निजी स्कूलों ने किया 240 करोड़ का फीस घोटाला, स्टेशनरी और स्कूलों की सांठगांठ का भी खुलासा
Shreya Nakade | May 27, 2024, 15:58 IST
जबलपुर स्कूल फीस घोटाला
मध्य प्रदेश के जबलपुर में निजी स्कूलों पर फीस बढ़ाने और किताबों में कमीशनखोरी का बड़ा खुलासा हुआ है। शहर के निजी स्कूलों ने फीस बढ़ाकर अभिभावकों से 240 करोड़ रुपए तक वसूल कर लिए...
जबलपुर में निजी स्कूलों की फीस बढ़ाने की मनमानी ( jabalpur private school fees scam ) को लेकर कड़ी कार्रवाई हुई है। इस कार्रवाई में 11 स्कूलों के खिलाफ एक्शन लिया गया है। प्राइवेट स्कूलों ने फीस घोटाला कर विद्यार्थियों के माता-पिता से 240 करोड़ तक की वसूली कर डाली। इस मामले में कलेक्टर के आदेश पर ताबड़तोड़ एक्शन हुआ। 20 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। 30 अभी भी फरार हैं। जबलपुर कलेक्टर दीपक कुमार सक्सेना ने बीते दिनों प्राइवेट स्कूल संचालकों के खिलाफ आम जनता से शिकायत मंगवाई थी। इन शिकायतों के बाद ही कार्रवाई की गई।
जबलपुर कलेक्टर दीपक कुमार सक्सेना ने बीते दिनों जिले की आम जनता से प्राइवेट स्कूलों के खिलाफ शिकायत मंगवाई थी। सोमवार को इन शिकायतों पर कार्रवाई करते हुए जिले के 11 निजी स्कूलों के खिलाफ एक्शन लिया गया। जिला प्रशासन ने जांच में पाया कि अभी तक स्कूलों ने 81 करोड़ 30 लाख रुपए अतिरिक्त फीस के तहत वसूले हैं। यह वसूली 21 हजार से ज्यादा छात्रों से हुई है। जबलपुर कलेक्टर दीपक कुमार सक्सेना के मुताबिक अनुमानित 1,037 निजी स्कूल में जांच की गई। इसमें 7 लाख बच्चों से करीब 240 करोड़ रुपए की अतिरिक्त फीस वसूली की गई है।
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स्कूलों पर कार्रवाई के बाद जबलपुर कलेक्टर ने निजी स्कूल की किताबों में कमीशनखोरी की पूरी तरकीब बताई। स्कुल प्रशासन हर साल किताबे बदलता है। प्रशासन की जांच में पाया गया कि इनमें से 90 प्रतिशत के करीब किताबें फर्जी होती है। स्कूल प्रशासन ने इन किताबों के नाम 25 मार्च तक पब्लिक किए। जबकि स्टेशनरी की दुकानों ने दिसंबर महीने में ही इन किताबों के ऑर्डर दे दिए थे। इससे स्कूलों और स्टेशनरी की दुकानों में सांठगांठ साफ समझ आती है। ऐसा करके स्कूल मार्केट में किताबों की मोनोपॉली बना देते हैं।
इसके अलावा स्कूल मैनेजमेंट द्वारा बदली गई किताबें ज्यादातर फर्जी होती है। इन्हें छपवाने में सिर्फ प्रिंटिंग का खर्चा होता है। ऐसे में स्टेशनरी को यह किताबें बहुत कम दामों में मिल जाती है। जबकि छात्रों को स्टेशनरी वाले किताबें महंगी कीमतों में बेचते हैं। कलेक्टर दीपक कुमार सक्सेना ने बताया कि स्कुल मनमाने तरीके से हर साल किताब बदल देते हैं। ऐसे में मार्केट में किसी और दुकानदार के पास स्कूल द्वारा चलाई जा रही किताबें नहीं होती।
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जबलपुर स्कूल फीस घोटाला में कलेक्टर ने बताया कि स्कूल प्रबंधन के द्वारा शासन के पोर्टल पर अपनी वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट अपलोड ही नहीं की जाती। इससे उनकी आय और व्यय का खर्च पता नहीं लग पाता था। जानकारी मांगे जाने पर यह ऑडिट में दर्शाते थे कि उन्हें अपनी दूसरी ब्रांच को संचालित करने के लिए खर्च करना पड़ा है। ऐसा ही दूसरी ब्रांच के द्वारा भी किया जाता था।
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स्कूल प्रबंधन अपने प्रकाशक और पुस्तक विक्रेता साथियों को मुनाफा पहुंचने के लिए हर साल अपने स्कूल का पाठ्यक्रम बदल देते थे। वहीं एक कक्षा में 10 से 15 किताबें पाठ्यक्रम में शामिल कर दी जाती थी ताकि अभिभावक ज्यादा से ज्यादा फर्जी किताबें खरीदने को मजबूर हो। जिसके कमीशन का सीधा फायदा स्कूल को होता था।
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फीस बढ़ाकर वसूल लिए 240 करोड़
जबलपुर कलेक्टर दीपक कुमार सक्सेना ने बीते दिनों जिले की आम जनता से प्राइवेट स्कूलों के खिलाफ शिकायत मंगवाई थी। सोमवार को इन शिकायतों पर कार्रवाई करते हुए जिले के 11 निजी स्कूलों के खिलाफ एक्शन लिया गया। जिला प्रशासन ने जांच में पाया कि अभी तक स्कूलों ने 81 करोड़ 30 लाख रुपए अतिरिक्त फीस के तहत वसूले हैं। यह वसूली 21 हजार से ज्यादा छात्रों से हुई है। जबलपुर कलेक्टर दीपक कुमार सक्सेना के मुताबिक अनुमानित 1,037 निजी स्कूल में जांच की गई। इसमें 7 लाख बच्चों से करीब 240 करोड़ रुपए की अतिरिक्त फीस वसूली की गई है।
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स्टेशनरी की दुकानों के साथ स्कूलों की सांठगांठ
स्कूलों पर कार्रवाई के बाद जबलपुर कलेक्टर ने निजी स्कूल की किताबों में कमीशनखोरी की पूरी तरकीब बताई। स्कुल प्रशासन हर साल किताबे बदलता है। प्रशासन की जांच में पाया गया कि इनमें से 90 प्रतिशत के करीब किताबें फर्जी होती है। स्कूल प्रशासन ने इन किताबों के नाम 25 मार्च तक पब्लिक किए। जबकि स्टेशनरी की दुकानों ने दिसंबर महीने में ही इन किताबों के ऑर्डर दे दिए थे। इससे स्कूलों और स्टेशनरी की दुकानों में सांठगांठ साफ समझ आती है। ऐसा करके स्कूल मार्केट में किताबों की मोनोपॉली बना देते हैं।
इसके अलावा स्कूल मैनेजमेंट द्वारा बदली गई किताबें ज्यादातर फर्जी होती है। इन्हें छपवाने में सिर्फ प्रिंटिंग का खर्चा होता है। ऐसे में स्टेशनरी को यह किताबें बहुत कम दामों में मिल जाती है। जबकि छात्रों को स्टेशनरी वाले किताबें महंगी कीमतों में बेचते हैं। कलेक्टर दीपक कुमार सक्सेना ने बताया कि स्कुल मनमाने तरीके से हर साल किताब बदल देते हैं। ऐसे में मार्केट में किसी और दुकानदार के पास स्कूल द्वारा चलाई जा रही किताबें नहीं होती।
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ऑडिट रिपोर्ट में धांधली
जबलपुर स्कूल फीस घोटाला में कलेक्टर ने बताया कि स्कूल प्रबंधन के द्वारा शासन के पोर्टल पर अपनी वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट अपलोड ही नहीं की जाती। इससे उनकी आय और व्यय का खर्च पता नहीं लग पाता था। जानकारी मांगे जाने पर यह ऑडिट में दर्शाते थे कि उन्हें अपनी दूसरी ब्रांच को संचालित करने के लिए खर्च करना पड़ा है। ऐसा ही दूसरी ब्रांच के द्वारा भी किया जाता था।
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हर साल नया पाठ्यक्रम और ज्यादा किताबें
स्कूल प्रबंधन अपने प्रकाशक और पुस्तक विक्रेता साथियों को मुनाफा पहुंचने के लिए हर साल अपने स्कूल का पाठ्यक्रम बदल देते थे। वहीं एक कक्षा में 10 से 15 किताबें पाठ्यक्रम में शामिल कर दी जाती थी ताकि अभिभावक ज्यादा से ज्यादा फर्जी किताबें खरीदने को मजबूर हो। जिसके कमीशन का सीधा फायदा स्कूल को होता था।
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इन स्कूलों पर हुई कार्रवाई
- क्राइस्ट चर्च बॉइस स्कूल
- ज्ञान गंगा स्कूल
- स्टेमफील्ड इंटरनेशनल स्कूल
- लिटिल वार्ड स्कूल
- चेतान्य स्कूल
- सेंट अलोसियस स्कूल सल्लीवारा
- सेट अलोसियायस घमापुर
- सेट अलोसियस सदर
- क्राइस्टचार्च घामपुर
- क्राइस्ट चर्च बॉयज एंड गर्ल्स
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