रनवे पर पसरा सन्नाटा, फिर भी देश का नंबर-1 एयरपोर्ट बना खजुराहो, भोपाल नंबर 3 पर
Aman Vaishnav | Jul 28, 2026, 15:00 IST
देश का बेस्ट एयरपोर्ट बना खजुराहो एयरपोर्ट
AAI के सर्वे में खजुराहो एयरपोर्ट को भारत का सर्वश्रेष्ठ एयरपोर्ट चुना गया है। हैरानी की बात यह है कि जुलाई-अगस्त में यहां से एक भी कमर्शियल फ्लाइट नहीं चल रही है। इसके बावजूद खजुराहो को यह सम्मान मिला है।
समझें क्या है पूरा मामला...
- खजुराहो एयरपोर्ट को AAI के सर्वे में देश का सबसे अच्छा एयरपोर्ट चुना गया है।
- हैरानी की बात यह है कि जुलाई और अगस्त में यहां से एक भी फ्लाइट नहीं उड़ रही।
- पहले भी यहां से सिर्फ दो फ्लाइट चलती थीं, दिल्ली और वाराणसी के लिए।
- अब दोनों बंद हो चुकी हैं। अक्टूबर से उड़ानें फिर शुरू हो सकती हैं।
टॉप रैंकिंग की हैरान करने वाली वजह
यह सर्वे कस्टमर सेटिस्फैक्शन इंडेक्स, यानी CSI (Customer Satisfaction Index) पर आधारित है। इसी सर्वे में हैरान करने वाला तथ्य भी सामने आया है। जुलाई और अगस्त के दौरान इस एयरपोर्ट से एक भी कमर्शियल फ्लाइट संचालित नहीं हो रही है।
इस नतीजे ने एविएशन इंडस्ट्री को भी चौंका दिया है। कई जानकार अब सर्वे के मानदंडों पर सवाल उठा रहे हैं।
पहले भी सुस्त उड़ानों की रफ्तार
बता दें कि यह एयरपोर्ट काफी पुराना है। इसका टर्मिनल 1960 के दशक के अंत में बनकर तैयार हुआ था। रिपोर्ट के मुताबिक यहां पहली फ्लाइट 1978 में उतरी थी। इसके बावजूद इस साल के द्विवार्षिक यात्री सर्वे में इसने बड़े और व्यस्त एयरपोर्ट्स को पीछे छोड़ दिया।
यह सम्मान ऐसे समय मिला है जब मानसून के चलते रनवे पूरी तरह शांत पड़ा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार एयरपोर्ट डायरेक्टर संतोष सिंह ने बताया कि यहां से उड़ानें आमतौर पर दिल्ली और वाराणसी जाती हैं। उन्होंने बताया कि 1 जुलाई से एक भी फ्लाइट नहीं उड़ी है।
उड़ानें कब होंगी फिर शुरू
कैसे तय होती है रैंकिंग
इसमें यात्री 33 मुख्य मानकों पर एयरपोर्ट को आंकते हैं। इनमें ग्राउंड ट्रांसपोर्ट, पार्किंग, वाई-फाई और फूड आउटलेट्स जैसे बिंदु शामिल हैं। साफ-सफाई और हाइजीन से जुड़े सवाल भी अलग से पूछे जाते हैं।
इन सभी अंकों को मिलाकर 5 में से एक कंपोजिट रेटिंग तैयार की जाती है। यही रेटिंग तय करती है कि कौन सा एयरपोर्ट किस पायदान पर रहेगा।
खास बात यह है कि इस रेटिंग में उड़ानों की संख्या को सीधे तौर पर नहीं आंका जाता। सर्वे का पूरा फोकस यात्री अनुभव पर रहता है। यही वजह है कि एक छोटा और कम व्यस्त एयरपोर्ट भी बड़े एयरपोर्ट्स को पीछे छोड़ सकता है।
यात्रियों और पर्यटन पर असर
दिल्ली और वाराणसी जैसे बड़े शहरों से सीधी उड़ान न होने पर यात्रियों को सड़क या रेल मार्ग का सहारा लेना पड़ रहा है। इससे यात्रा में ज्यादा समय भी लग सकता है।
स्थानीय लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रिया
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