जबलपुर के खेल अधिकारी आशीष पांडे को राज्य सूचना आयोग ने किया तलब
Neel Tiwari | Oct 05, 2025, 16:18 IST
ashish pandey rti
एमपी राज्य सूचना आयोग ने जबलपुर के खेल अधिकारी आशीष पांडे के खिलाफ 25 हजार रुपए जुर्माने की चेतावनी के साथ कार्रवाई शुरू की है। उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
Jabalpur. मध्यप्रदेश राज्य सूचना आयोग ने जबलपुर के संभागीय खेल अधिकारी एवं लोक सूचना अधिकारी आशीष पांडे के खिलाफ 25 हजार के जुर्माने की चेतावनी के साथ कार्रवाई शुरू कर दी है। आयोग के आयुक्त ओंकार नाथ ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए 23 नवंबर 2025 को भोपाल स्थित आयोग कार्यालय में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर जवाब देने का आदेश दिया है।
सूचना छुपाने पर
पूरा मामला वर्ष 2022 में दायर एक सूचना अधिकार आवेदन से जुड़ा है। अपीलार्थी विनय जी. डेविड ने रानीताल स्थित मध्य प्रदेश तीरंदाजी अकादमी और जिला खेल एवं युवा कल्याण विभाग, जबलपुर से संबंधित जानकारी मांगी थी। लेकिन तत्कालीन लोक सूचना अधिकारी आशीष पांडे ने आवेदन को यह कहते हुए निरस्त कर दिया कि आवेदन शुल्क के रूप में जमा किया गया 10 रुपए का पोस्टल ऑर्डर अधूरा था। क्योंकि उसमें ऊपर दिए विभाग या अधिकारी का नाम नहीं था।
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सूचना न देने के इस निर्णय को आयोग ने कानून के विपरीत और नागरिक अधिकारों का हनन माना है। अपीलार्थी ने पहले प्रथम अपील अधिकारी (पुलिस अधीक्षक, जबलपुर) के समक्ष अपील की थी, लेकिन वहां भी किसी प्रकार की सुनवाई या आदेश पारित नहीं किए गए, जिसके बाद उन्होंने राज्य सूचना आयोग में द्वितीय अपील दायर की।
29 अगस्त 2025 को हुई सुनवाई में राज्य सूचना आयोग ने पाया कि आवेदक द्वारा मांगी गई जानकारी अधिनियम की धारा 8 और 9 के किसी भी अपवाद के तहत नहीं आती, इसलिए जानकारी प्रदान करने योग्य थी। आयुक्त ओंकार नाथ ने अपने आदेश में कहा कि आम नागरिकों को यह सामान्यत: यह मालूम नहीं होता कि पोस्टल ऑर्डर किस अधिकारी के नाम देय किया जाए, इसलिए लोक सूचना अधिकारी को आवेदन स्वीकार कर जानकारी उपलब्ध कराने का प्रयास करना चाहिए था, न कि उसे निरस्त करना चाहिए था। आयोग ने स्पष्ट रूप से माना कि लोक सूचना अधिकारी ने RTI अधिनियम की धारा 7 का उल्लंघन किया है, जो धारा 20 के तहत दंडनीय अपराध है।
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राज्य सूचना आयोग ने लोक सूचना अधिकारी को आदेशित किया है कि आदेश प्राप्ति के 30 दिनों के भीतर अपीलार्थी विनय जी. डेविड को मांगी गई पूरी जानकारी एवं प्रमाणित प्रतियां नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाएं। यदि किसी अभिलेख की प्रति उपलब्ध नहीं है, तो उसकी स्पष्ट लिखित सूचना भी प्रदान करनी होगी।
प्रकरण में प्रथम अपील अधिकारी एवं जबलपुर के तत्कालीन एसपी सिद्धार्थ बहुगुणा को भी आयोग ने लापरवाही का दोषी माना। आयोग ने पाया कि उन्होंने निर्धारित समयावधि में अपील का निराकरण नहीं किया, जो RTI अधिनियम की धारा 19(1) के विपरीत है। आयुक्त ने उनकी कार्यशैली की निंदा करते हुए समझाइश दी है कि भविष्य में वे अपीलों का निराकरण समय सीमा में करें और अधिनियम के प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करें।
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राज्य सूचना आयोग ने यह निर्देश दिया है कि तात्कालिक लोक सूचना अधिकारी आशीष पांडे के विरुद्ध RTI अधिनियम 2005 की धारा 20(1) के अंतर्गत 25 हजार रुपए की शास्ति अधिरोपित करने या धारा 20(2) के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा की जा सकती है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि सूचना न देना केवल लापरवाही नहीं बल्कि कानून की अवहेलना है, जो नागरिक के मौलिक अधिकार पर सीधा प्रहार है।
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अब इस मामले में अगली सुनवाई 23 नवंबर 2025 को भोपाल में निर्धारित की गई है, जहां लोक सूचना अधिकारी आशीष पांडे को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपना पक्ष रखना होगा। यदि वे संतोषजनक स्पष्टीकरण देने में असफल रहे, तो आयोग 25 हजार का दंड तय कर आदेश पारित करेगा।
यह मामला उन सरकारी अधिकारियों के लिए चेतावनी है, जो सूचना के अधिकार अधिनियम को गंभीरता से नहीं लेते। आयोग ने इस तरह साफ कर दिया है कि अधिनियम के उल्लंघन पर अब कठोर कार्रवाई से परहेज नहीं किया जाएगा।
सूचना छुपाने पर RTI अधिनियम के तहत कार्रवाई
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सूचना न देने के इस निर्णय को आयोग ने कानून के विपरीत और नागरिक अधिकारों का हनन माना है। अपीलार्थी ने पहले प्रथम अपील अधिकारी (पुलिस अधीक्षक, जबलपुर) के समक्ष अपील की थी, लेकिन वहां भी किसी प्रकार की सुनवाई या आदेश पारित नहीं किए गए, जिसके बाद उन्होंने राज्य सूचना आयोग में द्वितीय अपील दायर की।
सिर्फ पोस्टल ऑर्डर पर नाम न होने से नहीं रद्द कर सकते आवेदन
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एक माह में देनी होगी पूरी जानकारी
प्रथम अपीलीय अधिकारी पर भी आयोग की नाराजगी
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जुर्माने सहित अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी
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23 नवंबर को आयोग में होगी सुनवाई
यह मामला उन सरकारी अधिकारियों के लिए चेतावनी है, जो सूचना के अधिकार अधिनियम को गंभीरता से नहीं लेते। आयोग ने इस तरह साफ कर दिया है कि अधिनियम के उल्लंघन पर अब कठोर कार्रवाई से परहेज नहीं किया जाएगा।
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