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News In Short
- लिपिक राहुल मिश्रा ने स्वीकारी 17.36 लाख की धोखाधड़ी।
- प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के अफसरों की कार्रवाई पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
- सीएमएचओ ने 1 जनवरी को जांच रिपोर्ट भेजी, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए।
- राहुल मिश्रा ने 2 महीने में राशि लौटाने का वादा किया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं।
- फर्जी खाता खोलकर एटीएम और चेक से 17.36 लाख रुपए निकाले गए।
News In Detail
कटनी. रिटायर्ड ANM सावित्री वर्मा के साथ हुई 17.36 लाख की धोखाधड़ी का मामला प्रशासन के लिए सिरदर्द बन चुका है। हैरान करने वाली बात यह है कि आरोपी लिपिक राहुल मिश्रा ने खुद इस धोखाधड़ी को स्वीकार किया है। इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
यह घटना शहर में चर्चा का विषय बन गई है, जहां प्रशासन की नाकामी पर सवाल उठ रहे हैं।
लिपिक ने अपराध स्वीकार किया
लिपिक राहुल मिश्रा ने स्वीकार किया कि, उसने सावित्री वर्मा का जीपीएफ और ग्रेच्युटी की राशि अपने एक्सिस बैंक खाते में जमा की। यह राशि कुल 17.36 लाख रुपए थी। मिश्रा ने माना है कि उसने राशि को निकाल ली है। उसने यह भी कहा कि वह यह राशि महिला कर्मचारी को लौटाएगा। हालांकि, इसके लिए उसने दो महीने का समय मांगा है।
अधिकारी कर रहे हैं धोखाधड़ी को नजरअंदाज
यह मामला तब सामने आया जब 28 दिसंबर को एक समाचार पत्र में इस धोखाधड़ी की खबर प्रकाशित हुई थी। इसके बाद कलेक्टर आशीष तिवारी ने जांच के निर्देश दिए थे। हालांकि अब तक मामले की जांच में कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।
सीएमएचओ ने एक जनवरी को भेजे गए पत्र में यह कहा गया कि, राशि एक्सिस बैंक खाते में भेजी गई है। जबकि यह साफ था कि राहुल मिश्रा को सीएमएचओ कार्यालय का कर्मचारी नहीं बताया गया। इस स्थिति ने प्रशासन की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
फर्जी खाता खोलकर धोखाधड़ी की योजना
मामला और भी गंभीर हो जाता है जब यह सामने आता है कि स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों ने सावित्री वर्मा का फर्जी खाता (fake account) खोलने की योजना बनाई। इस खाता में 17.36 लाख रुपए को जमा करने के बाद, नकद, एटीएम और चेक के माध्यम से यह राशि निकाली गई।
खास बात यह है कि आरोपी ने 144 बार एटीएम का इस्तेमाल करके राशि हड़पने का काम किया। यह फर्जीवाड़ा इतना बड़ा था कि उसमें अन्य कर्मचारियों की राशि भी शामिल की गई थी।
क्या है मामला?
सावित्री वर्मा, जो कि 72 वर्ष की हैं, पहले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बहोरीबंद में एएनएम (Auxiliary Nurse Midwife) के पद पर कार्यरत थीं। 31 अगस्त 2016 को वह सेवानिवृत्त हुई थीं। उन्हें अपने जीपीएफ और ग्रेच्युटी के कुल 17.36 लाख रुपए मिलने थे।
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लेकिन इस राशि का भुगतान करने में एमपी स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों द्वारा धोखाधड़ी की गई। इस मामले को लेकर सावित्री वर्मा कई सालों तक विभाग के चक्कर काटती रहीं, लेकिन उन्हें किसी भी तरह की मदद नहीं मिल पाई।
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