लाइफ सर्टिफिकेट जमा करने के नाम पर रिटायर्ड जज हो रहे हैं हलाकान, वित्त विभाग के चीफ सेक्रेटरी HC में देंगे जवाब
Neel Tiwari | Oct 29, 2025, 19:41 IST
Photograph: (thesootr)
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने रिटायर्ड न्यायाधीशों की पेंशन पर आपत्ति जताई। कोर्ट ने फिजिकल लाइफ सर्टिफिकेट की शर्त को अव्यावहारिक बताया। साथ ही इसे असंगत करार दिया। राज्य सरकार को डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट स्वीकार करने का आदेश दिया गया।
JABALPUR. मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने बुधवार को रिटायर्ड न्यायाधीशों की पेंशन और भत्तों से जुड़े नियमों पर कड़ी आपत्ति जताई है। कोर्ट ने कहा कि पेंशन के लिए डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट स्वीकार किया जाना और उससे जुड़े भत्तों के लिए रिटायरमेंट जिले में जाकर फिजिकल लाइफ सर्टिफिकेट जमा करने की शर्त “बेहद अव्यावहारिक” है। अदालत ने इस पूरे नियम को असंगत बताते हुए राज्य सरकार से इस पर ठोस कदम उठाने को कहा।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि पेंशन के लिए डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट जमा करने का प्रावधान है। पेंशन से जुड़े मेडिकल भत्ते जैसी सुविधाओं के लिए रिटायर्ड न्यायिक अधिकारियों को उसी जिले में जाकर प्रमाणपत्र जमा करना होता है, जहां से वे सेवानिवृत्त हुए थे।
इस पर चीफ जस्टिस ने सरकार से सवाल किया कि क्या यही नियम राज्य के अन्य कर्मचारियों पर भी लागू है। सरकार की ओर से जवाब मिला कि राज्य के सभी कर्मचारियों को डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट देने की अनुमति है। इस पर कोर्ट ने कहा कि ऐसे में न्यायिक अधिकारियों के लिए अलग नियम बनाना न केवल असंगत बल्कि वृद्ध जजों को परेशान करने वाला भी है।
ये भी पढ़ें...MPPSC राज्य सेवा परीक्षा 2023 के लिए आई खुशखबरी, मिलेंगे नए अधिकारी
सरकार ने इस मामले में सुधार पर विचार करने के लिए समय मांगा। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि जो भी बदलाव किए जाएं। वे न्यायिक अधिकारियों के साथ-साथ राज्य के अन्य कर्मचारियों पर भी समान रूप से लागू होंगे। कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी में कहा कि यह ध्यान रखा जाए कि जो नियम रिटायर्ड जजों के लिए बनेंगे, वही नियम आपके सभी स्टेट एम्पलाइज पर भी लागू होंगे।
ये भी पढ़ें...एमपी पुलिस भर्ती 2025 में पक्की नौकरी के लिए ये हैं सबसे बेस्ट ऑनलाइन कोर्सेस और ऐप्स
जस्टिस संजीव सचदेवा की बेंच ने मुख्य सचिव को तलब किया। कोर्ट ने पूछा कि इस नियम में क्या बदलाव संभव हैं। शासन ने कहा कि मुख्य सचिव को न तलब किया जाए। कोर्ट ने कहा, हम उन्हें केवल निवेदन कर रहे हैं।” कोर्ट ने मुख्य सचिव से अव्यावहारिक व्यवस्था सुधारने का पूछा।
मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि रिटायर्ड न्यायिक कर्मचारी भोपाल या सागर जा सकते हैं। उन्होंने कहा, “मुख्य सचिव को भी जबलपुर आना असुविधाजनक नहीं होना चाहिए।
ये भी पढ़ें...एमपी में SIR को लेकर सियासी घमासान : जीतू पटवारी बोले- चुनाव आयोग का दुरुपयोग कर रही BJP
ये भी पढ़ें...भारतमाला प्रोजेक्ट घोटाला: हाईकोर्ट ने ठुकराई अधिकारियों की जमानत याचिकाएं, 600 करोड़ की जांच जारी
पूर्व न्यायाधीश कल्याण एसोसिएशन की ओर से याचिका दायर की गई। अधिवक्ता हितेश शर्मा ने यह याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया कि 2005 से पहले जिला न्यायाधीशों को पेंशन और भत्ते मिलते थे। बाद में नियुक्त न्यायाधीशों ने भी भत्ते मांगे। सरकार ने आदेश जारी किए लेकिन हर साल अनुमोदन की शर्त जोड़ दी।
याचिकाकर्ता के अनुसार, 80 वर्ष से अधिक आयु के जजों को हर साल सर्टिफिकेट जमा करने के लिए अपने जिले जाना पड़ता है। पहले यह प्रक्रिया बैंक के माध्यम से डिजिटल रूप में होती थी। अदालत ने इस नियम को पुनः समीक्षा के लिए लिया है। अगली सुनवाई 4 नवंबर को होगी।
न्यायिक कर्मचारियों के लिए अलग-अलग नियम
इस पर चीफ जस्टिस ने सरकार से सवाल किया कि क्या यही नियम राज्य के अन्य कर्मचारियों पर भी लागू है। सरकार की ओर से जवाब मिला कि राज्य के सभी कर्मचारियों को डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट देने की अनुमति है। इस पर कोर्ट ने कहा कि ऐसे में न्यायिक अधिकारियों के लिए अलग नियम बनाना न केवल असंगत बल्कि वृद्ध जजों को परेशान करने वाला भी है।
ये भी पढ़ें...MPPSC राज्य सेवा परीक्षा 2023 के लिए आई खुशखबरी, मिलेंगे नए अधिकारी
नियम में सुधार सोच-समझकर करें
ये भी पढ़ें...एमपी पुलिस भर्ती 2025 में पक्की नौकरी के लिए ये हैं सबसे बेस्ट ऑनलाइन कोर्सेस और ऐप्स
चीफ सेक्रेटरी देंगे कोर्ट में जवाब
मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि रिटायर्ड न्यायिक कर्मचारी भोपाल या सागर जा सकते हैं। उन्होंने कहा, “मुख्य सचिव को भी जबलपुर आना असुविधाजनक नहीं होना चाहिए।
ये भी पढ़ें...एमपी में SIR को लेकर सियासी घमासान : जीतू पटवारी बोले- चुनाव आयोग का दुरुपयोग कर रही BJP
ये भी पढ़ें...भारतमाला प्रोजेक्ट घोटाला: हाईकोर्ट ने ठुकराई अधिकारियों की जमानत याचिकाएं, 600 करोड़ की जांच जारी
भत्ते की मंजूरी के लिए हर साल भटकना पड़ रहा
याचिकाकर्ता के अनुसार, 80 वर्ष से अधिक आयु के जजों को हर साल सर्टिफिकेट जमा करने के लिए अपने जिले जाना पड़ता है। पहले यह प्रक्रिया बैंक के माध्यम से डिजिटल रूप में होती थी। अदालत ने इस नियम को पुनः समीक्षा के लिए लिया है। अगली सुनवाई 4 नवंबर को होगी।
MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग
By Atul Dwivedi
एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
By Jitendra Shrivastava
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
By Sanjay Dhiman
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
By Sanjay Gupta
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा
By Arun Tiwari