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Photograph: (thesootr)
News In Short
भूमाफिया प्रशासन को निशाना बना रहे हैं।
एसडीएम प्रदीप सोनी को उलझाने का षडयंत्र।
जूनी इंदौर में भूमाफिया के खिलाफ प्रशासन कार्रवाई कर रहा है।
तहसीलदार को शिकायतों के बाद हटाया गया।
ऑनलाइन नक्शे में सुधार के बाद सच्चाई सामने आई।
News In Detail
इंदौर में एक बार फिर से तेजी से भूमाफिया सक्रिय हो चुके हैं। वह जमीनों को अपने पक्ष में करने के लिए अब इंदौर कलेक्ट्रेट पर हमला कर रहे हैं। चार दिन पहले जूनी इंदौर तहसील की तहसीलदार के खिलाफ शिकायत करके कार्रवाई करवाई गई। अब इसी तहसील के एसडीएम प्रदीप सोनी को भी उलझाने का षडयंत्र सामने आया है।
एक साल पुराने केस में शिकायत
एसडीएम जूनी प्रदीप सोनी ने मार्च 2025 में एक ऑनलाइन नक्शा दुरुस्ती आवेदन स्वीकार किया था। अब इसी मामले में शिकवा शिकायतों का दौर चला है। कहा गया कि यह सर्वे नंबर तो सोसायटी की जमीन के थे और इसे बिल्डर लॉबी के नाम कर दिया गया है। जमीन करोड़ों कीमत की बताई गई।
शिकायत में कहा गया की तहसील के निपानिया की 274/5 सर्वे नंबर जो सीलिंग के तहत है इसे संशोधित कर 279/1/1/1/1 और 279/1/2/3 करके कैच रियलिटी डायरेक्टर संजय लड्डा के नाम पर चढ़ा दिया गया। जिस पर चंद्रलीला होटल बना हुआ है। शिकायत में कहा गया कि यह सर्वे नंबर तत्कालीन कलेक्टर मनीष सिंह द्वारा 4 नवंबर 2022 के निषेध सर्वे नंबर की सूची में शामिल है। जिसमें बिना सक्षम मंजूरी के कोई बदलाव नहीं हो सकता है।
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लेकिन सच ये है...
लेकिन द सूत्र के पास सारे दस्तावेज और जमीन के 100 साल पुराने रिकॉर्ड है। इसके अनुसार यह सर्वे नंबर कभी भी सीलिंग की जमीन में शामिल नहीं रहा है। मूल सर्वे नंबर 279 मिसल बंदोबस्त 1924 -25 के रिकॉर्ड से ही निजी भूमि रहा है।
ऑनलाइन नक्शे में इस सर्वे नंबर पर 274/5 शो हो रहा था जो गलत था। इसलिए रिकॉर्ड चेक करके और तहसीलदार निचले स्तर से रिपोर्ट लेकर ऑनलाइन नक्शे में सुधार किया गया। मार्च 2025 में आवेदन को स्वीकार करके इसमें ऑनलाइन नक्शे को संशोधित करके 279/1/1/1/1 और 279/1/2/3 करने के आदेश किय गए। ये सर्वे नंबर कभी भी सीलिंग की जमीन के रिकॉर्ड में और किसी समिति के नाम पर नहीं रहे।
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इसके पहले तहसीलदार को उलझाया
इसके पहले हरियाणा समिति में लगे सीमांकन के आवेदन को लेकर भी शिकायत हुई थी। जिसमें जूनी इंदौर की तहसीलदार पर कार्रवाई करते हुए हटाया गया था। लेकिन इसमें भी 'द सूत्र' ने खुलासा किया था। इसके सीमांकन का आवेदन तो खुद सहकारिता विभाग के अधिकारी ने लगाया था। संस्था के सदस्यों ने जमीन पर कब्जे होनेंकी शिकायत की थी।
संस्था के प्रशासक ने सीमांकन का आवेदन लगाया था। और इस संबंध में कलेक्टर को पत्र भी लिखा था कि उन्हें सुरक्षा दी जाए क्योंकि क्योंकि सीमांकन में विवाद हो सकते हैं। जमीन पर कई लोग कब्जे कर रहे हैं।
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जूनी तहसील ही क्यों निशाने पर
दरअसल जूनी तहसील में इंदौर का अधिकांश हिस्सा आता है। और इसी में अधिकतम समिति की जमीन भी आती है। तहसील में हाल के समय कई जमीनों को अधिकृत करने के आदेश प्रशासन से हुए हैं। इसमें तहसील के अधिकारियों की अहम भूमिका रही।
जैसे क्रिश्चियन कॉलेज की जमीन को सरकारी घोषित करने का मुद्दा ही, होप मिल का मामला, इसी तरह आदर्श गृह निर्माण समिति के संबंध में भी आदेश। जिससे भूमाफिया और जमीन की जादूगरों को लंबा झटका लगा है। ऐसे मे अब ये प्रशासन को ही घेरने में जुटे हुए हैं।
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