एमपी के महानगरों में सांस लेना हुआ मुश्किलः बढ़ते प्रदूषण से परेशान लोग, हरियाली बढ़ाना ही आखिरी उपाय
Sanjay Dhiman | Nov 24, 2025, 17:56 IST
Photograph: (the sootr)
मध्य प्रदेश के बड़े शहरों में वायु प्रदूषण सर्दियों में खतरनाक स्तर पर है। लगातार बढ़ते AQI ने चिंता बढ़ा दी है। लोगों का सांस लेना मुश्किल हो रहा है। इससे स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है।
BHOPAL. आजकल महानगरों में प्रदूषण की समस्या तेजी से बढ़ रही है। इसका असर सीधे तौर पर लोगों की सेहत पर पड़ रहा है। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPPCB) और IQAirने बढ़ते प्रदूषण के चौंकाने वाले आंकड़े दिए हैं। इन आंकड़ों के हिसाब से लोगों को प्रदूषण के कारण सांस लेने में दिक्कतें हो रही हैं। सर्दियों में धुंध और कोहरे के कारण यह स्थिति और खराब हो गई है।
ग्वालियर में एक्यूआई (AQI) 145 तक पहुंच गया है, जो खतरनाक माना जाता है। भोपाल, जबलपुर और सागर में प्रदूषण का स्तर 'मध्यम' श्रेणी में है। विशेषज्ञों ने ऐसी हालत में बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा रोगियों को मास्क पहनने की सलाह दी है।
भोपाल जैसे शहरों में प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए हरियाली बढ़ाना जरूरी है। मध्यप्रदेश सरकार ठोस कदम उठाती है,तो प्रदूषण को 10-15% तक कम किया जा सकता है। अब तक भोपाल में AQI 98 दर्ज किया गया है। यह 'मध्यम' श्रेणी में आता है। प्रदूषण का मुख्य कारण PM2.5 कण हैं। यह कण वाहनों और निर्माण कार्यों से निकलते हैं।
भोपाल के लोगों ने बताया कि सुबह कोहरे और धुंध ने विजिबिलिटी को प्रभावित किया है। इससे सड़क पर चलना भी मुश्किल हो रहा है। पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार हरियाली नहीं बढ़ाई गई तो वायु प्रदूषण और बढ़ सकता है।
यह खबरें भी पढ़ें...
एमपी निकाय चुनाव 2027 के नए नियम: उम्मीदवारों को पत्नी-टैक्स सहित देनी होंगी पूरी जानकारी
किसानों के लिए खुशखबरी, इस बार भी 2600 रुपए प्रति क्विंटल के MSP पर गेहूं खरीदेगी एमपी सरकार
मध्य प्रदेश का सबसे स्वच्छ शहर इंदौर प्रदूषण के मामले में भी बेहतर स्थिति में है। यहां AQI 85 है, जो 'मध्यम' श्रेणी से नीचे है। इंदौर में PM2.5 का स्तर 25 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर है, जो काफी साफ है। शहर में चल रहे स्वच्छता अभियान के कारण हवा की गुणवत्ता में सुधार हुआ है। ट्रैफिक जाम वाले इलाकों में प्रदूषण अभी भी एक समस्या बनी हुई है।
प्रदूषण की जंग को जीतने के लिए हमें सामूहिक प्रयास (collective effort) करने होंगे। नीतियों में सुधार और जन-जागरूकता (public awareness) दोनों जरूरी हैं।
रीवा बना MP में इंडिगो का छठा शहर, दिल्ली के बाद इंदौर फ्लाइट सेवा 22 दिसंबर शुरू
मध्य प्रदेश में अब किसी भी जिले की रजिस्ट्री भोपाल से होगी, जानिए कैसी होगी नई व्यवस्था
वायु प्रदूषण की निगरानी करना जरूरी है ताकि प्रदूषण के स्रोतों को पहचाना जा सके। इसके लिए सरकारी नीतियों को लागू करना और उनका पालन करना आवश्यक है। शहरों में प्रदूषण नियंत्रण के उपायों को सख्ती से लागू किया जाना चाहिए।
ग्वालियर में एक्यूआई (AQI) 145 तक पहुंच गया है, जो खतरनाक माना जाता है। भोपाल, जबलपुर और सागर में प्रदूषण का स्तर 'मध्यम' श्रेणी में है। विशेषज्ञों ने ऐसी हालत में बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा रोगियों को मास्क पहनने की सलाह दी है।
बढ़ाना होगा हरित क्षेत्र
भोपाल के लोगों ने बताया कि सुबह कोहरे और धुंध ने विजिबिलिटी को प्रभावित किया है। इससे सड़क पर चलना भी मुश्किल हो रहा है। पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार हरियाली नहीं बढ़ाई गई तो वायु प्रदूषण और बढ़ सकता है।
यह खबरें भी पढ़ें...
एमपी निकाय चुनाव 2027 के नए नियम: उम्मीदवारों को पत्नी-टैक्स सहित देनी होंगी पूरी जानकारी
किसानों के लिए खुशखबरी, इस बार भी 2600 रुपए प्रति क्विंटल के MSP पर गेहूं खरीदेगी एमपी सरकार
एमपी में बढ़ता प्रदूषण और नुकसान को ऐसे समझेंप्रदूषण का बढ़ता स्तर: मध्य प्रदेश के बड़े शहरों में वायु प्रदूषण बढ़ रहा है, जिससे लोगों को सांस लेने में कठिनाई हो रही है। ग्वालियर का AQI 145 तक पहुंच गया, जो खतरनाक है। हरित क्षेत्र बढ़ाने की आवश्यकता: विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भोपाल जैसे शहरों में हरित क्षेत्र बढ़ाए जाएं, तो प्रदूषण 10-15% तक कम हो सकता है। इंदौर में स्थिति बेहतर: मध्य प्रदेश का सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में Air Quality Index (AQI) 85 है। जो प्रदूषण के स्तर को 'मध्यम' श्रेणी से नीचे रखता है। प्रदूषण को कम करने के उपाय: पेड़ लगाना, स्वच्छ ऊर्जा का उपयोग, और ईंधन का कम इस्तेमाल कर प्रदूषण पर काबू पाया जा सकता है। वायु प्रदूषण से बचने के उपाय: नागरिकों को प्रदूषण के खतरों के प्रति जागरूक करना, और प्रदूषण नियंत्रण नीतियों को लागू करना जरूरी है। |
इंदौर में स्थिति बेहतर
वायु प्रदूषण से बचाने के लिए जरूरी कदम
- पेड़ लगाओ, जीवन बचाओ: हमें अधिकाधिक पौधे लगाने होंगे। उन्हें सिर्फ लगाकर छोड़ना नहीं, बल्कि उनकी देखभाल भी करनी होगी। यह सबसे सीधा और सबसे प्रभावी उपाय है।
- उद्योग और वाहन नियंत्रण: उद्योगों और सड़कों पर दौड़ते वाहनों से निकलने वाले धुएं को सख्ती से नियंत्रित करना पड़ेगा। इसके लिए सख्त प्रदूषण मानदंड लागू हों।
- सौर ऊर्जा को बढ़ावा: सौर ऊर्जा जैसे स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों का उपयोग बढ़ाना होगा। हमें जीवाश्म ईंधन (fossil fuels) पर अपनी निर्भरता को कम करना होगा।
- कूड़ा प्रबंधन: कूड़े का सही प्रबंधन करना और रिसाईकल (recycling) करना बहुत ज़रूरी है, ताकि खुले में कूड़ा जलाने की समस्या खत्म हो।
- जन-जागरूकता: हर नागरिक को वायु प्रदूषण के खतरों के बारे में जागरूक करना होगा। उन्हें प्रदूषण कम करने के लिए प्रेरित करना होगा।
- स्वच्छ ईंधन: स्वच्छ ईंधन का उपयोग बढ़ाना और प्रदूषणकारी ईंधन का इस्तेमाल कम करना होगा।
रीवा बना MP में इंडिगो का छठा शहर, दिल्ली के बाद इंदौर फ्लाइट सेवा 22 दिसंबर शुरू
मध्य प्रदेश में अब किसी भी जिले की रजिस्ट्री भोपाल से होगी, जानिए कैसी होगी नई व्यवस्था
वायु प्रदूषण की निगरानी और शिक्षा
20 हजार करोड़ रुपए के बकाया चालान: सुप्रीम कोर्ट ने दिए अनोखे सुझाव: बिजली बिल में जुड़ सकती है चालान की राशि
By Neel Tiwari
छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस से झूमाझटकी, भूपेश बघेल बोले ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें
By Arun Tiwari
मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी
By Sandeep Kumar
IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी
By VINAY VERMA
राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं
By Ashish Bhardwaj
पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई
By Arun Tiwari
भोपाल की सेज यूनिवर्सिटी में छात्रों का हंगामा: हॉस्टल मेस के खाने में कीड़े मिलने का आरोप, अब खाद्य विभाग करेगा जांच
By Jitendra Shrivastava