कर्बला जमीन किराए पर ली, कमेटी ने भी मान लिया नगर निगम का स्वामित्व, महापौर का मास्टर स्ट्रोक

Sanjay Gupta | Jul 03, 2025, 14:27 IST
Share
indore-Karbala-Maidan-
indore-Karbala-Maidan-

कर्बला जमीन पर मेले की मंजूरी को लेकर विवाद समाप्त हो गया है। नगर निगम ने हिंदूवादी संगठनों की मांग मानते हुए इसका नाम कर्बला से बदलकर धोबीघाट मैदान कर दिया।

कर्बला जमीन (जिसे हिंदूवादी संगठन हिंदू चौक धोबी घाट बोल रहे हैं) पर मेले की मंजूरी को लेकर उपजा विवाद फिलहाल थम गया है। हिंदूवादी संगठनों की मांग नगर निगम ने मान ली है। अब इस जगह का नाम कर्बला की बजाय धोबीघाट मैदान किया गया है। नए मंजूरी पत्र में इस जगह को धोबीघाट कहा गया है। वहीं इस जमीन को किराए पर देने के साथ ही यह महापौर पुष्यमित्र भार्गव और नगर निगम ने मास्टर स्ट्रोक मार दिया है।

de064c50-9c0
de064c50-9c0


क्यों कहा जा रहा है इसे मास्टर स्ट्रोक

इस जमीन को बीते साल 14 सितंबर 2024 में ही निगम ने जिला कोर्ट में कानूनी तौर पर स्वामित्व आदेश पाया है। जमीन को लेकर लंबे समय से लड़ाई हो रही थी।

इसके बाद निगम ने महापौर के साथ जाकर 18 सितंबर को जमीन पर कब्जा भी ले लिया और बोर्ड लगा दिया। लेकिन जमीन को लेकर अभी भी आगे कानूनी लड़ाई जारी है। लेकिन इस जमीन पर कमेटी ने जिस तरह से मेले के लिए मंजूरी ली, किराया राशि जमा की और पत्र में जो शर्तें व अन्य बातें लिखी गई हैं वह निगम को स्वामित्व को लेकर कानूनी तौर से मजबूत कर रही है।

e78d2b25-722
e78d2b25-722


कुल मिलाकर कमेटी ने निगम का स्वामित्व माना है और खुद ही किराया राशि भरकर मेले की मंजूरी ली है। आगे वाली कानूनी लड़ाई में यह पत्राचार और मंजूरी पत्र निगम को काफी मजबूत करेगा।

a2bcf571-4da
a2bcf571-4da


यह 18 सितंबर 2024 की फोटो जब महापौर और निगमायुक्त ने जमीन पर कब्जा लिया गया था...

खबर यह भी...इंदौर में हनुमान चौक धोबी घाट को कर्बला मैदान लिखा, नगर निगम से मिली अनुमति से भड़के हिंदूवादी

इन नौ शर्तों पर दिया, जीएसटी भी भरवाया

नगर निगम द्वारा कमेटी के मोहम्मद फारूक राईन व अन्य आवेदकों को यह मंजूरी दी गई है। हालांकि यह पूरी 6 एकड़ जमीन पर नहीं दी गई है। यह मंजूरी केवल 3 एकड़ जमीन पर दी गई है और इसके लिए 84 हजार 854 रुपए का कलेक्टर गाइडलाइन से किराया और साथ ही 18 फीसदी जीएसटी 15 हजार 274 रुपए इस तरह कुल 1 लाख 128 रुपए भरवाए गए हैं।

  • शर्त है कि जो भी निगम के अन्य कर होंगे वह भरना होंगे
  • मेला स्थल पर अस्थाई लगने वाली दुकान से नगर निगम पटरी शुल्क अलग से लेगा
  • आयोजन स्थल पर मेला कमेटी अन्य कोई वसूली नहीं करेगी
  • हाईकोर्ट के आदेशों का पालन किया जाएगा
  • धर्म, जाति को लेकर कोई टीका-टिप्पणी नहीं
  • अनुमति अनुसार ताजिए ठंडे करने का आयोजन समयावधि 6 से 8 जुलाई में ही होगा
  • अस्त्र-शस्त्र नहीं होंगे
  • सीसीटीवी लगाएंगे आयोजन स्थल पर
  • आयोजन में कोई अश्लीलता नहीं होगी।

यह है जमीन का पूरा विवाद

नगर निगम को कर्बला मैदान की 6.70 एकड़ जमीन पर कोर्ट से 14 सितंबर को अपने आदेश से स्वामित्व दिया गया। जिला कोर्ट ने पूर्व 2019 के आदेश को पलटते हुए इस जमीन को वक्फ की संपत्ति मानने से साफ इंकार करते हुए निगम का मालिकाना हक पाया और डिक्री करने के भी आदेश दिए।

कोर्ट ने कहा कि ताजिए ठंडे होने और मोर्हरम वहां होने भर से संपत्ति वक्फ की नहीं होती है। महापौर और निगमायुक्त दोनों ने मिलकर इस केस में मजबूती से पक्ष रखवाया था।

निगम ने कोर्ट में यह तथ्य रखे थे

जिला कोर्ट न्यायाधीश नरसिंह बघेल ने यह फैसला सुनाया था। इसमें नगर निगम याचिकाकर्ता था और प्रतिवादी पक्ष में कर्बला कमेटी और वक्फ बोर्ड था। इसमें निगम का कहना था कि यह जमीन नगर निगम एक्ट 1956 की धारा 82 के तहत हमारी है क्योंकि पूर्व के 1909 एक्ट और बाद में बने एक्ट में भी प्रावधान है कि निगम क्षेत्र की सभी खुली जमीन जो शासन के या किसी व्यक्ति के नाम नहीं वह निगम की होती है। वहीं निगम के रिकार्ड में सर्वे नंबर 17017 में निगम की बंजर जमीन के रूप में और राजस्व रिकार्ड के सर्वे नंबर 1041 में यह जमीन चरनोई के रूप में दर्ज है। निगम ने ही यहां पर धोबी घाट बनवाया है, जिसका वर किराया लेता है और साथ ही यहां पर कर्बला मैदान के लिए साल में तीन दिन की मंजूरी भी निगम द्वारा दी जाती है। यहां पर 1979 से कब्जे का प्रयास हो रहा है। कर्बला कमेटी को केवल 0.02 एकड़ जमीन पर ताजिए ठंडे करने के लिए जमीन दी गई।

खबर यह भी...इंदौर में कर्बला मैदान पर मेला आयोजन पर महापौर की हिदायत, उधर हिंदू संगठन ने रखी महाआरती

वक्फ कमेटी और कर्बला कमेटी का यह दावा था

कमेटी का कहना था कि यह संपत्ति 1984 में वक्फ की घोषित हो गई थी, गजट नोटिफिकेशन भी हो गया था। यहां 150 साल से कर्बला मैदान पर मेला लगता है और ताजिए ठंडे किए जाते हैं। हलोक समय से यहां यह धार्मिक गतिविधि की जा रही है।

इस आधार पर कोर्ट ने निगम की मानी थी जमीन

  • वक्फ कमेटी के गजट नोटिफिकेशन पर 1991 में आपत्ति कोर्ट में लग चुकी है, तत्कालीन कलेक्टर के पास मामला आने पर तहसीलदार से आदेश भी जारी हुए। वक्फ का मुख्य अंश होता है दान दिया जाना, वह इस जमीन को लेकर नहीं है। महाराज ने किसी तरह का पट्टा, दानपत्र नहीं दिया था
  • निगम एक्ट की धारा 82 खुली जमीन निगम को देती है
  • केवल ताजिए ठंडे करने मोर्हरम के लिए जमीन मिलने से जमीन वक्फ की नहीं हो जाती है।

thesootr links

दसूत्र की खबरें आपको कैसी लगती हैं? Google my Business पर हमें कमेंट केसाथ रिव्यू दें। कमेंट करने के लिए इसी लिंक पर क्लिक करें

अगर आपको ये खबर अच्छी लगी हो तो 👉 दूसरे ग्रुप्स, 🤝दोस्तों, परिवारजनों के साथ शेयर करें📢🔃

🤝💬👩‍👦👨‍👩‍👧‍👧

कर्बला मैदान जमीन विवाद | Indore News | indore news hindi | Mp latest news | MP वक्फ बोर्ड | नगर निगम इंदौर | इंदौर महापौर पुष्यमित्र भार्गव

Tags:
  • Indore News
  • इंदौर महापौर पुष्यमित्र भार्गव
  • मध्य प्रदेश
  • MP वक्फ बोर्ड
  • Mp latest news
  • indore news hindi
  • नगर निगम इंदौर
  • कर्बला मैदान जमीन विवाद
गूगल पर द सूत्र चुनें ! Add as a preferredsource on Google
MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग

By Atul Dwivedi

MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग
एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री

By Ramanand Tiwari

एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा

By Ramanand Tiwari

मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन

By Jitendra Shrivastava

मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें

By Sanjay Dhiman

mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे

By Sanjay Gupta

झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा

By Arun Tiwari

बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा