कैलारस शक्कर कारखाना विवाद: 438 करोड़ की संपत्ति 60 करोड़ में देने पर उठे सवाल

Aman Vaishnav | Jul 28, 2026, 13:40 IST
Share
कैलारस शक्कर कारखाना, कैलारस शक्कर कारखाना विवाद
कैलारस शक्कर कारखाना, कैलारस शक्कर कारखाना विवाद

मुरैना के कैलारस शक्कर कारखाने की जमीन MSME विभाग को 60 करोड़ रुपए में हस्तांतरित की गई। जिला पंजीयक और कलेक्टर के मूल्यांकन में इसी जमीन की कीमत 438 करोड़ के पार बताई गई थी। अब इस मामले में कई सवाल उठ रहे हैं।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • मुरैना के कैलारस स्थित शक्कर कारखाने को अफसरों ने बंद करने का रास्ता चुना।
  • कारखाने की 37.887 हेक्टेयर जमीन की कीमत 438.14 करोड़ रुपए आंकी गई थी।
  • वहीं यही जमीन एमएसएमई विभाग को सिर्फ 60.92 करोड़ रुपए में दे दी गई।
  • कारखाना दोबारा शुरू होने पर 5 हजार करोड़ का लोन मिल सकता था।
  • सीएम की घोषणा के बावजूद यह मामला बैठक के एजेंडे से गायब हो गया।

कैलारस शक्कर कारखाना विवाद

मुरैना जिले के कैलारस में बना शक्कर कारखाना कभी इलाके की पहचान था। बरसों तक इसने हजारों किसानों और मजदूरों को रोजी दी।

वहीं अब यही कारखाना एक बड़े विवाद के केंद्र में है। सवाल है कि इसे दोबारा शुरू करने की जगह अफसरों ने बेचने का रास्ता क्यों चुना।

जानकारी के अनुसार जिला पंजीयक और कलेक्टर ने खुद कारखाने की जमीन का मूल्यांकन 438.14 करोड़ रुपए किया था। इसके बावजूद यही जमीन सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विभाग (MSME – Micro, Small and Medium Enterprises) को महज 60.92 करोड़ रुपए में सौंप दी गई। यानी असली कीमत से करीब सात गुना कम में सौदा हुआ।

कैलारस शक्कर कारखाना विवाद: सीएम ने कहा था मिल चलाएंगे, इधर 438 करोड़ की  जमीन मात्र 60.92 करोड़ में बेची
कैलारस शक्कर कारखाना विवाद: सीएम ने कहा था मिल चलाएंगे, इधर 438 करोड़ की जमीन मात्र 60.92 करोड़ में बेची


पहले कैसा था कारखाना

बता दें कि दि मुरैना मंडल सहकारी शक्कर कारखाना मर्यादित कैलारस का पंजीयन 23 अक्टूबर 1965 को हुआ था। उत्पादन 1971-72 में शुरू हुआ। हर दिन 1250 मीट्रिक टन गन्ने की पिराई होती थी। इससे रोजाना 1250 क्विंटल शक्कर बनती थी।

यह कारखाना दशकों तक इलाके की अर्थव्यवस्था की रीढ़ रहा। किसानों को गन्ने का सीधा बाजार मिलता था। कई परिवारों की रोजी-रोटी इसी से चलती थी।

854945_730X365-521081
854945_730X365-521081


2009 में क्यों बंद हुआ

घाटे का हवाला देकर कारखाने को 2009 में बंद कर दिया गया। इसके बाद यह लंबे समय तक बंद ही पड़ा रहा। वहीं 10 अक्टूबर 2019 को सहकारिता आयुक्त ने इसके परिसमापन का आदेश जारी किया। मुरैना सहकारिता उपायुक्त को परिसमापक नियुक्त किया गया।

परिसमापन का मतलब था कि कारखाने की संपत्ति बेचकर देनदारियां चुकाई जाएंगी। दूसरी ओर विशेषज्ञों का कहना है कि कारखाने को पुनर्जीवित करने के भी रास्ते मौजूद थे।

पुनर्जीवित होता तो क्या मिलता

विशेषज्ञों और किसान संघ के प्रस्ताव के मुताबिक अगर कारखाना दोबारा शुरू होता तो बड़ा फायदा मिल सकता था। नेशनल कोऑपरेटिव डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन की नीति के तहत 5 हजार करोड़ रुपए तक का लोन मिलने की संभावना थी।

इस रकम से मुरैना और आसपास के जिलों में 20 नए शक्कर कारखाने खोले जा सकते थे। इससे करीब 30 हजार युवाओं को सीधा रोजगार मिल सकता था। साथ ही लगभग एक लाख किसानों की आय दोगुनी होने का अनुमान था।

इसके बावजूद अधिकारियों ने कई बड़ी विशेषज्ञ संस्थाओं की सिफारिशों को नजरअंदाज कर दिया। इनमें राष्ट्रीय सहकारी शक्कर कारखाना संघ दिल्ली, बसंत दादा शक्कर इंस्टीट्यूट पुणे और राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय ग्वालियर शामिल हैं। इन संस्थाओं ने कारखाने को पुनर्जीवित करने की रिपोर्ट दी थी, लेकिन उसे दबा दिया गया।

नीयत पर तीन बड़े सवाल

इस पूरे मामले में अधिकारियों की मंशा पर तीन बड़े सवाल खड़े होते हैं।

पहला सवाल NCDC की लोन नीति को नजरअंदाज करने से जुड़ा है। 438 करोड़ की संपत्ति को मार्जिन मनी बनाकर पांच हजार करोड़ के लोन का विकल्प क्यों छोड़ा गया, यह साफ नहीं है।

दूसरा सवाल सहकारी नियमों के उल्लंघन का है। परिसमापक ने संपत्ति को अधिकतम मूल्य पर बेचने की कोशिश क्यों नहीं की। अंशधारियों की आमसभा बुलाने का नियम भी तोड़ा गया।

तीसरा सवाल निजी लाभ से जुड़ी आशंकाओं का है। धारा 69(4) के तहत संस्था को पुनर्जीवित करने का प्रावधान था। इसके बजाय जमीन MSME के जरिए निजी उद्यमियों तक पहुंचाने का रास्ता क्यों खोला गया, यह सवाल अब भी अनुत्तरित है।

सीएम की घोषणा, फिर चुप्पी

बता दें कि 5 जून 2026 को एपेक्स बैंक परिसर में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने शक्कर कारखाने को पुनर्जीवित करने की घोषणा की थी। यह घोषणा किसानों और स्थानीय लोगों के लिए बड़ी उम्मीद लेकर आई थी।

वहीं ठीक 24 दिन बाद, 29 जून 2026 को मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली बैठक हुई। इस बैठक के एजेंडे से कारखाने को पुनर्जीवित करने का मुद्दा पूरी तरह गायब कर दिया गया।

इसी बैठक के एजेंडे में एक और जानकारी सामने आई। बताया गया कि कारखाने की 37.887 हेक्टेयर जमीन 60.92 करोड़ रुपए में एमएसएमई विभाग को पहले ही सौंपी जा चुकी है। यानी सीएम की घोषणा के बाद भी जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया आगे बढ़ती रही।

अफसरों के अलग-अलग बयान

इस मामले पर जुड़े अधिकारियों और पूर्व अफसरों के बयान भी अलग-अलग हैं।

कैलारस शक्कर कारखाने के पूर्व सीजीएम एमडी पराशर ने इसे समझ से परे फैसला बताया। उनका कहना है कि सीएम ने पुनर्जीवित करने की घोषणा की, लेकिन जमीन औने-पौने दाम में बेच दी गई।

वहीं कारखाने के महाप्रबंधक भास्कर शर्मा ने जमीन बेचने की बात को गलत व्याख्या बताया। उनके मुताबिक यह शासन की जमीन थी। साथ ही उन्होंने कहा कि कुछ बातें अभी सार्वजनिक नहीं की जा सकतीं।

वहीं जिला व्यापार उद्योग केंद्र मुरैना के जीएम अरविन्द माहेश्वरी ने बताया कि, जमीन MSME को हस्तांतरित हो चुकी है। उनके अनुसार अब इस जमीन पर नया इंडस्ट्रियल एरिया विकसित किया जाएगा।

ये खबरें भी पढ़िए...

कैलारस शक्कर कारखाना हमेशा के लिए बंद, 23 हजार किसानों का सपना टूटा

कैलारस शक्कर कारखाने की जमीन एमएसएमई को सौंपी

रिश्वत मांग रहा था पटवारी, किसान ने घर में घुसकर पकड़ी गर्दन, जमकर पीटा

कांग्रेस नेता ने किसानों पर तानी पिस्टल, कहा- हट जाओ नहीं तो गोली मार दूंगा

Tags:
  • मुख्यमंत्री मोहन यादव
  • मुरैना
  • लघु और मध्यम उद्यम विभाग
  • एमएसएमई
गूगल पर द सूत्र चुनें ! Add as a preferredsource on Google
पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई

By Arun Tiwari

पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई
भोपाल की सेज यूनिवर्सिटी में छात्रों का हंगामा: हॉस्टल मेस के खाने में कीड़े मिलने का आरोप, अब खाद्य विभाग करेगा जांच

By Jitendra Shrivastava

भोपाल की सेज यूनिवर्सिटी में छात्रों का हंगामा: हॉस्टल मेस के खाने में कीड़े मिलने का आरोप, अब खाद्य विभाग करेगा जांच
UPI एमडीआर पर सुप्रीम कोर्ट का रोक से इनकार: 15 अक्टूबर से दुकानदारों को देना होगा 0.4 फीसदी चार्ज

By Sanjay Dhiman

UPI एमडीआर पर सुप्रीम कोर्ट का रोक से इनकार: 15 अक्टूबर से दुकानदारों को देना होगा 0.4 फीसदी चार्ज
अस्पताल का लैब बोतलों में भ्रूण : कोरबा के लाइफ केयर हॉस्पिटल में कौन सा खेल? कोर्ट को भी नहीं मिला जवाब

By VINAY VERMA

अस्पताल का लैब बोतलों में भ्रूण : कोरबा के लाइफ केयर हॉस्पिटल में कौन सा खेल? कोर्ट को भी नहीं मिला जवाब
RCA चुनाव में बड़ा उलटफेर, राजेंद्र राठौड़ के बेटे पराक्रम सिंह ने छोड़ा मैदान

By Ashish Bhardwaj

RCA चुनाव में बड़ा उलटफेर, राजेंद्र राठौड़ के बेटे पराक्रम सिंह ने छोड़ा मैदान
वेदांता ग्रुप को जल्द नया और युवा नेतृत्व मिलेगा: प्रिया अग्रवाल हेब्बर हो सकती हैं उत्तराधिकारी, कौन सी जिम्मेदारी मिलेगी?

By Arohi Raj

वेदांता ग्रुप को जल्द नया और युवा नेतृत्व मिलेगा: प्रिया अग्रवाल हेब्बर हो सकती हैं उत्तराधिकारी, कौन सी जिम्मेदारी मिलेगी?
हाईकोर्ट की फटकार से जागा स्वास्थ्य विभाग: सचिव अमित कटारिया पर लगा जुर्माना, लापरवाही में कांकेर CMHO सस्पेंड

By Umeshwari Baghel

हाईकोर्ट की फटकार से जागा स्वास्थ्य विभाग: सचिव अमित कटारिया पर लगा जुर्माना, लापरवाही में कांकेर CMHO सस्पेंड