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Photograph: (thesootr)
News In Short
- दिगम्बर जैन समाज में अध्यक्ष चयन को लेकर विवाद
- विनय बाकलीवाल को बिना चुनाव अध्यक्ष घोषित करने का आरोप
- समाज के संविधान में तय चुनाव प्रक्रिया को दरकिनार करने का दावा
- 7 जनवरी की बैठक का एजेंडा वोटर लिस्ट था, चुनाव नहीं
- समाज ने एक फरवरी को साधारण सभा बुलाने का ऐलान किया
INDORE. दिगम्बर जैन समाज (सामाजिक संसद), इंदौर में अध्यक्ष पद को लेकर गंभीर विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि विनय बाकलीवाल को बंटे हुए समाज को एक करने के लिए समन्वयक बनाया गया था, लेकिन उन्होंने बिना चुनाव के ही खुद को अध्यक्ष घोषित कर लिया। समाज इसे विश्वासघात और संविधान का उल्लंघन बता रहा है। इसी विरोध के बीच एक फरवरी को साधारण सभा बुलाने का ऐलान किया गया है।
News In Detail
बीते कुछ समय से इंदौर का जैन समाज दो गुटों में बंटा हुआ है। एक पक्ष के अध्यक्ष राजकुमार पाटोदी, दूसरे पक्ष के अध्यक्ष नरेंद्र वेद थे। इस दोहरे नेतृत्व से समाज की छवि को नुकसान हो रहा था। इसी को समाप्त करने के लिए करीब 10 माह पहले एक समन्वय समिति बनाई गई। समिति के मुख्य समन्वयक विनय बाकलीवाल थे।
समन्वय समिति के सदस्य दिलीप पाटनी का आरोप है कि समाज को एक करने के नाम पर विनय बाकलीवाल खुद अध्यक्ष बनकर बैठ गए हैं। व्यक्तिगत मेरे को दिक्कत नहीं है, लेकिन अध्यक्ष संविधान और चुनाव प्रक्रिया से आना चाहिए ।
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क्यों गहराया विवाद
दिगंबर जैन समाज (सामाजिक संसद), इंदौर में अध्यक्ष पद को लेकर विवाद तब गहरा गया, जब चुनाव प्रक्रिया के बिना ही विनय बाकलीवाल को अध्यक्ष घोषित कर दिया गया। समाज के वरिष्ठ सदस्यों का कहना है कि यह फैसला न केवल असंवैधानिक है, बल्कि समाज की लोकतांत्रिक परंपरा के खिलाफ भी है।
समन्यवक समिति के सदस्य पाटनी जी के अनुसार, विनय बाकलीवाल को समन्वयक इसलिए बनाया गया था ताकि दो गुटों में बंट चुके समाज को एक मंच पर लाया जा सके। लेकिन इसी भूमिका का दुरुपयोग कर बिना साधारण सभा, बिना चुनाव अधिकारी और बिना मतदान खुद को अध्यक्ष घोषित कर दिया।
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समाज का संविधान क्या कहता है?
- दिगम्बर जैन समाज में अध्यक्ष चयन की स्पष्ट प्रक्रिया है
- हर जैन मंदिर अपने लेटरहेड पर प्रतिनिधियों के नाम भेजता है
- प्रतिनिधियों की जांच के बाद वोटर लिस्ट प्रकाशित होती है
- साधारण सभा (AGM) बुलाई जाती है
- चुनाव अधिकारी नियुक्त होता है
- नामांकन, मतदान और मतगणना के बाद अध्यक्ष चुना जाता है
अब तक के अध्यक्ष- सभी चुनाव से चुने गए
- स्वर्गीय हीरालाल जी झांझरी
- स्वर्गीय बाबूलाल जी पाटोदी
- कैलाश जी वेद
- स्वर्गीय प्रदीप कुमार कासलीवाल
- राजकुमार पाटोदी
समाज के अनुसार, इन सभी का चयन संवैधानिक चुनाव प्रक्रिया से ही हुआ।
दो अध्यक्षों से बिगड़ी बात, बनी समन्वय समिति
समाज में दो अध्यक्ष होने से बदनामी बढ़ने लगी थी
- एक पक्ष: राजकुमार पाटोदी
- दूसरा पक्ष: नरेंद्र वेद
इसी कारण करीब 10 माह पहले समन्वय समिति बनाई गई, जिसका उद्देश्य था। एक वोटर लिस्ट, एक चुनाव, एक अध्यक्ष समिति में दोनों पक्षों के प्रतिनिधि शामिल थे। विनय बाकलीवाल को मुख्य समन्वयक बनाया वहीं मनोज सेठी सह स्मनवक बनाया गया।
7 जनवरी की बैठक और विवाद की जड़
7 जनवरी को होटल प्रेसिडेंट में समन्वय समिति की बैठक हुई। एजेंडा साफ था वोटर लिस्ट को अंतिम रूप देना आरोप है कि इसी बैठक में, बिना एजेंडा और बिना चुनाव प्रक्रिया, विनय बाकलीवाल को अध्यक्ष घोषित कर दिया गया।
समाज के संविधान के अनुसार बिना चुनाव अध्यक्ष घोषित करना न केवल असंवैधानिक है, बल्कि भविष्य में समाज की लोकतांत्रिक व्यवस्था को भी कमजोर करता है। यही कारण है कि विरोध सिर्फ व्यक्ति का नहीं, प्रक्रिया का है।
रिश्तों पर नहीं, संविधान पर सवाल
इस पूरे घटनाक्रम में यह भी चर्चा में है कि विनय बाकलीवाल, पूर्व अध्यक्ष राजकुमार पाटोदी के भांजे हैं और उन्हें वहीं से समर्थन मिला। हालांकि समाज के लोगों का साफ कहना है कि विवाद रिश्तों का नहीं, बल्कि संविधान और नियमों के उल्लंघन का है।
समाज का पलटवार-1 फरवरी को साधारण सभा
जैसे ही यह मामला सामने आया, समाज के विभिन्न वर्गों में तीखा असंतोष फैल गया। इसके बाद समाज के महामंत्री सुनील पांड्या ने एक आधिकारिक विज्ञप्ति जारी करसाधारण सभा की तारीख 1 फरवरी , दोपहर 3 बजे नर्सिंग वाटिका, इंदौर में रखी गई। इसमें सभी वोटरों की साधारण सभा बुलाने का ऐलान किया है।
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आगे क्या?
- साधारण सभा में संवैधानिक प्रक्रिया पर फैसला
- अध्यक्ष पद को लेकर स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद
- समाज की एकता या विवाद- दोनों में से एक तय होगा
दो साल पहले मुनि सागर जी के इंदौर दौरे के दौरान दोनों समाजों के अध्यक्षों को बुलाया गया था। उन्होंने दोनों से इस्तीफा देकर संविधान के अनुसार चुनाव कराने की बात कही थी। नरेंद्र जैन ने इस्तीफा दे दिया, जबकि राजकुमार पाटोदी ने पदाधिकारियों से चर्चा का समय मांगा। इसके बाद 69 प्रतिनिधियों की बैठक हुई, जिसमें चुनाव प्रक्रिया तय की गई। नियम यह बना कि एक नाम होने पर निर्विरोध अध्यक्ष और अधिक नाम होने पर चुनाव होगा। इसी प्रक्रिया के लिए समन्वय समिति बनी, जिसके मुख्य समन्वयक विनय बाकलीवाल थे। आरोप है कि उन्होंने बिना चुनाव और संविधान की प्रक्रिया अपनाए खुद को अध्यक्ष बना लिया, जिस पर समाज को आपत्ति है।
- सुशील पांड्या, महामंत्री, दिगंबर जैन समाज
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