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News in Short
- इंदौर हाईकोर्ट ने बीआरटीएस रिमूवल पर नाराजगी जताई।
- कलेक्टर और निगमायुक्त को 11 मार्च को कोर्ट में हाजिर होने का आदेश।
- नगर निगम ने 8 एजेंसियों को वर्क आर्डर दिए थे, लेकिन काम धीमा है।
- हाईकोर्ट ने सख्त मॉनीटरिंग का निर्देश दिया।
- एलिवेटेड कॉरिडोर पर भी हाईकोर्ट ने नोटिस जारी किया।
News in Detail
इंदौर हाईकोर्ट में बुधवार 25 फरवरी को एक बार फिर बीआरटीएस रिमूवल और ट्रैफिक जनहित याचिकाओं पर सुनवाई हुई। इसमें फिर बेंच ने हैरानी जताई कि भोपाल में एकदम से रैलिंग हट गई लेकिन इंदौर में क्या हो रहा है। नगर निगम के पास इतना स्टाफ है, इसके बाद भी मामला लटक रहा है। इंदौर हाईकोर्ट ने सख्त मॉनीटरिंग का निर्देश दिया। कलेक्टर इंदौर और निगमायुक्त को 11 मार्च को कोर्ट में उपस्थित होने के लिए कहा है।
इस बात पर नाराज हुआ हाईकोर्ट
नगर निगम की तरफ से कहा गया कि बस स्टैंड रिमूव करने, रैलिंग हटाने के लिए टेंडर कर दिए हैं। इसके लिए 8 एजेंसी को वर्क आर्डर 20 फरवरी को जारी कर दिया है। अप्रैल अंत तक सब काम हो जाएगा। इसलिए इसमें अगली तारीख अप्रैल के पहले सप्ताह में कर दिया जाए, हम रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे।
इस पर हाईकोर्ट जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी ने नाराजगी जताई। जस्टिस ने कहा कि इतना स्टाफ होने के बाद भी निगम अभी तक काम नहीं दिखा पाया है। कॉरिडोर के 17 बस स्टैंड में से केवल 3 हटाने का काम हुआ है।
आठ एजेंसी के बाद भी काम में इतना समय लग रहा है। वरिष्ठ अधिवक्ता अजय बागड़िया ने कड़ी आपत्ति लेते हुए कहा कि 15 फरवरी से काम शुरू करने की बात हाईकोर्ट में कही गई थी और वर्क आर्डर 20 फरवरी को कर रहे हैं। निगम इस तरह से काम कर रहा है। इसकी मानीटरिंग जरूरी है।
मानीटरिंग जरूरी है, अधिकारी उपस्थित हो
बेंच ने कहा कि इतना लंबा समय निगम को नहीं दे सकते हैं। आप अपनी प्रोग्रेस रिपोर्ट दस दिन में दें। इसी के साथ हाईकोर्ट द्वारा नियुक्त कमेटी भी अपनी रिपोर्ट दस दिन में सभी पक्षकारों को उपलब्ध कराएगा। अगली सुनवाई 11 मार्च को रखते हैं। इस दिन इंदौर कलेक्टर, निगमायुक्त उपस्थित हो। वहीं अन्य ट्रैफिक समस्या को लेकर ट्रैफिक डीसीपी और टीआई भंवरकुआं को भी पेश होने के आदेश दिए गए हैं।
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एलिवेटेड कॉरिडोर पर भी हुई बात
इंजीनियर अतुल सेठ की याचिका पर भी सुनवाई हुई। याचिका बीआरटीएस कॉरिडोर पर 6 किमी लंबे एलिवेटेड कॉरिडोर को लेकर थी। अधिवक्ता अभिनव धनोतकर ने इसे जनता के पैसे का नुकसान बताया। सर्वे में इसकी उपयोगिता न होने का दावा किया गया। हाईकोर्ट बेंच ने सभी पक्षकारों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा। अगली सुनवाई 11 मार्च को होगी।
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