इंदौर में कर्बला मैदान वक्फ की संपत्ति नहीं, यह नगर निगम के लिए घोषित, कोर्ट ने कहा- ताजिए ठंडे करने से जमीन वक्फ की नहीं होती
Sanjay Gupta | Sept 14, 2024, 15:51 IST
कर्बला मैदान वक्फ का नहीं, निगम का
इंदौर नगर निगम को कर्बला मैदान की 6.70 एकड़ जमीन का स्वामित्व मिला, जिसकी कीमत सौ करोड़ से ज्यादा है। कोर्ट ने वक्फ संपत्ति मानने से इंकार कर दिया है।
इंदौर नगर निगम की एक बड़ी जीत हुई है। देश में वक्फ संपत्तियों को लेकर चल रहे विवाद के बीच बड़ी खबर कोर्ट से आई है, जहां कर्बला मैदान की 6.70 एकड़ जमीन जिसकी कीमत सौ करोड़ से ज्यादा की है, पर स्वामित्व नगर निगम को दे दिया गया है। जिला कोर्ट ने पूर्व 2019 के आदेश को पलटते हुए इस जमीन को वक्फ की संपत्ति मानने से साफ इंकार करते हुए निगम का मालिकाना हक पाया और डिक्री करने के भी आदेश दिए। कोर्ट ने कहा कि ताजिए ठंडे होने और मोर्हरम वहां होने भर से संपत्ति वक्फ की नहीं होती है।
![कोर्ट ने कहा- ताजिए ठंडे करने से जमीन वक्फ की नहीं होती]()
महापौर पुष्यमित्र भार्गव इस जमीन के लिए लंबे समय से लगे हुए थे। इस मामले में उन्होंने ही अपील लगवाई और खुद व्यक्तिगत तौर पर भी जमीन की कानूनी लड़ाई के लिए विविध केस का अध्ययन किया। वहीं वकीलों के साथ बैठक कर मजबूती से इसका पक्ष कोर्ट के सामने रखवाया। निगमायुक्त शिवम वर्मा ने पूरी टीम के साथ मिलकर मजबूती से इसके सभी तथ्य जुटाए।
जिला कोर्ट न्यायाधीश नरसिंह बघेल ने यह फैसला सुनाया है। इसमें नगर निगम याचिकाकर्ता था और प्रतिवादी पक्ष में कर्बला कमेटी और वक्फ बोर्ड था। इसमें निगम का कहना था कि यह जमीन नगर निगम एक्ट 1956 की धारा 82 के तहत हमारी है क्योंकी पूर्व के 1909 एक्ट और बाद में बने एक्ट में भी प्रावधान है कि निगम क्षेत्र की सभी खुली जमीन जो शासन के या किसी व्यक्ति के नाम नहीं वह निगम की होती है। वहीं निगम के रिकार्ड में सर्वे नंबर 17017 में निगम की बंजर जमीन के रूप में और राजस्व रिकार्ड के सर्वे नंबर 1041 में यह जमीन चरनोई के रूप में दर्ज है। निगम ने ही यहां पर धोबी घाट बनवाया है, जिसका वर किराया लेता है और साथ ही यहां पर कर्बला मैदान के लिए साल में तीन दिन की मंजूरी भी निगम द्वारा दी जाती है। यहां पर 1979 से कब्जे का प्रयास हो रहा है। कर्बला कमेटी को केवल 0.02 एकड़ जमीन पर ताजिए ठंडे करने के लिए जमीन दी गई है।
कमेटी का कहना था कि यह संपत्ति 1984 में वक्फ की घोषित हो गई थी। इसके साथ ही गजट नोटिफिकेशन भी हो गया था। यहां 150 साल से कर्बला मैदान पर मेला लगता है और ताजिए ठंडे किए जाते हैं। होलक समय से यहां यह धार्मिक गतिविधि की जा रही है।
कोर्ट ने कहा- ताजिए ठंडे करने से जमीन वक्फ की नहीं होती
महापौर की रही अहम भूमिका
निगम ने यह तथ्य रखे
वक्फ कमेटी और कर्बला कमेटी का दावा
इस आधार पर कोर्ट ने निगम की मानी
- वक्फ कमेटी के गजट नोटिफिकेशन पर 1991 में आपत्ति कोर्ट में लग चुकी है, तत्तकालीन कलेक्टर के पास मामला आने पर तहसीलदार से आदेश भी जारी हुए। वक्फ का मुख्य अंश होता है दान दिया जाना, वह इस जमीन को लेकर नहीं है। महाराज ने किसी तरह का पट्टा, दानपत्र नहीं दिया था।
- निगम एक्ट की धारा 82 खुली जमीन निगम को देती है
- केवल ताजिए ठंडे करने मोर्हरम के लिए जमीन मिलने से जमीन वक्फ की नहीं हो जाती है।
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