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News In Short
जबलपुर हाईकोर्ट ने मदन महल पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।
कोर्ट ने जबलपुर रेंज के IG को निष्पक्ष जांच की जिम्मेदारी सौंपी है।
आवेदिका ने पुलिस पर आरोप लगाया है कि उन्होंने उसका मोबाइल और कुछ निजी बैग गायब कर दिए।
इससे पहले भी डॉक्टर हेमलता श्रीवास्तव केस में इसी थाने की जांच पर सवाल उठ चुके थे।
News in detail
जबलपुर हाईकोर्ट में जस्टिस संदीप एन.भट्ट ने NDPS एक्ट के मामले की सुनवाई की। कोर्ट ने मदन महल पुलिस स्टेशन की कामकाजी तरीके पर सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि पुलिस की कहानी और आरोपी के आरोपों में बड़ी विसंगतियां हैं, जो नजरअंदाज नहीं की जा सकतीं। इसके बाद कोर्ट ने इस मामले की जांच IG को सौंप दी है।
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NDPS केस: ट्रेन से उठाकर थाने ले जाने का आरोप
यह मामला आवेदिका खुशी कौर से जुड़ा है। इन्हें मदन महल पुलिस ने 11 जनवरी 2026 को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने उन पर मादक पदार्थ रखने का आरोप लगाया था। वहीं बचाव पक्ष का कहना है कि ट्रेन यात्रा में पुलिस ने उनके साथ गलत व्यवहार किया था। जब उन्होंने विरोध किया तो उन्हें थाने ले जाकर फर्जी मामला दर्ज कर लिया गया है।
मोबाइल और बैग गायब, शिकायतों पर भी नहीं हुई सुनवाई
आवेदिका की ओर से भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आवेदिका का कहना है कि पुलिस ने उनका मोबाइल और कुछ निजी बैग गायब कर दिए गए हैं। इस संबंध में जब उन्होंने उच्च अधिकारियों से शिकायत की तो कोई कार्रवाई नहीं हुई। इन आरोपों ने मामले को और संदिग्ध बना दिया है।
थाने के अधूरे CCTV फुटेज बने संदेह की जड़
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने नैनपुर रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 1, मदन महल रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 4 और मदन महल थाने के CCTV फुटेज मांगे। कोर्ट के कहने पर थाना प्रभारी धीरज राज ने पेन ड्राइव में फुटेज दिए। आरोप है कि पूरा फुटेज नहीं दिया गया है। जो फुटेज मिला है वह पुलिस की थ्योरी पर सवाल खड़े करता नजर आया है।
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रायपुर के होटल में फर्जी पहचान से रुकी थी आरोपी
सरकारी वकील ने बचाव में रायपुर के होटल मैनेजर के बयान का हवाला दिया है। बताया है कि खुशी कौर 7 जनवरी 2026 को यशवंत सोनकर के साथ होटल में गलत नाम से रुकी थी। इस कारण उनका आचरण संदिग्ध नजर आ रहा है। कोर्ट ने इसे मानते हुए आरोपी का आचरण संदेहास्पद माना। इससे पुलिस की भूमिका भी सवालों के घेरे में आई है।
IG को सौंपी गई जांच, दो हफ्ते में रिपोर्ट तलब
इन सभी परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी है। पुलिस पर लगाए आरोप गंभीर हैं। जबलपुर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक IG को जांच सौंप दी गई है। कोर्ट ने CDR लोकेशन, CCTV फुटेज की जांच के निर्देश दिए हैं। साथ ही जांच अधिकारी की निष्पक्ष समीक्षा करने को कहा है।
कोर्ट की चेतावनी: कोताही बर्दाश्त नहीं
हाईकोर्ट ने सख्त लहजे में कहा कि जांच रिपोर्ट दो सप्ताह के भीतर रजिस्ट्रार (जुडिशियल) के माध्यम से प्रस्तुत की जाए। आदेश के पालन में किसी भी प्रकार की लापरवाही या देरी को गंभीरता से लिया जाएगा।
पहले भी उठ चुके हैं इसी थाने पर सवाल
गौरतलब है कि इससे पहले भी मदन महल थाने की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ चुके हैं। डॉक्टर हेमलता श्रीवास्तव की प्रॉपर्टी से जुड़ा मामला भी विवाद में था। इस बार मामला और गंभीर हो गया है। अब पुलिस की भूमिका पर हाईकोर्ट में सवाल उठे हैं।
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