सीएम मोहन यादव की मौजूदगी में कुमार विश्वास किसे दे गए सूअर पालने की सलाह?
Amresh Kushwaha | Mar 19, 2026, 13:38 IST
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भोपाल में हुए कवि सम्मेलन में कुमार विश्वास ने राजा और सूअर की कहानी सुनाकर सत्ता पर तंज कसा। साथ ही इशारों ही इशारों में मुख्यमंत्री को जमीनी हकीकत जानने की सलाह दे दी।
मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के अटल पथ पर बुधवार, 18 मार्च की शाम शब्दों के बाणों और ठहाकों के नाम रही। बता दें कि यहां अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया था।
मंच पर जब मशहूर कवि डॉ. कुमार विश्वास माइक पर आए, तो उन्होंने अपनी चिर-परिचित शैली में सत्ता और सिंहासन को आईना दिखाया।
इसी मंच से कुमार विश्वास ने राजा और सूअर की एक कहानी भी सुनाई। इस कहानी ने न केवल जनता को लोटपोट किया, बल्कि सत्ता के गलियारों में चर्चा छेड़ दी है। जानें कुमार विश्वास ने कैसे सीएम मोहन यादव को इशारों-इशारों में सूअर पालने की सलाह दे दी!
मंच से कवि कुमार विश्वास ने कहा कि हर राजा को अपने दरबार में कालिदास जैसे विद्वान रखने चाहिए, जो चापलूसी के बजाय सच बोल सकें। उन्होंने एक कहानी साझा की कि कैसे एक राजा अपनी प्रजा का हाल जानने निकला और उसकी मुलाकात एक सूअर (Pig) से हुई।
जब राजा ने राज्य का हाल पूछा, तो सूअर ने दोटूक कहा कि हालत बहुत खराब है। हैरान राजा ने जब कहा कि मेरे मंत्री तो सब ठीक बताते हैं, तब सूअर का जवाब सुनने लायक था। सूअर ने कहा कि वे झूठ बोलते हैं क्योंकि उन्हें पद छिनने का डर है, और सिपाही डर के मारे सच नहीं कहते हैं।
जब राजा ने सूअर से पूछा कि तुम्हें डर नहीं लगता? तो उसने जवाब दिया कि महाराज, मैं तो पहले ही कीचड़ (Mud) में पड़ा हूं, इससे बुरा मेरा क्या होगा? इस कहानी के जरिए विश्वास ने सत्ता के आसपास रहने वाले यस-मैन पर करारा प्रहार किया।
उन्होंने राजा भोज के 365 जल स्रोतों का उदाहरण देते हुए कहा कि जो शासक लोककल्याण करेगा, वही जनता के दिलों पर राज करेगा।
राजनीति पर टिप्पणी करते हुए कुमार विश्वास ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को याद किया। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा था कि एक वोट खरीदकर भी सरकार बनती हो, तो ऐसी सरकार को मैं चिमटे से छूना भी पसंद नहीं करूंगा। उन्होंने वर्तमान परिदृश्य को जोड़ते हुए कहा कि वह राम काल था, लेकिन अब मोहन काल और कृष्ण काल चल रहा है।
कुमार विश्वास ने 2018 में बनी कांग्रेस सरकार और 2020 में हुए तख्तापलट पर भी चुटकी ली। उन्होंने कमलनाथ पर तंज कसते हुए कहा कि उनकी बारात तो निकली थी, आगे-आगे दिग्विजय सिंह भी चल रहे थे, लेकिन पीछे के बारातियों को तो बीजेपी वाले अपने साथ ले गए। जब पीछे मुड़कर देखा, तो बारात में गिने-चुने लोग ही बचे थे। उनका इशारा ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ भाजपा में शामिल हुए 20 से अधिक विधायकों की ओर था, जिसके बाद शिवराज सिंह चौहान ने फिर से कमान संभाली थी।
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मंच पर जब मशहूर कवि डॉ. कुमार विश्वास माइक पर आए, तो उन्होंने अपनी चिर-परिचित शैली में सत्ता और सिंहासन को आईना दिखाया।
इसी मंच से कुमार विश्वास ने राजा और सूअर की एक कहानी भी सुनाई। इस कहानी ने न केवल जनता को लोटपोट किया, बल्कि सत्ता के गलियारों में चर्चा छेड़ दी है। जानें कुमार विश्वास ने कैसे सीएम मोहन यादव को इशारों-इशारों में सूअर पालने की सलाह दे दी!
राजा, सूअर और कड़वा सच: दरबारियों पर तंज
जब राजा ने राज्य का हाल पूछा, तो सूअर ने दोटूक कहा कि हालत बहुत खराब है। हैरान राजा ने जब कहा कि मेरे मंत्री तो सब ठीक बताते हैं, तब सूअर का जवाब सुनने लायक था। सूअर ने कहा कि वे झूठ बोलते हैं क्योंकि उन्हें पद छिनने का डर है, और सिपाही डर के मारे सच नहीं कहते हैं।
मैं तो पहले ही कीचड़ में हूं
उन्होंने मजाकिया लहजे में सलाह दी कि हर राजा को कम से कम चार सूअर जरूर पालने चाहिए, ताकि उसे जमीनी हकीकत का पता चलता रहे। कुमार विश्वास की इस बात पर अब कयास लगए जा रहे हैं कि उन्होंने यह बात इशारों-इशारों में सीएम को कही है।
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