एमपी फ्लाइंग क्लब को 12 साल पुराने प्लेन क्रैश में झटका, एक पायलट की हुई थी मौत
Sanjay Gupta | Feb 21, 2026, 13:37 IST
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इंदौर के एमपी फ्लाइंग क्लब को एक 12 साल पुराने ट्रेनी प्लेन क्रैश में बड़ा झटका लगा है। विमान हादसे में पायलट की मौत हो गई थी। हाईकोर्ट ने मुआवजे के मामले में नया आदेश दिया है।
INDORE. इंदौर के एमपी फ्लाइंग क्लब को 12 साल पुराने ट्रेनी प्लेन क्रैश दुर्घटना में झटका लगा है। इस क्लब के चीफ इंस्ट्रक्टर पूर्व स्पीकर सुमित्रा महाजन के बेटे मंदार महाजन हैं।
नवंबर 2014 में हुई इस घटना में एक पायलट की मौत हो गई थी। साथ ही, इंस्ट्रक्टर गंभीर रूप से घायल हुए थे। इस मामले में छह साल से चल रहे मुआवजे केस में हाईकोर्ट इंदौर खंडपीठ ने आदेश दे दिया है।
इंदौर में 19 नवंबर 2014 को एयरपोर्ट पर सुबह एमपी फ्लाइंग क्लब का एक विमान रनवे से उड़ान भरते ही मैदान में गिर गया था। विमान Cessna 152 फ्लाइट से ट्रेनिंग चल रही थी।
विमान में पायलट अरशद कुरैशी और इंस्ट्रक्टर पवनदीप सिंह सवार थे। यह गो एंड टच की ट्रेनिंग कर रहे थे। प्लेन क्रैश में पायलट कुरैशी की मौत हो गई थी और सिंह गंभीर रूप से घायल हुए थे।
इस मामले में कई अलग-अलग केस लगे हुए थे। इंश्योरेंस कंपनी ने मृत पायलट के परिजनों के खिलाफ केस किया था। वहीं एमपी फ्लाइंग क्लब ने भी परिजनों के खिलाफ केस दायर किया था। परिजनों ने एमपी फ्लाइंग क्लब पर केस किया था। साथ ही, इंस्ट्रक्टर सिंह का भी मुआवजे का केस था।
मुआवजे को लेकर मृत पायलट के परिजन और इंस्ट्रक्टर पवनदीप सिंह ने पहले लेबर कोर्ट इंदौर में केस लगाया था। यह केस उन्हें मिले केवल 10 लाख रुपए के मुआवजे के खिलाफ था।
लेबर कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद साल 2020 में आदेश दिया था। इसमें पायलट कुरैशी के परिवार को 21 लाख 17 हजार मुआवजे का और इंस्ट्रक्टर पवनदीप सिंह को 39 लाख रुपए का मुआवजा तय हुआ था।
इस आदेश के खिलाफ एमपी फ्लाइंग क्लब, इंश्योरेंस कंपनी और मृत पायलट के परिजन और इंस्ट्रक्टर सभी की याचिकाएं लगी थीं। इसमें हाईकोर्ट ने मृत पायलट के मामले में इंश्योरेंस कंपनी की दलील मान्य की है।
इसमें पॉलिसी के तहत केवल 10 लाख मुआवजे का प्रावधान था। परिजनों के अधिवक्ता अभिषेक गिलके ने बताया कि हाईकोर्ट के फैसले के तहत लेबर कोर्ट से हुए आदेश के मान्य कुल मुआवजा 21 लाख 17 हजार देय है।
इसमें 10 लाख इंश्योरेंस कंपनी दे चुकी है और बाकी 11 लाख 17 हजार रुपए फ्लाइंग क्लब को देना होंगे। वह भी 12 प्रतिशत अतिरिक्त ब्याज के साथ। यह राशि इंश्योरेंस कंपनी वहन नहीं करेगी।
वहीं इंस्ट्रक्टर पवनदीप सिंह के मुआवजे में पेंच आ गया है। इसमें यह दलील दी गई कि इंस्ट्रक्टर पवनदीप सिंह को तो विमान में बैठने की इजाजत ही नहीं थी। वह नियमों को ताक पर रखते हुए विमान में बैठे थे।
इसके लिए डीजीसीए के नियम आदि की जानकारी पेश की गई है। नए तर्कों को देखते हुए हाईकोर्ट ने इस मामले में केस एक बार फिर लेबर कोर्ट में रिमांड किया है।
हाईकोर्ट ने कहा कि इन नियमों के संदर्भ में इंस्ट्रक्टर पवनदीप सिंह के मुआवजे के मामले को फिर से लेबर कोर्ट में सुना जाए। साथ ही, नए सिरे से आदेश जारी किया जाए। यानी अभी उनका मुआवजा केस अटक गया है।
इसमें परिजनों का कहना था कि उनके बेटे का वेतन 20 हजार रुपए प्रति माह था। वहीं, क्लब ने मुआवजा केवल 8 हजार रुपए वेतन के हिसाब से गणना कर दिए हैं। इस पर लेबर कोर्ट ने साल 2020 में 21 लाख 17 हजार 900 रुपए देने का आदेश दिया है।
इसमें दस लाख रुपए दिए जा चुके थे। बाकी बची राशि 11 लाख 77 हजार 900 रुपए सालाना 12 प्रतिशत की ब्याज दर के साथ देने का आदेश हुआ है। इस पर इंश्योरेंस कंपनी और एमपी फ्लाइंग क्लब दोनों ही हाईकोर्ट गए थे।
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नवंबर 2014 में हुई इस घटना में एक पायलट की मौत हो गई थी। साथ ही, इंस्ट्रक्टर गंभीर रूप से घायल हुए थे। इस मामले में छह साल से चल रहे मुआवजे केस में हाईकोर्ट इंदौर खंडपीठ ने आदेश दे दिया है।
यह हुई थी घटना
विमान में पायलट अरशद कुरैशी और इंस्ट्रक्टर पवनदीप सिंह सवार थे। यह गो एंड टच की ट्रेनिंग कर रहे थे। प्लेन क्रैश में पायलट कुरैशी की मौत हो गई थी और सिंह गंभीर रूप से घायल हुए थे।
मुआवजे का यह लगा था केस
इसलिए लगे थे ये केस
लेबर कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद साल 2020 में आदेश दिया था। इसमें पायलट कुरैशी के परिवार को 21 लाख 17 हजार मुआवजे का और इंस्ट्रक्टर पवनदीप सिंह को 39 लाख रुपए का मुआवजा तय हुआ था।
इस आदेश के खिलाफ लगी हाईकोर्ट में याचिकाएं
इसमें पॉलिसी के तहत केवल 10 लाख मुआवजे का प्रावधान था। परिजनों के अधिवक्ता अभिषेक गिलके ने बताया कि हाईकोर्ट के फैसले के तहत लेबर कोर्ट से हुए आदेश के मान्य कुल मुआवजा 21 लाख 17 हजार देय है।
इसमें 10 लाख इंश्योरेंस कंपनी दे चुकी है और बाकी 11 लाख 17 हजार रुपए फ्लाइंग क्लब को देना होंगे। वह भी 12 प्रतिशत अतिरिक्त ब्याज के साथ। यह राशि इंश्योरेंस कंपनी वहन नहीं करेगी।
इंस्ट्रक्टर का केस फिर लेबर कोर्ट में
इसके लिए डीजीसीए के नियम आदि की जानकारी पेश की गई है। नए तर्कों को देखते हुए हाईकोर्ट ने इस मामले में केस एक बार फिर लेबर कोर्ट में रिमांड किया है।
हाईकोर्ट ने कहा कि इन नियमों के संदर्भ में इंस्ट्रक्टर पवनदीप सिंह के मुआवजे के मामले को फिर से लेबर कोर्ट में सुना जाए। साथ ही, नए सिरे से आदेश जारी किया जाए। यानी अभी उनका मुआवजा केस अटक गया है।
बाकी बची राशि ब्याज दर के साथ देनी होगी
इसमें दस लाख रुपए दिए जा चुके थे। बाकी बची राशि 11 लाख 77 हजार 900 रुपए सालाना 12 प्रतिशत की ब्याज दर के साथ देने का आदेश हुआ है। इस पर इंश्योरेंस कंपनी और एमपी फ्लाइंग क्लब दोनों ही हाईकोर्ट गए थे।
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