MPCA में सिंधिया परिवार से ज्योतिरादित्य को कैलाश विजयवर्गीय से मिली थी चुनौती, महानआर्यमन सबसे कम उम्र में निर्विरोध
Sanjay Gupta | Sept 01, 2025, 11:16 IST
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मध्य प्रदेश क्रिकेट संघ (MPCA) में सिंधिया परिवार की तीसरी पीढ़ी के सदस्य, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के पुत्र महानआर्यमन सिंधिया निर्विरोध प्रेसीडेंट बन रहे हैं। सिंधिया परिवार से कौन किस उम्र में बना प्रेसीडेंट... जानिए
मप्र क्रिकेट के सबसे बड़े संघ एमपीसीए में सिंधिया परिवार की तीसरी पीढ़ी के तौर पर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के पुत्र महानआर्यमन सिंधिया प्रेसीडेंट बन रहे हैं। वह निर्विरोध आ रहे हैं और पूरी मैनेजिंग कमेटी ही बिना चुनाव के आ रही है। एक पद पर दो फार्म थे, वह भी वापस ले लिया गया है। औपचारिक तौर पर नई मैनेजिंग कमेटी 2 सितंबर मंगलवार को एजीएम में घोषित होगी और पदभार ग्रहण करेगी। एमपीसीए का गठन 1957 में हुआ था। एसोसिएशन के 68 साल के इतिहास में सबसे कम उम्र में प्रेसीडेंट पद पर आने वाले महानआर्यमन होंगे।
माधवराव सिंधिया- (1982 में उम्र 37 साल में, 2001 तक)- महानआर्यमन के दादा और ज्योतिरादित्य सिंधिया के पिता स्वर्गीय माधवराव सिंधिया का क्रिकेट से जबरदस्त लगाव था और यही आगे की पीढ़ियों तक गया। माधवराव 37 साल की उम्र में साल 1982 में एमपीसीए में प्रेसीडेंट बने और वह साल 2001 तक इस पद पर रहे। वह 1990 से 1993 तक बीसीसीआई प्रेसीडेंट पद पर भी रहे।
महानआर्यमन सिंधिया- महानआर्यमन अभी 29 साल के हैं। वह साल 2022 में ग्वालियर डिवीजन क्रिकेट एसोसिएशन के वाइस प्रेसीडेंट बने थे और दिसंबर 2022 में एमपीसीए (MPCA ) के लाइफ टाइम मेंबर बने थे। वह मप्र प्रीमियम लीग एमपीएल के भी चेयरमैन हैं और दो बार इसका सफलतापूर्वक आयोजन कर चुके हैं।
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जब
एमपीसीए में एक दौर ऐसा आया जब सिंधिया परिवार को किसी ने चुनौती दी हो। यह काल था 2010 से 2012 का। तब कैलाश विजयवर्गीय ने एमपीसीए में कदम रखा और क्रिकेट की राजनीति में सिंधिया को चुनौती दी। तब सिंधिया कांग्रेस में से थे। साल 2010 के चुनाव में सिंधिया को 142 वोट और विजयवर्गीय को केवल 70 वोट मिले और वह 72 वोट से हार गए। लेकिन विजयवर्गीय ने फिर 2012 के चुनाव में प्रेसीडेंट पद पर सिंधिया को चुनौती दी और इस दौरान सिंधिया को 150 और विजयवर्गीय को 73 वोट मिले और फिर करारी हार हुई। तब विजयवर्गीय ने कहा भी मैं क्लीन बोल्ड हो गया। इसके बाद फिर संभावना थी कि साल 2014 में विजयवर्गीय चुनौती देंगे क्योंकि तब नियम के अनुसार सिंधिया को जीत के लिए दो तिहाई वोट की जरूरत होती। लेकिन तब दोनों के बीच सहमति बनी और चुनाव नहीं हुए। इसके बाद प्रेसीडेंट पद पर कोई चुनाव नहीं हुए।
क्रिकेट में राजनीतिक दखल को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर लोढ़ा कमेटी बनी और उनकी सिफारिशें लागू हुई। जिसके तहत मंत्री, सांसद, विधायक इन सभी को बाहर कर दिया गया। इसके साथ ही कई अन्य सुधार लागू हुए, जिसमें कार्यकाल तीन साल किया गया, लगातार दो बार पद पर रहने के बाद कूलिंग पीरियड में जाना होगा और अधिकतम उम्र 70 साल कर दी गई। इसी के तहत अभी बीसीसीआई प्रेसीडेंट पद से रोजर बिन्नी ने इस्तीफा दिया। यह लागू होने पर ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी एमपीसीए में पद से दूरी बना ली, हालांकि एमपीसीए चलता उन्हीं की सलाह पर है और सभी फैसले उन्हीं की मंजूरी से होते हैं।
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सिंधिया के साथ ही कनमड़ीकर की तीसरी पीढ़ी भी कमेटी में आ रही है। प्रसून कनमड़ीकर एक्जीक्यूटिव कमेटी में आ रहे हैं। उनके पिता स्वर्गीय मिलिंद कनमीडकर एमपीसीए में सचिव रह चुके हैं वहीं प्रसून के दादा अनंतवागेश कनमड़ीकर भी बीसीसीआई में सचिव से लेकर एमपीसीए में भी कई पदों पर रहे। madhya pradesh cricket association
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सिंधिया परिवार से कौन किस उम्र में बना प्रेसीडेंट
ज्योतिरादित्य सिंधिया- (साल 2004 में 33 साल में, 2019 तक)- महानआर्यमन के पिता और वर्तमान में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया पिता माधवराव सिंधिया के निधन के बाद साल 2004 में प्रेसीडेंट पद पर आए। वह साल 2010 तक तो निर्विरोध आते रहे लेकिन साल 2010 और फिर 2012 में (तब एमपीसीए कार्यकाल दो साल का होता था), तत्कालीन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय मैदान में आ गए और प्रेसीडेंट पद पर चुनाव हुए। दोनों बार विजयवर्गीय को करारी हार हुई।
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जब कैलाश विजयवर्गीय ने दी चुनौती
लोढ़ा कमेटी के कारण हटे थे ज्योतिरादित्य सिंधिया
यह सभी निर्विरोध आ रहे हैंवहीं एमपीसीए की नई मैनेजिंग कमेटी पूरी तरह से निर्विरोध आ रही है। अमरदीप पठानिया ने ज्वाइंट सेक्रेट्री पद पर नामांकन भरा था लेकिन उन्होंने इसे वापस ले लिया है। अब हर पद पर एक ही व्यक्ति का नामांकन है। पठानिया के साथ ही प्रेम पटेल और राकेश भार्गव ने भी फार्म लिया था लेकिन उन्होंने फार्म नहीं भरा।
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कनमड़ीकर की भी तीसरी पीढ़ी
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