इंदौर विजय नगर थाने के तीन टीआई कटघरे में, हाई प्रोफाइल केस की नौ डायरियां गायब

इंदौर के विजय नगर थाने में हाई प्रोफाइल मामलों से जुड़ी नौ केस डायरी गायब हो गई हैं। इससे पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है। इन गायब फाइलों में धोखाधड़ी और करोड़ों रुपए के गबन के केस शामिल हैं।

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Rahul Dave
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Indore News: इंदौर के विजय नगर थाने में गंभीर लापरवाही की तस्वीर सामने आई है। हाई-प्रोफाइल मामलों में धोखाधड़ी और करोड़ों रुपए के गबन की नौ केस डायरियां गायब हो गई हैं। मामले में थाने के तीन टीआई खुद कटघरे में खड़े हो गए हैं।

ये डायरियां गायब होने की जानकारी सामने आने के बाद हड़कंप मचा हुआ है। वहीं कई सवालिया निशान भी पुलिस की कार्यप्रणाली पर लग रहे हैं।

ये वही केस हैं, जिनमें आरोपी आज तक खुली हवा में घूम रहे हैं। अदालत में पेश होते हैं, लेकिन पुलिस के पास सबसे जरूरी दस्तावेज और केस डायरी नहीं है।

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ऐसे समझें पूरा मामला

कहानी सिर्फ फाइलें गायब होने की नहीं—बल्कि ‘चयनित फाइलें’ गायब होने की है।

संयोग देखिए कि जिन केसों की फाइलें लापता हैं, वे वही केस हैं जिन पर तत्कालीन टीआई तहजीब काजी ने कार्रवाई की थी।

  • एडवाइजरी फर्मों पर कार्रवाई
  • करोड़ों के निवेश फर्जीवाड़े
  • रसूखदार लोगों पर एफआईआर

जिन केसों में राजनीतिक दबाव के आरोप पहले भी लगे। इनमें से कई प्रकरण उन लोगों से जुड़े थे जिनकी जड़ें शहर की सत्ता, कारोबार और नेटवर्क तक जाती हैं।

आज ठीक वही फाइलें गायब हैं। आज, जब उन्हीं मामलों के आरोपी अदालत में पेश होते हैं, पुलिस के पास ट्रायल चलाने के लिए जरूरी दस्तावेज नहीं हैं। फाइलें गुम हैं, जिन्हें न थाने में ढूंढा जा सका, न रिकॉर्ड रूम में।

तत्कालीन एसीपी की टेबल पर पहुंचते ही रुक गई फाइल

सबसे बड़ी विडंबना यह है कि पुलिस सिस्टम खुद इन फाइलों की तलाश में उतना गंभीर कभी दिखा ही नहीं। पुलिस कमिश्नर ने जांच का आदेश तो दिया, लेकिन फाइल तत्कालीन एसीपी आदित्य पटले की टेबल पर पहुंचते ही ‘रुक’ गई। कोई आगे की कार्रवाई नहीं हुई। न जिम्मेदारी तय हुई, न कोई स्पष्टीकरण आया। कई महीने बीत गए, लेकिन फाइलें वही नहीं मिलीं। अब वही जांच दोबारा एसीपी राजकुमार सराफ को सौंप दी गई है।

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थाने का तर्क और भी विचित्र

45 फाइलें गलत बंडल में चली गई थीं, जिनमें से 36 तो मिल गईं, लेकिन 9 अभी भी लापता हैं। संयोग देखिए, ये नौ वही फाइलें हैं जिनमें आरोपी सबसे ज्यादा प्रभावशाली हैं। मानो फाइलें चुन-चुनकर गायब हुई हों।

तीन टीआई...तीन विवाद... और उन्हीं के दौरान गायब हुई फाइलें

विजयनगर थाना (एमपी पुलिस) पिछले दो साल से जैसे विवादों का केंद्र रहा हो।

  • टीआई तहजीब काजी - बड़े फर्जीवाड़ों में कार्रवाई, राजनीतिक दबाव के आरोप
  • टीआई रविन्द्र गुर्जर - तबादले के दौरान विवाद
  • टीआई चंद्रकांत पटेल - कार्यशैली पर सवाल

केस डायरियों का रिकॉर्ड इधर-उधर

काज़ी बड़े फर्जीवाड़ों के कारण कई प्रभावशाली लोगों के निशाने पर बताए जाते हैं। गुर्जर का विवादास्पद तबादला हुआ। पटेल के कार्यकाल में कई मामलों की फाइलें इधर-उधर रिकॉर्ड हुईं। ऐसे में यह सवाल और तेज़ हो गया है कि क्या यह गड़बडियां वाकई संयोग हैं?

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‘गायब’ होने का सीधा फायदा आरोपियों को

इस बीच एक आरोपी तो एमपी हाईकोर्ट पहुंच चुका है यह कहते हुए कि केस डायरी ही नहीं है। इसलिए उचित सुनवाई संभव नहीं। बाकी आरोपी भी कानूनी सुरक्षा खोज रहे हैं। जाहिर है, फाइलों के ‘गायब’ होने का सीधा फायदा आरोपियों को मिला है।

नए सिरे से जांच

एसीपी राजकुमार सराफ के मुताबिक नए सिरे से जांच शुरू की गई है, लेकिन असली सवाल वहीं खड़ा है—क्या ये नौ फाइलें कभी मिलेंगी? या यह भी इंदौर पुलिस (विजय नगर थाना) के इतिहास की उन घटनाओं में दर्ज हो जाएगा जिनका सच कभी बाहर नहीं आता?

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