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इंदौर विकास प्राधिकरण (आईडीए) की बेफिजूल की जिद और स्कीम में 32 साल से उलझे 13 सोसायटी के हजारों पीड़ितों की ओर से फिर शिकायत हुई है।
मंगलवार को कलेक्ट्रेट में हुई जनसुनवाई में एक बार फिर पुष्पविहार रहवासी संघ कलेक्टर शिवम वर्मा के पास पहुंचा। और आईडीए द्वारा किए जा रहे अन्यायपूर्ण, तानाशाही रवैए पर गहरी नाराजगी जाहिर की। इसके बाद आईडीए के द्वारा हो रहे अन्याय और तानाशाही रवैये पर अपनी गहरी नाराजगी जताई।
पीड़ितों ने यह कहा
पीड़ितों ने साफ कहा कि साल 1993 में यह स्कीम 171 आईडीए ने लगा दी। इसके बाद ना जमीन का अधिग्रहण कर मुआवजा दिया और ना ही खुद विकास किया।
32 साल से 6 हजार से ज्यादा परिवारों को अपने ही प्लॉट पर मकान बनाने की मंजूरी नहीं है। लंबी लड़ाई के बाद शासन ने स्कीम से मुक्ति का नोटिफिकेशन/नियम जारी किए।
इसके तहत दस फीसदी से कम विकास होने पर राशि भरकर स्कीम मुक्त होना थी। यह राशि 5.89 करोड़ रुपए जीएसटी के साथ दिसंबर 2024 में भर चुके हैं।
नियमों के तहत केवल स्कीम (इंदौर स्कीम 171) मुक्ति का नोटिफिकेशन जारी होना है, जो नहीं किया जा रहा है। यह विशुद्ध अमानत में खयानत का मामला है, क्योंकि एक साल पहले राशि ली जा चुकी है।
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कलेक्टर क्या बोले
पीड़ितों ने एनके मिश्रा के नेतृत्व में कलेक्टर से मुलाकात की। विधायक महेंद्र हार्डिया भी विविध मंचों पर इसके लिए बात उठा चुके हैं।
हाल ही में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की अध्यक्षता में हुई बैठक में भी विधायक ने मजबूती से यह मुद्दा उठाया था। इस दौरान कहा था कि कब तक स्कीम (इंदौर स्कीम 171 केस ) के नाम पर झुलाओगे।
वहीं पीड़ितों से मुलाकात पर कलेक्टर ने आईडीए सीईओ से भी इस मुद्दे पर बात की। बताया गया कि इस पर विचार हो रहा है। वहीं कलेक्टर शिवम वर्मा ने कहा कि इस मामले में जिला प्रशासन जो नियम अनुसार बेहतर हो सकता है वह करेगा।
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अगस्त में अधूरा प्रस्ताव होने से फंस गया पेंच
राशि भरने के बाद इस स्कीम को मुक्त करने का मामला उठाया गया था। अगस्त 2025 में हुए बोर्ड मीटिंग में यह प्रस्ताव पास हुआ था कि सहकारी संस्थाओं की जमीन तो मुक्त कर दी जाए।
20 हेक्टेयर सरकारी जमीन और 38 हेक्टेयर निजी जमीन पर फिर से नई स्कीम लागू की जाए। इसके लिए आईडीए ने पूरी जमीन का सर्वे किया। खसरा नंबर सहित नक्शा, प्रस्ताव, खर्च और आय की रिपोर्ट तैयार की।
यह रिपोर्ट मप्र शासन को भेजी गई। इसके बाद बात आगे नहीं बढ़ी। वैसे भी, नियमों के मुताबिक, राशि जमा होने के बाद केवल मुक्ति का नोटिफिकेशन जारी करना था। नई स्कीम लगेगी तो पहले स्कीम 171 हटाने का नोटिफिकेशन होगा और फिर बाकी सर्वे नंबर के साथ नई स्कीम लागू की जाएगी।
13 सोसायटी में 6 हजार प्लाटधारक उलझे हैं
स्कीम 171 में 13 सोसायटी के साथ 211 निजी स्वामित्व की भी कुल 151 हेक्टेयर जमीन है। इसमें शासकीय जमीन 20 हेक्टेयर और निजी भूधारकों की 38 हेक्टेयर करीब है।
इसमें पीड़ितों की संख्या करीब छह हजार प्लाट धारक है। सोसायटी में देवी अहिल्या श्रमिक कामगार सहकारी संस्था, इंदौर विकास गृह निर्माण संस्था, मजदूर पंचायत गृह निर्माण संस्था।
साथ ही मारूति गृह निर्माण संस्था, सन्नी कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी, रजत गृह निर्माण संस्था, संजना गृह निर्माण संस्था, अप्सरा गृह निर्माण संस्था। इनके अलावा न्याय विभाग कर्मचारी गृह निर्माण सहकारी संस्था और श्रीकृपा गृह निर्माण सहकारी संस्था शामिल हैं।
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इधर भूमाफिया डागरिया, सुराणा बाज नहीं आ रहे
उधर भूमाफिया अरुण डागरिया, अतुल सुराणा, पुष्पेंद्र ठाकुर बाज नहीं आ रहे हैं। पीड़ित एक बार फिर बैनर, पोस्टर लेकर इनके खिलाफ जनसुनवाई में पहुंचे।
पीड़ितों ने कहा कि तेजाजीनगर क्षेत्र में ग्राम असरावदखुर्द की सेटेलाइट वैली फेस टू कॉलोनी अभी तक विकसित नहीं की गई है। पीड़ित बाबू कुशवाह ने कहा कि भूमाफिया लगातार वसूली कर रहे हैं।
जनसुनवाई में सात-आठ सालों से आ रहे हैं। अधिकारी केवल आश्वासन दे रहे हैं और भूमाफियों को संरक्षण मिल रहा है। कॉलोनी में एक हजार से ज्यादा पीड़ित हैं।
इनकी आठ-दस कॉलोनियां हैं, जिसमें सभी जगह यह काम है और विकास पूरा नहीं है। पजेशन देने के नाम पर एनओसी मांगी जाती है और इसके लिए 150 रुपए प्रति वर्गफीट की राशि मांगी जाती है।
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