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News In Short
इंदौर में पहली बार ऐसा हो रहा है कि जवाब देने के लिए हाईकोर्ट को अधिकारियों को बुलाना पड़ रहा है।
सबसे ज्यादा मामले हाल के समय में खाकी (पुलिस विभाग) से संबंधित आए हैं।
भागीरथपुरा मामले में सीएस को वीसी (वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग) के जरिए जवाब देने के लिए कहा गया है।
हालत यह है कि हाईकोर्ट को यह कहना पड़ रहा है कि गंभीरता से नहीं लेंगे तो सख्त कदम उठाए जाएंगे।
News In Detail
INDORE. इंदौर में पहले साल में एक-दो केस होते थे, जब अधिकारियों को हाईकोर्ट में पेश होना पड़ता था। इनमें कलेक्टर, निगमायुक्त, सीपी (पुलिस कमिशनर) जैसे बड़े अधिकारी शामिल है। वहीं, अब स्थिति बदल गई है। इन अधिकारियों को अब लगातार हाईकोर्ट में जवाब देने के लिए आना पड़ रहा है। कई बार तो वे वीडियो कांफ्रेंसिंग (वीसी) के जरिए पेश हो रहे हैं।
बीआरटीएस का मामला तो हद दर्जे की उदासीनता को बताता है। इसमें एक ठेकेदार काम नहीं कर रहा है और अधिकारी अपनी बेबसी हाईकोर्ट में बता रहे हैं। इस पर हाईकोर्ट को अब ठेकेदार को तलब करना पड़ रहा है। विभागों में समन्वय की कमी दिख रही है। बीआरटीएस पर एलिवेटेड कारिडोर को लेकर पीडब्ल्यूडी प्रशासन को ही जवाब नहीं दे रहा है।
देखिए इस तरह लगातार पेश हो रहे अधिकारी
इंदौर में भयावह ट्रक हादसे को खुद जबलपुर हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया और सीपी संतोष सिंह वीसी के जरिए पेश हुए। वहीं डीसीपी ट्रैफिक लगातार पेश हो रहे हैं।
बीआरटीएस और ट्रैफिक के मामलों को लेकर लगातार कलेक्टर शिवम वर्मा, निगमायुक्त पहले दिलीप यादव और अब क्षितिज सिंघल, ट्रैफिक डीसीपी आनंद कलादगी आ रहे हैं।
बीआरटीएस मामले में ही अब हाईकोर्ट ने पीडब्ल्यूडी चीफ इंजीनियर और एक्जीक्यूटिव इंजीनियर को तलब किया है।
चूहा कांड को लेकर मेडिकल कॉलेज प्रबंधन कठघरे में आ चुका है और तलब हो चुका है।
इंदौर-देवास पर घंटों लगने वाले ट्रैफिक जाम को लेकर एनएचएआई के अधिकारी और प्रशासनिक अधिकारी तलब हो चुके हैं।
चंदननगर के प्रसिद्ध केस में टीआई इंद्रमणि पटेल को लेकर हाईकोर्ट के सख्त आदेश हुए और सीपी को कार्रवाई के लिए कहा गया, लेकिन बाद में याचिका वापस ले ली गई।
सुप्रीम कोर्ट में एक आरोपी पर चार की जगह फर्जी आठ केस बताने में सीपी, एडिशनल डीसीपी और टीआई तीनों को पक्षकार बनाने के आदेश हुए।
आजादनगर में युवती के सुसाइड केस में आरोपी युवक के माता-पिता को पार्टी नहीं बनाने को लेकर हाईकोर्ट ने सीपी सिंह को बुलाया और जवाब लिया।
इंदौर में फ्लाईओवर के नीचे हो रहे कब्जों को लेकर हाईकोर्ट ने निगम को सख्त आदेश दिए हैं।
अवैध धर्मस्थल बनाने और हटाने के लिए भी कलेक्टर से दो सप्ताह में एक्शन रिपोर्ट मांगी गई है।
तीन थानों के टीआई द्वारा सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी जीरो पर कार्रवाई नहीं करने पर जवाब मांगा गया है।
चाइनीज मांजे से लगातार जा रही जान को लेकर जनहित याचिका में कलेक्टर ने जवाब दिया और हाईकोर्ट ने कार्रवाई के आदेश दिए।
हालत यह है कि ट्रैफिक डीसीपी को हाईकोर्ट के आदेश पर भी नोडल अधिकारी नियुक्त कर इसकी जानकारी देना भी कमेटी को भूल गए, इस पर उन्हें फटकार भी पड़ी।
भागीरथपुरा मामले में सीएस से मांगा जवाब
भागीरथपुरा में गंदे पानी से अभी तक 23 मौतें हो चुकी हैं। करीब 450 लोग अस्पताल में भर्ती हो चुके हैं। इस मामले में चार जनहित याचिकाएं लग चुकी हैं। इस पर हाईकोर्ट ने अब सीएस अनुराग जैन से साफ पानी की व्यवस्था को लेकर जवाब मांगा है। इसमें 15 जनवरी को सीएस वीसी के जरिए जवाब देंगे।
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इंदौर में प्रशासनिक उथल-पुथल का दौर चल रहा है। चार महीने पहले ही कलेक्टर, संभागायुक्त, निगमायुक्त, आईडीए सीईओ बदले गए। भागीरथपुरा कांड के बाद निगमायुक्त और अपर आयुक्त आईएएस फिर बदल दिए गए।
राजनीतिक उठापटक बीजेपी की अंदरूनी जारी है। ऐसे में कड़े और सख्त फैसले की कमी महसूस हो रही है। इसके चलते हाईकोर्ट को एक्जीक्यूटिव बॉडी में भी आदेश देने पड़ रहे हैं।
Sootr Expert
वहीं वरिष्ठ अधिवक्ता अजय बागड़िया का कहना है कि यह सभी दैनिक प्रशासनिक काम और फैसले हैं। इसे अधिकारियों को लेना चाहिए, लेकिन यह लालफीताशाही में उलझे हैं।
एक-दूसरे पर अपनी जिम्मेदारी डालते हुए गेंद पास कर रहे हैं। इसका खामियाजा जनता को भुगतना पड़ता है। जैसे बीआरटीएस देख लीजिए, रैलिंग हटाने के आदेश को 11 माह हो चुके हैं। वहीं, 11 किमी की रैलिंग नहीं हटी।
अब आगे क्या
हाईकोर्ट कह चुका है कि आप गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। हमें मजबूर मत करिए कि सख्त फैसले लें। यह बताता है कि अब लगातार प्रशासनिक ढीलमपोल नहीं चलेगी।
इस मामले में लगातार याचिकाएं लग रही हैं और आदेश हो रहे हैं। वहीं, हालत यह है कि इनका भी अमल नहीं हो रहा है। ऐसे में हाईकोर्ट शासन को अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई के आदेश दे सकता है।
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