि ऐसा शपथपत्र क्यों दिया गया। जब भुगतान हुआ ही नहीं था तो शपथपत्र में भुगतान होने की बात कैसे लिख दी गई।?
इस पर एसडीएम ने सफाई देते हुए कहा कि यह गलती से हो गया। भुगतान किया जा रहा है, यह लिखना था, लेकिन गलती से भुगतान हो चुका है, ऐसा लिख दिया गया। उन्होंने बताया कि अभी तक पीड़ित से इलाज के लिए कोई राशि नहीं ली गई है और वे संशोधित शपथपत्र पेश कर रहे हैं।
इसके बाद हाईकोर्ट ने सख्त निर्देश दिए कि सात दिन के अंदर पीड़ित के इलाज की राशि का भुगतान किया जाए।
इसी दौरान याचिकाकर्ता रितेश इनानी के अधिवक्ता ने सवाल उठाया कि इलाज की राशि का भुगतान आखिर कौन करेगा, यह अभी तक तय नहीं है। शासन, नगर निगम और दूसरे विभागों के बीच अभी सिर्फ पत्राचार ही चल रहा है।
इस बात पर हाईकोर्ट भी हैरान रह गया। कोर्ट ने सख्त निर्देश दिए कि सात दिन के अंदर भुगतान किया जाए। इस पर सरकारी अधिवक्ता ने भरोसा दिलाया कि हाईकोर्ट के आदेश (इंदौर हाईकोर्ट आदेश) का पूरी तरह पालन किया जाएगा।
हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने बताया कि जायडस अस्पताल की ओर से इलाज के भुगतान को लेकर लगातार पत्र भेजे जा रहे हैं। इसके बावजूद सुनवाई तक 15 लाख रुपए की राशि में से एक रुपए का भी भुगतान नहीं किया गया था।
इसके बाद भी एसडीएम जूनी इंदौर घनश्याम धनगर ने हाईकोर्ट में शपथपत्र पेश कर दिया कि इलाज की राशि का भुगतान किया जा चुका है। इसी बात को लेकर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई थी।
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शपथपत्र के बिंदु 4 में एसडीएम ने लिखा है कि हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार झिनी झाला के इलाज की पूरी व्यवस्था कर दी गई है। अस्पताल का शुल्क भी चुका दिया गया है।
इसके अलावा मरीज या उसके परिवार की ओर से इलाज पर किए गए खर्च की जांच के बाद उसकी राशि वापस कर दी गई है। शपथपत्र में यह भी कहा गया है कि अगर इसके अलावा कोई और भुगतान बाकी है तो दस्तावेज पेश करने पर उसकी राशि भी चुका दी जाएगी।
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उधर, इस मामले में एमपी हाईकोर्ट (Indore News) की सख्ती और आदेश के बाद वार्ड 31 के बीजेपी पार्षद बालमुकुंद सोनी पर भी केस दर्ज किया गया था। द सूत्र ने इस मामले की पूरी इनसाइड स्टोरी पहले ही सामने रखी थी। निगम की रिपोर्ट में सोनी को दोषी बताया गया है।
हालांकि, इंदौर हाईकोर्ट में बताया गया कि सोनी लगातार नगर निगम इंदौर के इंजीनियरों और अधिकारियों पर आरोप लगा रहे हैं कि इस घटना के लिए वे जिम्मेदार हैं। इस पर हाईकोर्ट ने सोनी से भी जवाब मांगा है। उनके अधिवक्ता ने जवाब दाखिल करने के लिए कोर्ट से समय मांगा है। माना जा रहा है कि अगली सुनवाई में पार्षद निगम के अधिकारियों को घेरेंगे।
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हादसे में गंभीर रूप से घायल झिनी झाला को इलाज के लिए अहमदाबाद के जायडस अस्पताल भेजा गया था। उनके इलाज का खर्च 15 लाख रुपए से ज्यादा हो चुका है। इसके बावजूद शासन की ओर से कोई भुगतान नहीं किया गया। इसके उलट एसडीएम घनश्याम धनगर ने हाईकोर्ट में शपथपत्र देकर बताया कि इलाज का भुगतान हो चुका है।
गुरुवार की सुनवाई में जब इस बात का खुलासा हुआ तो हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई और एसडीएम को तलब कर लिया। शुक्रवार को हुई सुनवाई में एसडीएम घनश्याम धनगर हाईकोर्ट में पेश हुए।
एसडीएम बोले गलती से लिखा गया
इस पर एसडीएम ने सफाई देते हुए कहा कि यह गलती से हो गया। भुगतान किया जा रहा है, यह लिखना था, लेकिन गलती से भुगतान हो चुका है, ऐसा लिख दिया गया। उन्होंने बताया कि अभी तक पीड़ित से इलाज के लिए कोई राशि नहीं ली गई है और वे संशोधित शपथपत्र पेश कर रहे हैं।
इसके बाद हाईकोर्ट ने सख्त निर्देश दिए कि सात दिन के अंदर पीड़ित के इलाज की राशि का भुगतान किया जाए।
लेकिन भुगतान करेगा कौन
इस बात पर हाईकोर्ट भी हैरान रह गया। कोर्ट ने सख्त निर्देश दिए कि सात दिन के अंदर भुगतान किया जाए। इस पर सरकारी अधिवक्ता ने भरोसा दिलाया कि हाईकोर्ट के आदेश (इंदौर हाईकोर्ट आदेश) का पूरी तरह पालन किया जाएगा।
एसडीएम धनगर का यह था झूठा शपथपत्र
इसके बाद भी एसडीएम जूनी इंदौर घनश्याम धनगर ने हाईकोर्ट में शपथपत्र पेश कर दिया कि इलाज की राशि का भुगतान किया जा चुका है। इसी बात को लेकर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई थी।
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शपथपत्र में यह लिखा था
इसके अलावा मरीज या उसके परिवार की ओर से इलाज पर किए गए खर्च की जांच के बाद उसकी राशि वापस कर दी गई है। शपथपत्र में यह भी कहा गया है कि अगर इसके अलावा कोई और भुगतान बाकी है तो दस्तावेज पेश करने पर उसकी राशि भी चुका दी जाएगी।
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उधर पार्षद ने निगम के इंजीनियरों को घेरा
हालांकि, इंदौर हाईकोर्ट में बताया गया कि सोनी लगातार नगर निगम इंदौर के इंजीनियरों और अधिकारियों पर आरोप लगा रहे हैं कि इस घटना के लिए वे जिम्मेदार हैं। इस पर हाईकोर्ट ने सोनी से भी जवाब मांगा है। उनके अधिवक्ता ने जवाब दाखिल करने के लिए कोर्ट से समय मांगा है। माना जा रहा है कि अगली सुनवाई में पार्षद निगम के अधिकारियों को घेरेंगे।
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