भोपाल गैस त्रासदी का दर्द बयां करने वाले दिग्गज फोटोग्राफर रघु राय का निधन
Kaushiki | Apr 26, 2026, 11:50 IST
raghu rai death
भारत के सबसे प्रतिष्ठित फोटोग्राफर रघु राय का 83 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे कैंसर से जूझ रहे थे। उन्होंने भोपाल त्रासदी और कई ऐतिहासिक पलों को कैमरे में कैद किया।
Raghu Rai passes away:आज भारतीय कला और पत्रकारिता जगत के लिए एक बहुत ही गमगीन सुबह है। दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित फोटो जर्नलिस्टों में शुमार रघु राय अब यादों में बस गए हैं। 83 साल की उम्र में उन्होंने दिल्ली में आखिरी सांस ली।
उनके परिवार ने इंस्टाग्राम के जरिए इस दुखद खबर की पुष्टि की है। आज शाम 4 बजे लोधी श्मशान घाट में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। रघु राय को भारतीय फोटोग्राफी का 'पितामह' कहना बिल्कुल गलत नहीं होगा।
उनका जन्म 1942 में अविभाजित भारत (अब पाकिस्तान) के झंग में हुआ था। उन्होंने 1962 में फोटोग्राफी को अपना करियर बनाने का फैसला किया था। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर कभी नहीं देखा और लगातार काम किया।
उन्होंने द स्टेट्समैन और इंडिया टुडे जैसे संस्थानों को ऊंचाइयों पर पहुंचाया। वह मैग्नम फोटोज के सदस्य बनने वाले शुरुआती भारतीयों में से एक थे। रघु राय की तस्वीरें सिर्फ फोटो नहीं, बल्कि बोलती हुई कहानियां होती थीं।
रघु राय को उनकी एक तस्वीर के लिए पूरी दुनिया आज भी याद करती है। यह तस्वीर 1984 की भोपाल गैस त्रासदी के बाद की थी। इसमें एक मासूम बच्चे का निर्जीव शरीर मिट्टी में दबा दिख रहा था।
![Bhopal Gas Tragedy : SC Agrees To Hear In April Centre's Petition For Additional Compensation From Union Carbide]()
उस एक तस्वीर ने पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया था। इस फोटो ने कॉरपोरेट जिम्मेदारी पर एक वैश्विक बहस छेड़ दी थी। उनके कैमरे ने उस दर्द को कैद किया जो शब्द नहीं कह पाए।
![कैमरे से इतिहास रचने वाले रघु राय का निधन, भारतीय फोटोग्राफी युग का अंत]()
रघु राय ने न केवल हादसों को बल्कि भारत की महान शख्सियतों को भी करीब से देखा। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के साथ लंबे समय तक काम किया। उन्होंने इंदिरा जी के जीवन के बहुत ही निजी और महत्वपूर्ण क्षणों को कैमरे में उतारा।
इसके अलावा, मदर टेरेसा पर उनकी फोटोग्राफी को पूरी दुनिया में सराहा गया। उन्होंने 'Saint Mother' नाम से उन पर एक किताब भी लिखी थी, जो संत घोषित होने से पहले ही रिलीज हो गई थी।
![Exposure: Portrait Of A Corporate Crime • Raghu Rai • Magnum Photos]()
भारत सरकार ने 1971 में उन्हें पद्म श्री सम्मान मिला था। यह सम्मान उन्हें बांग्लादेश मुक्ति युद्ध की बेहतरीन फोटोग्राफी के लिए मिला था। उन्होंने अपने पूरे जीवन में 18 से अधिक किताबें लिखीं और प्रकाशित कीं।
उनकी फोटोग्राफी को आज भी कॉलेजों में एक कोर्स की तरह पढ़ाया जाता है। उन्होंने हमेशा कहा कि कैमरा सिर्फ एक मशीन नहीं, बल्कि दिल का हिस्सा है। उनका जाना एक पूरे युग का अंत होने जैसा है।
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उनके परिवार ने इंस्टाग्राम के जरिए इस दुखद खबर की पुष्टि की है। आज शाम 4 बजे लोधी श्मशान घाट में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। रघु राय को भारतीय फोटोग्राफी का 'पितामह' कहना बिल्कुल गलत नहीं होगा।
उनका जन्म 1942 में अविभाजित भारत (अब पाकिस्तान) के झंग में हुआ था। उन्होंने 1962 में फोटोग्राफी को अपना करियर बनाने का फैसला किया था। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर कभी नहीं देखा और लगातार काम किया।
उन्होंने द स्टेट्समैन और इंडिया टुडे जैसे संस्थानों को ऊंचाइयों पर पहुंचाया। वह मैग्नम फोटोज के सदस्य बनने वाले शुरुआती भारतीयों में से एक थे। रघु राय की तस्वीरें सिर्फ फोटो नहीं, बल्कि बोलती हुई कहानियां होती थीं।
भोपाल गैस त्रासदी की वो खौफनाक तस्वीर
Bhopal Gas Tragedy : SC Agrees To Hear In April Centre's Petition For Additional Compensation From Union Carbide
उस एक तस्वीर ने पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया था। इस फोटो ने कॉरपोरेट जिम्मेदारी पर एक वैश्विक बहस छेड़ दी थी। उनके कैमरे ने उस दर्द को कैद किया जो शब्द नहीं कह पाए।
कैमरे से इतिहास रचने वाले रघु राय का निधन, भारतीय फोटोग्राफी युग का अंत
इंदिरा गांधी और मदर टेरेसा के साथ गहरा रिश्ता
इसके अलावा, मदर टेरेसा पर उनकी फोटोग्राफी को पूरी दुनिया में सराहा गया। उन्होंने 'Saint Mother' नाम से उन पर एक किताब भी लिखी थी, जो संत घोषित होने से पहले ही रिलीज हो गई थी।
Exposure: Portrait Of A Corporate Crime • Raghu Rai • Magnum Photos
सम्मान और फोटोग्राफी की दुनिया में योगदान
उनकी फोटोग्राफी को आज भी कॉलेजों में एक कोर्स की तरह पढ़ाया जाता है। उन्होंने हमेशा कहा कि कैमरा सिर्फ एक मशीन नहीं, बल्कि दिल का हिस्सा है। उनका जाना एक पूरे युग का अंत होने जैसा है।
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