इंदौर नगर निगम के 150 करोड़ के फर्जी बिल घोटाले में आरोपी अभय राठौर, ठेकेदारों ने चली ये चाल
Sanjay Gupta | Jan 05, 2026, 16:12 IST
indore municipal corporation 150 crore fake bill scam
इंदौर नगर निगम में मार्च-अप्रैल 2024 में 150 करोड़ रुपए के फर्जी बिलों का घोटाला सामने आया था। इस मामले में फंसे आरोपियों ने अब एक नई चाल चली है। पूरा मामला जानने के लिए खबर आखिरी तक पढ़ें।
5 पॉइंट में समझें पूरा मामला....
आरोपियों में अभय राठौर के साथ ही जाकिर, राजकुमार साल्वी, जाहित खान, राजेंद्र शर्मा, मोहम्मद साजिद व अन्य ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। यह सभी आरोपी जिला कोर्ट न्यायाधीश विनोद कुमार शर्मा की कोर्ट में 30 अक्टूबर को इन सभी पर तय किए गए आरोपों के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचे हैं।
आरोपियों ने हाईकोर्ट में याचिकाएं लगाई है। इसमें जिला कोर्ट में तय किए गए आरोप पत्र और पुलिस में दर्ज कराई गई एफआईआर को ही चुनौती दी गई है। इसमें कहा गया है कि इस मामले में मूल फाइल और दस्तावेज है ही नहीं। केवल फोटोकॉपीके आधार पर ही इस मामले में झूठा केस दर्ज किया गया है।
फोटोकॉपी को साक्ष्य नहीं माना जा सकता है। जांच अधिकारी विजय सिंह सिसौदिया ने मूल दस्तावेज लिए ही नहीं। नगर निगम के जिन अधिकारियों को इन फाइलों पर हस्ताक्षर करने थे वह लिए बिना ही केस दर्ज किया।
मूल दस्तावेज और फाइल तो चोरी होने की बात कही गई है वह कहां है, मूल फाइल के कोई पते नहीं है। ऐसे में फोटोकॉपी को साक्ष्य मानकर आरोप तय नहीं हो सकते हैं।
यही आपत्ति आरोपियों द्वारा जिला कोर्ट में भी आरोप तय होते समय लगाई गई थी। जिला कोर्ट ने इसे खारिज करते हुए आरोपी जाकिर, राहुल बडेरा, उदयसिंह भदौरिया, चेतन भदौरिया, राजकुमार साल्वी, अभय सिंह राठौर, मुरलीधरन, अनिल गर्ग, रामेस्वलर परमार, राजेंद्र शर्मा व मोहम्मद जाहिद पर आरोप तय कर दिए।
जाकिर, किंग कंस्ट्रक्शन फर्म- ड्रेनेज वॉल जल विभाग में फर्जी साइन कर अवैध लाभ लिया।
राहुल बड़ेरा, जान्हवी फर्म- निगम के अधिकारी/कर्मचारियों के साथ मिलकर फर्जी दस्तावेज से लाभ लिया।
उदयासिंह, ड्रेनेज विभाग उपयंत्री- आरोपी फर्म के साथ मिलकर फर्जी बिलों का भुगतान किया।
चेतन भदौरिया, निगम में कम्प्यूटर आपरेटर- आरोपी चेनव उदयसिंह के साथ मिलकर अधिकारियों की आईडी-पासवर्ड लेकर फर्जी देयकों की लीगेसी तैयार की।
राजकुमार साल्वी, निगम में लेखापाल- फर्जी देयर के चेक तैयार कर भुगतान कराया।
अभय सिंह राठौर, कार्यपालन इंजीनियर निगम- ड्रेनेज विभाग में पदस्थ रहते ठेकेदारों के साथ मिलकर फर्जी कार्यादेश, फाइल तैयार कर लाभ लिया।
मुरलीधरन, निगम क्लर्क- बिल की फर्जी फाइलों को नंबर डालकर रजिस्टर किया।
अनिल गर्ग, आडिट निगम उप संचालक- अवैध लाभ के लिए फर्जी देयकों का आडिट किया। एक दिन में 5 किमी ड्रेनेज लाइन, 500 चेंबर निर्माण जैसी फाइल मंजूर की।
रामेशवर परमार- निगम सहायक संपरीक्षक- फर्जी आडिट किया, बिलों की जांच नहीं की।
राजेंद्र शर्मा, आरएस इंफ्रास्ट्रक्चर फर्म- फर्जी कार्यादेश व बिल तैयार कर अवैध लाभ लिया।
मोहम्मद जाहिद, डायमंड एसोसिएट फर्म- फर्जी कार्यादेश, बिल तैयार कर अवैध लाभ लिया।
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- इंदौर नगर निगम में मार्च-अप्रैल 2024 में 150 करोड़ का घोटाला सामने आया।
- जिला कोर्ट ने 30 अक्टूबर को आरोपियों पर आरोप तय किए थे।
- मुख्य आरोपी अभय राठौर सहित अन्य आरोपियों ने हाईकोर्ट में अपील की।
- आरोपियों ने फोटोकॉपी को साक्ष्य मानने पर कानूनी सवाल उठाए हैं।
- याचिका में एफआईआर और आरोप पत्र को निरस्त करने की मांग की गई।
यह आरोपी पहुंचे हैं हाईकोर्ट
आरोप पत्र और एफआईआर को किया चैलेंज
फोटोकॉपी को साक्ष्य नहीं माना जा सकता है। जांच अधिकारी विजय सिंह सिसौदिया ने मूल दस्तावेज लिए ही नहीं। नगर निगम के जिन अधिकारियों को इन फाइलों पर हस्ताक्षर करने थे वह लिए बिना ही केस दर्ज किया।
मूल दस्तावेज और फाइल तो चोरी होने की बात कही गई है वह कहां है, मूल फाइल के कोई पते नहीं है। ऐसे में फोटोकॉपी को साक्ष्य मानकर आरोप तय नहीं हो सकते हैं।
जिला कोर्ट से यह दिया गया आदेश
इन आरोपियों पर यह आरोप
राहुल बड़ेरा, जान्हवी फर्म- निगम के अधिकारी/कर्मचारियों के साथ मिलकर फर्जी दस्तावेज से लाभ लिया।
उदयासिंह, ड्रेनेज विभाग उपयंत्री- आरोपी फर्म के साथ मिलकर फर्जी बिलों का भुगतान किया।
चेतन भदौरिया, निगम में कम्प्यूटर आपरेटर- आरोपी चेनव उदयसिंह के साथ मिलकर अधिकारियों की आईडी-पासवर्ड लेकर फर्जी देयकों की लीगेसी तैयार की।
राजकुमार साल्वी, निगम में लेखापाल- फर्जी देयर के चेक तैयार कर भुगतान कराया।
अभय सिंह राठौर, कार्यपालन इंजीनियर निगम- ड्रेनेज विभाग में पदस्थ रहते ठेकेदारों के साथ मिलकर फर्जी कार्यादेश, फाइल तैयार कर लाभ लिया।
मुरलीधरन, निगम क्लर्क- बिल की फर्जी फाइलों को नंबर डालकर रजिस्टर किया।
अनिल गर्ग, आडिट निगम उप संचालक- अवैध लाभ के लिए फर्जी देयकों का आडिट किया। एक दिन में 5 किमी ड्रेनेज लाइन, 500 चेंबर निर्माण जैसी फाइल मंजूर की।
रामेशवर परमार- निगम सहायक संपरीक्षक- फर्जी आडिट किया, बिलों की जांच नहीं की।
राजेंद्र शर्मा, आरएस इंफ्रास्ट्रक्चर फर्म- फर्जी कार्यादेश व बिल तैयार कर अवैध लाभ लिया।
मोहम्मद जाहिद, डायमंड एसोसिएट फर्म- फर्जी कार्यादेश, बिल तैयार कर अवैध लाभ लिया।
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